{"_id":"5edfb8608ebc3e42f31addec","slug":"memorandum-hamirpur-hp-news-sml3351894161","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार पर कामरेड हुए लाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार पर कामरेड हुए लाल
विज्ञापन
एडीएम हमीरपुर के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजते कम्युनिस्ट पार्टी के पदाधिकारी।
- फोटो : Hamirpur-HP
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हमीरपुर। स्वास्थ्य विभाग में उपकरणों और दवाइयों की खरीद में हुए भ्रष्टाचार की जांच न होने पर कामरेड भड़क गए हैं। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय को ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन में मामले की जल्द जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह भ्रष्टाचार ऐसे समय में हुआ जब प्रदेश में कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में समय पर कदम उठाने चाहिए। सरकार स्वास्थ्य उपकरणों की खरीद में भ्रष्टाचार को रोकने में सरकार विफल रही है। पीपीआई किट और सैनिटाइजर खरीद में भ्रष्टाचार की जांच हो। उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि प्रदेश सरकार को निर्देश दें कि कोविड-19 के दौरान डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत की सभी प्रकार की खरीद पर श्वेत पत्र जारी करके उसे सार्वजनिक डोमेन में लाएं।
उन्होंने कहा कि अब तक प्रदेश की सतर्कता जांच धूल झोंकने वाली रही है। सतर्कता जांच प्रासंगिक दस्तावेजों को हासिल करने और आरोपियों को गिरफ्तार करने में विफल हुई है। आरोपी एके गुप्ता को आईजीएमसी में भर्ती करने की अनुमति क्यों दी गई। दरअसल जांच एजेंसी द्वारा इजाजत देना साजिश के तहत था ताकि जांच के प्रारंभिक चरण में स्वास्थ्य माफिया को साक्ष्य नष्ट करने के लिए समय मिल सके। इस मौके पर राज्य सचिवालय सदस्य डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर, प्रदेश सदस्य अनिल मनकोटिया, जिला सचिव जोगिंद्र कुमार, प्रताप राणा और विनोद समेत अन्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
ज्ञापन में मामले की जल्द जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह भ्रष्टाचार ऐसे समय में हुआ जब प्रदेश में कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में समय पर कदम उठाने चाहिए। सरकार स्वास्थ्य उपकरणों की खरीद में भ्रष्टाचार को रोकने में सरकार विफल रही है। पीपीआई किट और सैनिटाइजर खरीद में भ्रष्टाचार की जांच हो। उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि प्रदेश सरकार को निर्देश दें कि कोविड-19 के दौरान डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत की सभी प्रकार की खरीद पर श्वेत पत्र जारी करके उसे सार्वजनिक डोमेन में लाएं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि अब तक प्रदेश की सतर्कता जांच धूल झोंकने वाली रही है। सतर्कता जांच प्रासंगिक दस्तावेजों को हासिल करने और आरोपियों को गिरफ्तार करने में विफल हुई है। आरोपी एके गुप्ता को आईजीएमसी में भर्ती करने की अनुमति क्यों दी गई। दरअसल जांच एजेंसी द्वारा इजाजत देना साजिश के तहत था ताकि जांच के प्रारंभिक चरण में स्वास्थ्य माफिया को साक्ष्य नष्ट करने के लिए समय मिल सके। इस मौके पर राज्य सचिवालय सदस्य डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर, प्रदेश सदस्य अनिल मनकोटिया, जिला सचिव जोगिंद्र कुमार, प्रताप राणा और विनोद समेत अन्य मौजूद रहे।
विज्ञापन