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HP High Court: तृतीय श्रेणी कर्मियों की पेंशन में गिनी जाएगी दैनिक भोगी सेवा, HC ने खारिज की सरकार की अपील

Sun, 04 Jan 2026 11:28 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 04 Jan 2026 11:28 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पेंशन रोकना एक निरंतर होने वाली गलती है, जिसे केवल तकनीकी आधार पर नहीं रोका जा सकता। मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया। पढ़ें पूरी खबर...
 

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Daily wage service will be counted towards pension of Class III employees HP High Court  rejects govt appeal
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तृतीय श्रेणी कर्मियों की पेंशन को लेकर स्पष्ट किया कि पेंशन के लिए क्वालीफाइंग सर्विस की गणना करते समय कर्मचारियों की ओर से नियमितीकरण से पहले की गई दैनिक वेतनभोगी सेवा को भी जोड़ा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि पेंशन रोकना एक निरंतर होने वाली गलती है, जिसे केवल तकनीकी आधार पर नहीं रोका जा सकता। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए एकल जज के फैसले को बरकरार रखा है।

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याचिकाकर्ता कर्मचारी हृदया राम ने वर्ष 1986 में लोक निर्माण विभाग में दैनिक वेतन भोगी के तौर पर काम शुरू किया था। विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने हर साल कम से कम 240 दिन काम किया। उनकी सेवाओं को 1 जनवरी 1996 को नियमित किया गया। वह 31 जनवरी 2006 को सेवानिवृत्त हो गए। विभाग ने उन्हें यह कहकर पेंशन देने से इन्कार कर दिया था कि उनकी नियमित सेवा केवल 9 वर्ष और 1 महीने की है, जबकि सीसीएस नियमों के मुताबिक पेंशन के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा अनिवार्य है। विभाग का तर्क था कि दैनिक भोगी के रूप में बिताए गए वर्षों को इस गणना में शामिल नहीं किया जा सकता। 

सुंदर सिंह और बालो देवी मामलों में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर लागू होते हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि रूप लाल बनाम हिमाचल राज्य मामले में यह पहले ही तय हो चुका है कि पेंशन के लाभ के लिए क्लास-थ्री और क्लास-चार के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता पेंशन का हकदार है
प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल जज के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया जिसमें कर्मचारी को पेंशन देने का निर्देश दिया गया था। अदालत के इस फैसले से प्रदेश सरकार को बड़ा झटका लगा है क्याेंकि इस फैसले से प्रदेश के उन हजारों क्लास-थ्री कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो कुछ ही समय के अंतर से पेंशन लाभ से वंचित रह जाते थे।

वरिष्ठता और वेटरनरी फार्मासिस्टों के प्रशिक्षण मामले में सरकार को झटका
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पशुपालन विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की वरिष्ठता और वेटरनरी फार्मासिस्ट प्रशिक्षण से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार को झटका दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने सरकार की ओर से दायर स्पष्टीकरण आवेदन को पूरी तरह से गलत करार देते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने पशुपालन विभाग के निदेशक को आदेश दिया है कि दो महीने के भीतर अदालती आदेशों का पालन करें और ट्रिब्यूनल के निर्देशों के अनुसार वरिष्ठता सूची को फिर से तैयार करें। 
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यह मामला कर्मचारी नरोत्तम सिंह और पशुपालन विभाग के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद से संबंधित है। राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने 8 दिसंबर 2017 को आदेश दिया था कि वेटरनरी फार्मासिस्ट प्रशिक्षण के लिए उम्मीदवारों को भेजते समय 2016 की अंतिम वरिष्ठता सूची का कड़ाई से पालन किया जाए। नरोत्तम सिंह ने शिकायत की थी कि विभाग ने उनके कनिष्ठों को प्रशिक्षण के लिए भेज दिया, जबकि उन्हें नजरअंदाज किया गया। नवंबर 2024 में हाईकोर्ट की पीठ ने पाया था कि विभाग ने फिर से गलती की और याचिकाकर्ता के जूनियरों को उनसे ऊपर वरिष्ठता दे दी। इसके बाद कोर्ट ने तत्कालीन वरिष्ठता सूची को रद्द कर दिया था और इसे नए सिरे से बनाने के निर्देश दिए थे। 

राज्य सरकार ने आवेदन दायर कर वरिष्ठता सूची को रद्द करने के फैसले पर आपत्ति जताई थी और स्पष्टीकरण मांगा था। अन्य कर्मचारियों ने भी मामले में पक्षकार बनने को आवेदन किया था, क्योंकि वरिष्ठता सूची बदलने से उनके हितों पर प्रभाव पड़ रहा था। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार ट्रिब्यूनल के 2017 के आदेश का उल्लंघन करती है, तो निष्पादन अदालत को उसे सुधारने का पूरा अधिकार है। सरकार ने यह आवेदन आदेश सुनाए जाने के सात महीने बाद दायर किया, जिसे अदालत ने कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना। अदालत ने अन्य 11 कर्मचारियों के आवेदनों को भी बहुत देर से दायर मानकर खारिज कर दिया।

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