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Himachal Assembly Session : मुकेश अग्निहोत्री बोले- आईएसबीटी शिमला की पार्किंग में खुले अस्पताल की होगी जांच
Mon, 25 Aug 2025 06:00 PM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Mon, 25 Aug 2025 06:00 PM IST
सार
Himachal Monsoon Session 2025 : आईएसबीटी शिमला की पार्किंग फ्लोर में खुले अस्पताल की जांच की जाएगी। ये कहना है उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का। पढ़ें पूरी खबर...
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उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि आईएसबीटी शिमला की पार्किंग फ्लोर में खुले अस्पताल की जांच की जाएगी। पूर्व सरकार के समय में यह बस अड्डा बना था। अड्डे में अस्पताल के उपयोग को निदेशक मंडल ने इस शर्त पर दिया था कि ठेकेदार नियामक प्राधिकरण से आवश्यक मंजूरियां प्राप्त करेगा। सभी करों का भुगतान भी स्वयं करेगा। लेकिन, इन मंजूरियों को नहीं लिया गया। बस अड्डों में अस्पताल नहीं खोले जा सकते। सरकार इसकी जांच करवाएगी।
विधायक संजय अवस्थी ने प्रश्नकाल के दौरान यह मामला उठाया। विधायक ने कहा कि पूर्व सरकार के समय प्रदेश की संपदा को लुटाया गया। कंपनी लाखों रुपये कमा रही है, लेकिन सरकार को आय प्राप्त नहीं हो रही। जवाब में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश कानून के रास्ते से ही चलेगा। बिना मंजूरी कोई काम नहीं होगा। जब रेहड़ी-फड़ी लगाने के लिए मंजूरी लेना जरूरी है तो अस्पताल बिना मंजूरी कैसे चला। इसकी जांच करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि मूल करारनामे के अनुसार फ्लोर को व्यावसायिक क्षेत्र में शामिल करने के लिए कोई शर्त नहीं है। निदेशक मंडल की 67वीं बैठक में पार्किंग फ्लोर को निजी अस्पताल में बदलने की अनुमति दी गई।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि संपत्ति कर जो 6 से 7 करोड़ रुपये था, वह भी चुकता नहीं किया गया था। इसके बाद इसका बिजली-पानी काटा गया था। ठेकेदार इसको लेकर हाईकोर्ट गया था। इसे तब बहाल किया गया। उधर, अवस्थी ने कहा कि सरकार ने जो जवाब लिखित में दिया है, वह उससे संतुष्ट नहीं हैं। इस पर विपक्ष ने हल्ला किया तो उप मुख्यमंत्री ने कहा कि संजय अवस्थी हमारे जवाब से संतुष्ट हैं। पूर्व सरकार ने जो कार्य किया, उससे संतुष्ट नहीं हैं।
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विधायक संजय अवस्थी ने प्रश्नकाल के दौरान यह मामला उठाया। विधायक ने कहा कि पूर्व सरकार के समय प्रदेश की संपदा को लुटाया गया। कंपनी लाखों रुपये कमा रही है, लेकिन सरकार को आय प्राप्त नहीं हो रही। जवाब में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश कानून के रास्ते से ही चलेगा। बिना मंजूरी कोई काम नहीं होगा। जब रेहड़ी-फड़ी लगाने के लिए मंजूरी लेना जरूरी है तो अस्पताल बिना मंजूरी कैसे चला। इसकी जांच करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि मूल करारनामे के अनुसार फ्लोर को व्यावसायिक क्षेत्र में शामिल करने के लिए कोई शर्त नहीं है। निदेशक मंडल की 67वीं बैठक में पार्किंग फ्लोर को निजी अस्पताल में बदलने की अनुमति दी गई।
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उप मुख्यमंत्री ने कहा कि संपत्ति कर जो 6 से 7 करोड़ रुपये था, वह भी चुकता नहीं किया गया था। इसके बाद इसका बिजली-पानी काटा गया था। ठेकेदार इसको लेकर हाईकोर्ट गया था। इसे तब बहाल किया गया। उधर, अवस्थी ने कहा कि सरकार ने जो जवाब लिखित में दिया है, वह उससे संतुष्ट नहीं हैं। इस पर विपक्ष ने हल्ला किया तो उप मुख्यमंत्री ने कहा कि संजय अवस्थी हमारे जवाब से संतुष्ट हैं। पूर्व सरकार ने जो कार्य किया, उससे संतुष्ट नहीं हैं।
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नगर निगम मंडी ने सड़कों, गलियों पर खर्च किया पेयजल योजना का पैसा : मुकेश
