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मेडिकल कॉलेज के कोरोना योद्धाओं का फूलों से हुआ स्वागत
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हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में शनिवार को कोविड-19 केयर सेंटर में ड्यूटी देने के बाद कर्मचारियों के अस्पताल में रूटीन ड्यूटी पर पहुंचने पर स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान उनका फूलों से स्वागत किया गया। तीन बैचों के 63 कोरोना योद्धा 21 दिन के बाद मेडिकल कॉलेज में अपनी ड्यूटी पर पहुंचे। इस दौरान इन्होंने 32 मरीजों का सफल इलाज किया। कॉलेज परिसर में आयोजित स्वागत समारोह में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अनिल चौहान, एमएस डॉक्टर अनिल वर्मा और अस्पताल के एसएमओ डॉ. रमेश चौहान सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। जिला भर में कुछ दिनों से काफी मरीज पॉजिटिव आए हैं। इस कारण उन्हें इन कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया जा रहा है। उनके उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर, पैरामेडिकल और अन्य कर्मचारियों को भेजा जा रहा है।
इसी कड़ी में ये स्वास्थ्य कर्मचारी कोविड-19 सेंटर भोटा और एनआईटी में भर्ती पॉजिटिव मरीजों के उपचार के लिए भेजे गए थे। 2 सप्ताह के बाद उन्हें क्वारंटीन किया गया और फिर इनके टेस्ट सैंपल लिए गए। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद अब ये कर्मचारी मेडिकल कॉलेज में अपनी सेवाएं देंगे। इस मौके कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अनिल चौहान ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, यहां हर दिन काम किया जाता रहा पीजीआई, एम्स में जब ओपीडी बंद रही तो इस मेडिकल कॉलेज में ओपीडी सुविधा को जारी रखी गई, ताकि मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो। 100 कर्मचारियों को पहले प्रशस्ति पत्र दिए जा चुके हैं। मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ अनिल वर्मा ने कहा कि इस वैश्विक बीमारी का अभी कोई इलाज नहीं है। बचाव और सोशल डस्टिेंसिंग ही एकमात्र बचने का उपाय है। संक्रमण का खतरा हर किसी पर रहता है। आगे भी कर्मचारियों को कोविड-19 केंद्रों में ड्यूटी के लिए भेजा जाएगा।
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इसी कड़ी में ये स्वास्थ्य कर्मचारी कोविड-19 सेंटर भोटा और एनआईटी में भर्ती पॉजिटिव मरीजों के उपचार के लिए भेजे गए थे। 2 सप्ताह के बाद उन्हें क्वारंटीन किया गया और फिर इनके टेस्ट सैंपल लिए गए। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद अब ये कर्मचारी मेडिकल कॉलेज में अपनी सेवाएं देंगे। इस मौके कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अनिल चौहान ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, यहां हर दिन काम किया जाता रहा पीजीआई, एम्स में जब ओपीडी बंद रही तो इस मेडिकल कॉलेज में ओपीडी सुविधा को जारी रखी गई, ताकि मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो। 100 कर्मचारियों को पहले प्रशस्ति पत्र दिए जा चुके हैं। मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ अनिल वर्मा ने कहा कि इस वैश्विक बीमारी का अभी कोई इलाज नहीं है। बचाव और सोशल डस्टिेंसिंग ही एकमात्र बचने का उपाय है। संक्रमण का खतरा हर किसी पर रहता है। आगे भी कर्मचारियों को कोविड-19 केंद्रों में ड्यूटी के लिए भेजा जाएगा।
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