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हिमाचल: कांगड़ा में कम बारिश और रिसाव से सूखने लगी करेरी झील, एक फीट तक सिमटा जलस्तर; पर्यटक भी निराश

Mon, 19 Oct 2026 11:18 AM IST
Ankesh Dogra सचिन चौधरी, धर्मशाला।
सचिन चौधरी, धर्मशाला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 19 Oct 2026 11:18 AM IST
सार

धौलाधार की पहाड़ियों में स्थित करेरी झील में पानी का स्तर घटने से चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों और सैलानियों के अनुसार, झील में जलस्तर करीब एक फीट रह गया है। कम बारिश और रिसाव को इसकी संभावित वजह बताया जा रहा है। वन विभाग ने झील को प्राकृतिक स्वरूप में बनाए रखने की बात कही है।

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kareri lake water level decline low rainfall leakage
करेरी झील। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

धौलाधार की पहाड़ियों में स्थित प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर करेरी झील का जलस्तर घटने से चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों और यहां पहुंच रहे सैलानियों के अनुसार, झील में पानी का स्तर करीब एक फीट तक रह गया है। कम बारिश और लगातार हो रहे रिसाव को इसके पीछे संभावित कारण माना जा रहा है। यदि स्थिति पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो झील के प्राकृतिक पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। करेरी झील क्षेत्र की प्रमुख प्राकृतिक धरोहरों में शामिल है। यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक और ट्रैकिंग के शौकीन पहुंचते हैं। झील के आसपास का प्राकृतिक वातावरण और धौलाधार की खूबसूरत वादियां सैलानियों को आकर्षित करती हैं। ऐसे में पानी की कमी ने पर्यावरण प्रेमियों और पर्यटकों की चिंता बढ़ा दी है।

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स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले की तुलना में झील में पानी काफी कम दिखाई दे रहा है। कम बारिश के कारण झील में पानी की प्राकृतिक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, रिसाव के कारण भी पानी कम होने की बात कही जा रही है। हालांकि, जलस्तर घटने के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच और नियमित निगरानी जरूरी है। करेरी झील के संरक्षण के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। इसके लिए जलस्तर की नियमित निगरानी, रिसाव के संभावित कारणों की जांच और झील के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर ध्यान देना होगा। यह झील केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्राकृतिक विरासत भी है।

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दो रास्तों से पहुंच सकते हैं करेरी झील
करेरी झील, करेरी गांव से करीब 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए धर्मशाला-चड़ी-घरोह होते हुए घेरा मार्ग का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा शाहपुर-सल्ली की ओर से भी करेरी जाने का रास्ता है। इस मार्ग से झील तक की दूरी करीब 10 किलोमीटर बताई गई है। सप्ताहांत पर यहां काफी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं।

छह साल में बदल गई झील की तस्वीर
सैलानी करण तिवारी के अनुसार, वह छह साल पहले करेरी झील आए थे, तब यहां पानी का स्तर काफी ज्यादा था। इस बार जलस्तर करीब एक फीट देखकर उन्हें चिंता हुई। एक अन्य सैलानी पवित रीन ने भी झील में पानी कम होने की बात कही। उनके अनुसार, पानी का रिसाव नाले की ओर हो रहा है और इस पर ध्यान देने की जरूरत है। स्थानीय कारोबारी मनीष का कहना है कि हर साल करेरी झील की ट्रैकिंग के लिए बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं और इसकी पहचान लगातार बढ़ रही है। ऐसे में झील का संरक्षण जरूरी है।
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झील को प्राकृतिक स्वरूप में रखा जाएगा : वन मंडलाधिकारी
वन मंडलाधिकारी, वन मंडल धर्मशाला अमित शर्मा के अनुसार, कई बार भूकंप के कारण जमीन में दरारें बन सकती हैं, जिनसे झील में रिसाव होने की संभावना हो सकती है। उन्होंने कहा कि करेरी झील एक प्राकृतिक धरोहर है और इसे प्राकृतिक स्वरूप में ही रहने दिया जाएगा। इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
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