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हिमाचल में उद्योगों के लिए और आसान हुए रास्ते

Thu, 11 Jul 2013 05:48 PM IST
शिमला/राजेश मंढोत्रा
शिमला/राजेश मंढोत्रा Updated Thu, 11 Jul 2013 05:48 PM IST
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himachal government changed rules for industries

हिमाचल सरकार औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए भूमि खरीद को और आसान बनाने जा रही है। इसके लिए भूमि सुधार की धारा-118 की बाधाएं हटाने जैसा बड़ा कदम उठाया गया है।

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राज्य में उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों को अब भू-सुधार कानून के तहत भू सौदे की अनुमति लेने के लिए सात तरह की एनओसी नहीं लेनी होगी।

सूबे से बाहर के उद्योगपतियों को यहां उद्योग के लिए जमीन खरीदने पर धारा 118 के तहत अनुमति लेना जरूरी है। अब केवल उद्योगों के लिए इस नियम को सरल किया जा रहा है। कैबिनेट में फैसला होने के बाद इसकी अधिसूचना जल्द जारी हो रही है।
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हेराफेरी रोकने के लिए लंबी प्रक्रिया
नई प्रक्रिया में उद्योग प्रस्ताव पर एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट (ईसी) जारी करने से पहले उद्योग विभाग सात तरह के अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मांगेगा।

ये एनओसी पंचायत या शहरी निकाय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन और राजस्व विभाग आदि से लेने होते हैं। उद्योग को जमीन बेचने वाला व्यक्ति सौदे के बाद भूमिहीन नहीं हो रहा है, इसका भी प्रमाण पत्र लगता है।
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उद्योग को यह भी पहले लिखकर देना होता था कि वह 70 फीसदी हिमाचलियों को रोजगार देगा। इसके बाद ईसी मिलता था और ईसी के आधार पर राजस्व विभाग धारा 118 के तहत भू-सौदे को मंजूरी देता था।

इस मंजूरी से पहले दोबारा सारे दस्तावेज पटवारी के स्तर पर भेजकर वेरिफाई करवाए जाते थे। यह प्रक्रिया बेनामी सौदे और अन्य हेराफेरी रोकने के लिए थी, लेकिन इसमें ज्यादा वक्त लगता था।

उद्योगपति की होगी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था में सरकार ईसी मिलने के बाद उद्योगपति की बात पर ही भरोसा करेगी। बाद में यदि कोई विवाद सामने आया तो जिम्मेदारी उद्योगपति की ही होगी। सरकार सिंगल विंडो की बैठक में टीसीपी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि की आपत्तियों को सुनेगी और फैसला लेगी।


सब कुछ 90 दिन के भीतर होगा
उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री कहते हैं कि धारा 118 की प्रक्रिया इसलिए सरल की जा रही है ताकि औद्योगिक निवेश के प्रस्ताव पर 90 दिन के भीतर फैसला हो सके। उद्योगपतियों को दो-दो बार एनओसी के चक्कर काटने पड़ रहे थे। इसमें वक्त जाया हो रहा था।

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