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Himachal: एनआईटी में ड्रोन की निर्णय क्षमता बढ़ाने पर होगा शोध, एएनआरएफ से मिला 50 लाख की लागत का प्रोजेक्ट
Wed, 02 Apr 2025 06:02 PM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 02 Apr 2025 06:02 PM IST
सार
एनआईटी हमीरपुर के सहायक प्राध्यापक को एएनआरएफ की प्राइम मिनिस्टर अर्ली कैरियर रिसर्च ग्रांट के तहत लगभग 50 लाख की लागत का प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ है। जिसके तहत अब एनआईटी हमीरपुर में ड्रोन को एआई के जेन बेस्ड मॉडल (जेनेरेटिव एडवरसीरियल नेटवर्क) से निर्णय लेने में अधिक दक्ष बनाया जाएगा।
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डिजाइन फोटो।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
एनआईटी हमीरपुर में अब ड्रोन को एआई के जेन बेस्ड मॉडल (जेनेरेटिव एडवरसीरियल नेटवर्क) से निर्णय लेने में अधिक दक्ष बनाया जाएगा। एनआईटी हमीरपुर के सहायक प्राध्यापक को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) की प्राइम मिनिस्टर अर्ली कैरियर रिसर्च ग्रांट के तहत लगभग 50 लाख की लागत का प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ है। यह पहली दफा होगा कि ड्रोन को अधिक निर्णय कुशल बनाने लिए एआई के जेन बेस्ड मॉडल का प्रयोग होगा। इससे खासतौर पर निर्माण के क्षेत्र में थ्रीडी मैपिंग में क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना है। एनआईटी हमीरपुर के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ रोबिन सिंह भदौरिया इस पर शोध को करेंगे।
शोध में ड्रोन को महज कैमरे तक सीमित न रखकर इसमें जोड़े गए अन्य फीचर को एआई की मदद से यह खुद से बेहद सटीक निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में ड्रोन का प्रयोग हर क्षेत्र में हो रहा है। निर्माण से लेकर कृषि, आपदा में रेस्क्यू, हेल्थ केयर, परिवहन क्षेत्र में इसका प्रयोग हो रहा है, लेकिन अब इसे निर्णय लेने में और अधिक सक्षम बनाने पर शोध चल रहा है। ड्रोन के प्रयोग से रो़ड की मैपिंग का कार्य बेहद सटीकता से संभव हो सकेगा। इसके लिए ड्रोन में हाइडैफीनेशन कैमरा, थर्मल इमेजिंग और नाइट विजन कैमरा का प्रयोग किया जाएगा। इसके अलावा लाइट डिटेक्शन एंड रेजिंग सेंसर के प्रयोग से जमीन की मैपिंग भी एआई के जरिये होगी जिससे निर्माण क्षेत्र में थ्रीडी मॉडल सटीकता से तैयार हो सके।
वर्तमान समय में निर्माण क्षेत्र में थ्रीडी मॉडल तैयार करने के लिए ड्रोन तकनीक का प्रयोग हो रहा है। ऐसे में अब जेन बेस्ड मॉडल (जेनेरेटिव एडवरसीरियल नेटवर्क ) के तहत इसे और अधिक मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि ड्रोन खुद से परिस्थितियों को भांप कर निर्णय ले सके। एआई के एडवांस्ड मॉडल में से एक जेन बेस्ड मॉडल से ड्रोन को विकसित करने में पहली दफा प्रयोग होगा।
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शोध में ड्रोन को महज कैमरे तक सीमित न रखकर इसमें जोड़े गए अन्य फीचर को एआई की मदद से यह खुद से बेहद सटीक निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में ड्रोन का प्रयोग हर क्षेत्र में हो रहा है। निर्माण से लेकर कृषि, आपदा में रेस्क्यू, हेल्थ केयर, परिवहन क्षेत्र में इसका प्रयोग हो रहा है, लेकिन अब इसे निर्णय लेने में और अधिक सक्षम बनाने पर शोध चल रहा है। ड्रोन के प्रयोग से रो़ड की मैपिंग का कार्य बेहद सटीकता से संभव हो सकेगा। इसके लिए ड्रोन में हाइडैफीनेशन कैमरा, थर्मल इमेजिंग और नाइट विजन कैमरा का प्रयोग किया जाएगा। इसके अलावा लाइट डिटेक्शन एंड रेजिंग सेंसर के प्रयोग से जमीन की मैपिंग भी एआई के जरिये होगी जिससे निर्माण क्षेत्र में थ्रीडी मॉडल सटीकता से तैयार हो सके।
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वर्तमान समय में निर्माण क्षेत्र में थ्रीडी मॉडल तैयार करने के लिए ड्रोन तकनीक का प्रयोग हो रहा है। ऐसे में अब जेन बेस्ड मॉडल (जेनेरेटिव एडवरसीरियल नेटवर्क ) के तहत इसे और अधिक मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि ड्रोन खुद से परिस्थितियों को भांप कर निर्णय ले सके। एआई के एडवांस्ड मॉडल में से एक जेन बेस्ड मॉडल से ड्रोन को विकसित करने में पहली दफा प्रयोग होगा।
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आगामी सत्र से शोध होगा शुरू
कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ रोबिन सिंह भदौरिया ने कहा कि प्रोजेक्ट मंजूर हो गया है। आगामी सत्र से इस शोध पर कार्य शुरू होगा। जेन बेस्ड मॉडल से पहली दफा ड्रोन की निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ाने पर शोध होगा। वहीं, एनआईटी हमीरपुर के निदेशक डॉ एचएम सुर्यवंशी, रजिस्ट्रार डॉ अर्चना नानोटी एवं एचओडी कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग सिद्धार्थ चौहान ने इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।
कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ रोबिन सिंह भदौरिया ने कहा कि प्रोजेक्ट मंजूर हो गया है। आगामी सत्र से इस शोध पर कार्य शुरू होगा। जेन बेस्ड मॉडल से पहली दफा ड्रोन की निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ाने पर शोध होगा। वहीं, एनआईटी हमीरपुर के निदेशक डॉ एचएम सुर्यवंशी, रजिस्ट्रार डॉ अर्चना नानोटी एवं एचओडी कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग सिद्धार्थ चौहान ने इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।