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Himachal: पार्वती परियोजना चरण-2 में बिजली उत्पादन शुरू, उत्तर भारत होगा रोशन; तीन टरबाइनें लगीं घूमने

Tue, 01 Apr 2025 06:52 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू।
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 01 Apr 2025 06:52 PM IST
सार

मंगलवार यानि आज एक अप्रैल से सैंज में एनएचपीसी की पार्वती चरण-दो में बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है। दिसंबर 1999 को इस परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Electricity generation started in Parvati Project Phase-2 North India will be illuminated
सैंज में पार्वती चरण दो का पावर हाउस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

कुल्लू के सैंज में एनएचपीसी की पार्वती चरण-दो में बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है। चार में से तीन यूनिट में मंगलवार से बिजली पैदा शुरू कर दी है। 800 मेगावाट की पार्वती चरण-दो में चार टरबाइन लगी हुई हैं। इसमें से तीन टरबाइनों का ट्रायल सफल रहा। जबकि, एक अन्य टरबाइन का अभी ट्रायल चल रहा है। प्रत्येक टरबाइन से क्रमश: 200-200 मेगावाट बिजली पैदा होगी। एनएचपीसी के कार्यपालक निदेशक निर्मल सिंह ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता में यह बात कही है।

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उन्होंने कहा कि सिउंड के पास पावर हाउस का निर्माण किया गया है। इस दौरान परियोजना के संचालन के लिए पार्वती नदी के साथ पांच अन्य नालों का भी पानी टनल से लाया गया है। परियोजना की 31.56 किमी लंबी एचआरटी भारत की सबसे लंबी बिजली उत्पादन सुरंग है। जिसका निर्माण टीबीएम से किया गया है। उन्होंने कहा कि दिसंबर 1999 को इस परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। इस परियोजना का निर्माण 13,045 करोड़ से किया गया। इस परियोजना के निर्माण में एनएचपीसी को 25 साल का वक्त लगा है।

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15 पुलों और 88 किमी सड़क का निर्माण
एनएचपीसी ने पार्वती चरण दो के परियोजना क्षेत्र में 15 पुलों का निर्माण किया है। वहीं करीब 88 किमी लंबी सड़कों को निर्माण किया है। परियोजना के प्रभावित क्षेत्र के विकास पर 112 करोड़ की राशि व्यय की है। बिजली परियोजना के निर्माण दौरान सैंज के साथ लगते सिउंड में पहाड़ी दरकने के कारण परियोजना का लक्ष्य 2007 से 2014 किया गया था। निर्माण के दौरान हैडरेस टनल बरशैणी में टीबीएम फंस जाने से निर्माण करीब चार साल तक बंद रहा। वहीं परियोजना की कुल लागत 3,919 करोड़ रुपये थी। अब इसके निर्माण पर 13,045 करोड़ खर्च हुए। चरण-दो से चंडीगढ, दिल्ली, हिमाचल, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तराखंड, छतीसगढ़, पश्चिम-बंगाल और उत्तर प्रदेश रोशन होंगे।
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