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने ऊहल नदी से मंडी शहर के लिए स्वीकृत 82.8 करोड़ रुपये की पेयजल स्कीम के मामले में कहा कि नगर निगम ने सड़कों, गलियों पर पेयजल योजना का पैसा खर्च किया। विधायक अनिल शर्मा की ओर से प्रश्नकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए जांच की मांग की गई। इस पर उपमुख्यमंत्री ने जांच संबंधी मामले की बात शहरी विकास विभाग से करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग ने तो काम करवाया है। वह जांच करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हर साल बरसात में मंडी शहर के लिए बनी पेयजल योजना में समस्या बढ़ जाती है। यह पेयजल योजना ऊहल नदी से मंडी शहर के लिए वर्ष 2014 में 82.18 करोड़ की स्वीकृत हुई थी। योजना वर्ष 2018 में पूर्ण कर ली गई थी। 2023 में बादल फटने से भारी बाढ़ आ जाने के कारण योजना के इंटेक स्ट्रक्चर व डिसिल्टिंग टैंक में भारी गाद भर गई थी। इसके कारण मुख्य पेयजल पाइपलाइन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। मथियानी गांव के पास लगातार जमीन धंसने के कारण 450 एमएम ब्यास की पाइप बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही है। इससे पेयजल योजना बाधित हो जाती है। समस्या के समाधान को 21.17 करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर वित्तीय अनुमोदन को एससीए (विशेष केंद्रीय सहायता) के तहत प्रेषित किया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ऊहल नदी (मंडी) से जल आपूर्ति योजना को 8263.95 लाख रुपये की धनराशि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत कर शहरी विकास मंत्रालय से नगर निगम मंडी को प्राप्त हुई थी। नगर निगम ने पूरी धनराशि विभाग को उपलब्ध नहीं करवाई है। 16 किस्तों में जल शक्ति विभाग को 80. 98 करोड़ जारी किया गया। 1.65 करोड़ की धनराशि अभी शेष है। नगर निगम ने इसे सड़कों, गलियों जैसे बुनियादी ढांचों के विकास पर खर्च कर दिया। उप मुख्यमंत्री ने सभी विभागों से आग्रह भी किया कि जिन विभागों के पास पैसा आता है, वह आगे कार्य करने वाली एजेंसी को तरसाकर पैसा जारी न करे। एक या दो किस्तों में पूरा पैसा जारी करें।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने ऊहल नदी से मंडी शहर के लिए स्वीकृत 82.8 करोड़ रुपये की पेयजल स्कीम के मामले में कहा कि नगर निगम ने सड़कों, गलियों पर पेयजल योजना का पैसा खर्च किया। विधायक अनिल शर्मा की ओर से प्रश्नकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए जांच की मांग की गई। इस पर उपमुख्यमंत्री ने जांच संबंधी मामले की बात शहरी विकास विभाग से करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग ने तो काम करवाया है। वह जांच करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हर साल बरसात में मंडी शहर के लिए बनी पेयजल योजना में समस्या बढ़ जाती है। यह पेयजल योजना ऊहल नदी से मंडी शहर के लिए वर्ष 2014 में 82.18 करोड़ की स्वीकृत हुई थी। योजना वर्ष 2018 में पूर्ण कर ली गई थी। 2023 में बादल फटने से भारी बाढ़ आ जाने के कारण योजना के इंटेक स्ट्रक्चर व डिसिल्टिंग टैंक में भारी गाद भर गई थी। इसके कारण मुख्य पेयजल पाइपलाइन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। मथियानी गांव के पास लगातार जमीन धंसने के कारण 450 एमएम ब्यास की पाइप बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही है। इससे पेयजल योजना बाधित हो जाती है। समस्या के समाधान को 21.17 करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर वित्तीय अनुमोदन को एससीए (विशेष केंद्रीय सहायता) के तहत प्रेषित किया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ऊहल नदी (मंडी) से जल आपूर्ति योजना को 8263.95 लाख रुपये की धनराशि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत कर शहरी विकास मंत्रालय से नगर निगम मंडी को प्राप्त हुई थी। नगर निगम ने पूरी धनराशि विभाग को उपलब्ध नहीं करवाई है। 16 किस्तों में जल शक्ति विभाग को 80. 98 करोड़ जारी किया गया। 1.65 करोड़ की धनराशि अभी शेष है। नगर निगम ने इसे सड़कों, गलियों जैसे बुनियादी ढांचों के विकास पर खर्च कर दिया। उप मुख्यमंत्री ने सभी विभागों से आग्रह भी किया कि जिन विभागों के पास पैसा आता है, वह आगे कार्य करने वाली एजेंसी को तरसाकर पैसा जारी न करे। एक या दो किस्तों में पूरा पैसा जारी करें।