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एलोपैथी डिस्पेंसरी का ताला तोड़ा, कमरे में रख दिया वेटरनरी का सामान
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नादौन(हमीरपुर)। शहर के साथ सटी बेला पंचायत में कुछ समय पूर्व खुली डिस्पेंसरी का ताला तोड़कर वहां एक कमरे में वेटरनरी डिस्पेंसरी का सामान रखने को लेकर मामला गरमा गया है। आरोप है कि डिस्पेंसरी की चाबी देने से जब आशा वर्कर ने मना कर दिया तो कुछ लोगों ने ताला तोड़ कर वाहन में लाया गया वेटरनरी डिस्पेंसरी का समान डिस्पेंसरी के अंदर रख दिया और एक अन्य ताला वहां पर लगा दिया गया।
कुछ माह पूर्व बेला में एलोपैथी की डिस्पेंसरी वर्तमान सरकार की ओर से स्वीकृत की गई थी। उस समय ग्राम पंचायत परिसर में ही डिस्पेंसरी के लिए दो कमरे पंचायत की सहमति की ओर से उपलब्ध करवा दिए गए थे। जहां डिस्पेंसरी में जरूरी दस्तावेज और दवाइयां आदि रखी गई हैं।
वहीं दूसरी और गांव में ही वेटरनरी डिस्पेंसरी 10 वर्ष से कार्य कर रही है, लेकिन यह गांव के ही एक व्यक्ति के घर पर चलाई जा रही थी। पिछले दिनों ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर निर्णय लिया गया कि डिस्पेंसरी के दो कमरों में से एक कमरा वेटरनरी डिस्पेंसरी को दिया जाए। इसके बाद इसे 1 दिन पूर्व ही इसे निजी घर से खाली कर इसका सामान पंचायत परिसर में पहुंचाया गया। परंतु वहां डिस्पेंसरी के कमरे में ताला लगा था। इसके बाद वार्ड पंच ने आशा वर्कर से जब चाबी मांगी तो उसने कहा कि वह डिस्पेंसरी प्रभारी के पास है। आरोप है कि चाबी न मिलने पर सामान लेकर आए लोगों ने एक पंचायत प्रतिनिधि की सहमति से डिस्पेंसरी का ताला तोड़कर एक कमरे में सामान रखने के बाद दूसरा ताला लगा दिया। इसमें एक पक्ष का आरोप है कि ताला तोड़ने से पहले विभाग की अनुमति नहीं ली गई। वेटरनरी डिस्पेंसरी के फार्मासिस्ट कमलेश कुमार ने बताया कि लाया गया सामान रखने की पूरी कार्रवाई पंचायत प्रधान के समक्ष की गई। एलोपैथी डिस्पेंसरी प्रभारी सुशीला कुमारी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट बीएमओ को भेजी जा रही है। पंचायत प्रधान अंजना कुमारी ने बताया कि इस संबंध में ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद ही डिस्पेंसरी कर्मियों को एक कमरा वेटरनरी को देने के लिए सूचित कर दिया था। घटना के दिन भी उन्हें कमरा खुला रखने को कहा था, परंतु इसके बावजूद चाबी ना मिलने पर पंचायत के समक्ष समान रखा गया क्योंकि समान वाहन में भरकर मौका पर लाया गया था, उसे वापस नहीं भेजा जा सकता था। उन्होंने कहा कि जनहित में यह कार्रवाई की गई है।
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कुछ माह पूर्व बेला में एलोपैथी की डिस्पेंसरी वर्तमान सरकार की ओर से स्वीकृत की गई थी। उस समय ग्राम पंचायत परिसर में ही डिस्पेंसरी के लिए दो कमरे पंचायत की सहमति की ओर से उपलब्ध करवा दिए गए थे। जहां डिस्पेंसरी में जरूरी दस्तावेज और दवाइयां आदि रखी गई हैं।
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वहीं दूसरी और गांव में ही वेटरनरी डिस्पेंसरी 10 वर्ष से कार्य कर रही है, लेकिन यह गांव के ही एक व्यक्ति के घर पर चलाई जा रही थी। पिछले दिनों ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर निर्णय लिया गया कि डिस्पेंसरी के दो कमरों में से एक कमरा वेटरनरी डिस्पेंसरी को दिया जाए। इसके बाद इसे 1 दिन पूर्व ही इसे निजी घर से खाली कर इसका सामान पंचायत परिसर में पहुंचाया गया। परंतु वहां डिस्पेंसरी के कमरे में ताला लगा था। इसके बाद वार्ड पंच ने आशा वर्कर से जब चाबी मांगी तो उसने कहा कि वह डिस्पेंसरी प्रभारी के पास है। आरोप है कि चाबी न मिलने पर सामान लेकर आए लोगों ने एक पंचायत प्रतिनिधि की सहमति से डिस्पेंसरी का ताला तोड़कर एक कमरे में सामान रखने के बाद दूसरा ताला लगा दिया। इसमें एक पक्ष का आरोप है कि ताला तोड़ने से पहले विभाग की अनुमति नहीं ली गई। वेटरनरी डिस्पेंसरी के फार्मासिस्ट कमलेश कुमार ने बताया कि लाया गया सामान रखने की पूरी कार्रवाई पंचायत प्रधान के समक्ष की गई। एलोपैथी डिस्पेंसरी प्रभारी सुशीला कुमारी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट बीएमओ को भेजी जा रही है। पंचायत प्रधान अंजना कुमारी ने बताया कि इस संबंध में ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद ही डिस्पेंसरी कर्मियों को एक कमरा वेटरनरी को देने के लिए सूचित कर दिया था। घटना के दिन भी उन्हें कमरा खुला रखने को कहा था, परंतु इसके बावजूद चाबी ना मिलने पर पंचायत के समक्ष समान रखा गया क्योंकि समान वाहन में भरकर मौका पर लाया गया था, उसे वापस नहीं भेजा जा सकता था। उन्होंने कहा कि जनहित में यह कार्रवाई की गई है।
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