फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal A new skin disease is spreading in the villages of Rampur Kinnaur and Kullu sand flies found

Himachal : रामपुर, किन्नौर और कुल्लू के गांवों में पनप रहा त्वचा का नया रोग, 11 गांवों में मिलीं बालू मक्खियां

Mon, 07 Jul 2025 02:47 PM IST
अंकेश डोगरा हर्षित शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
हर्षित शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Mon, 07 Jul 2025 02:47 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में त्वचा की नई तरह की बीमारी फैल रही है। पहले यह रोग राजस्थान, गुजरात और पंजाब जैसे गर्म इलाकों में होता था, लेकिन अब यह पहाड़ों में भी फैल रहा है। पढ़ें पूरी खबर...

विज्ञापन
Himachal A new skin disease is spreading in the villages of Rampur Kinnaur and Kullu sand flies found
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : AI

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के रामपुर, किन्नौर और कुल्लू के गांवों में त्वचा की नई तरह की बीमारी फैल रही है। इस बीमारी का नाम है कटेनेयस लीशमैनियासिस (सीएल)। यह बीमारी सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलती है। पहले यह रोग राजस्थान, गुजरात और पंजाब जैसे गर्म इलाकों में होता था, लेकिन अब यह पहाड़ों में भी फैल रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका कारण जलवायु में हो रहा बदलाव है। यह खुलासा हाल ही में किए गए शोध में हुआ है।

विज्ञापन

यह शोध इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला और रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) डिब्रूगढ़ ने मिलकर रामपुर, नित्थर और निरमंड ब्लॉक के 20 गांवों में किया। हर गांव में 15–20 घरों की जांच की गई। इसमें 11 गांवों में सैंडफ्लाई मिली, जो यह बीमारी फैलाती है। कुल 332 सैंडफ्लाई पकड़ी गईं, जिनमें बीमारियां फैलाने वाली प्रजातियां थीं। ये मक्खियां घरों के पास बने मवेशियों के बाड़ों में मिलीं, जो ईंट और मिट्टी से बने थे। शोध में यह भी देखा गया कि जून से अगस्त के बीच तापमान 20 डिग्री से ऊपर चला जाता है और नमी 60 फीसदी से बढ़कर 90 फीसदी तक हो जाती है। इस समय पर सबसे ज्यादा इस बीमारी के मरीज सामने आए। यानी यह बीमारी गर्मी और नमी के मौसम में फैलती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

दो साल में 50 से ज्यादा मरीजों का इलाज
शोधकर्ता और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज वर्मा ने बताया कि हमने दो साल में 50 से ज्यादा मरीजों का इलाज किया। यह बीमारी अब ऊंचाई वाले ठंडे इलाकों में भी दिख रही है, जो पहले कभी नहीं हुआ। इसके पीछे बड़ा कारण बदलता मौसम है। पर्यावरण विज्ञानी डॉ. रीमा ठाकुर का कहना है कि अब पहाड़ों का तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है। औसतन 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी देखी गई है। इसके कारण सैंडफ्लाई जैसी मक्खियां अब ऊंचाई पर भी पनपने लगी हैं और बीमारियां फैला रही हैं। 
विज्ञापन

क्या होता है सीएल
कटेनेयस लीशमैनियासिस एक त्वचा की बीमारी है, जो सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) नाम की बहुत ही छोटी मक्खी के काटने से होती है। यह मक्खी एक परजीवी को अपने शरीर में लेकर चलती है, जिसे लीशमैनिया कहा जाता है। जब यह मक्खी किसी इंसान को काटती है, तो यह परजीवी उसकी त्वचा में चला जाता है और वहीं पर बीमारी शुरू हो जाती है। शुरुआत में उस जगह पर एक छोटी सी फुंसी या दाना निकलता है, जो धीरे-धीरे बड़ा होकर घाव में बदल जाता है। यह घाव आमतौर पर दर्द नहीं करता, लेकिन काफी समय तक ठीक नहीं होता और मरीज को खुजली होती है। खुले घाव के कारण संक्रमण का खतरा रहता है। यह बीमारी एक इंसान से दूसरे को सीधे नहीं फैलती, लेकिन अगर एक ही इलाके में बहुत सी सैंडफ्लाई हों और वे कई लोगों को काटें, तो कई लोगों को यह बीमारी हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed