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Chamba News: गेहूं की बिजाई अटकी, सूख रहीं सब्जियां, 90 फीसदी भूमि को राहत भरी फुहार का इंतजार
Mon, 04 Nov 2024 11:03 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 04 Nov 2024 11:03 PM IST
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चंबा में बारिश न होने से खेत में सूखी पड़ी हल्दी की फसल। स्त्रोंत- जागरूक पाठक
चंबा। बारिश के अभाव में चंबा जिला में सूखे जैसी नौबत बनती नजर आ रही है। लंबे समय से बारिश न होने से किसान जहां समयानुसार अपने खेतों में गेहूं और मटर की बिजाई नहीं कर पाए हैं। वहीं, खेतों मेंं लगाई गई सब्जियों जैसे पालक, मेथी और लहसुन की फसल खेतों में सिंचाई के अभाव में सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है। हैरत की बात यह है कि जिले के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में 90 प्रतिशत भूमि बारिश के पानी पर ही निर्भर है। महज, 10 प्रतिशत भूमि पर ही सिंचित हैं।
अक्तूबर से लेकर 15 नवंबर तक का समय गेहूं की बिजाई के लिए सही माना जाता है। इसके बाद यदि किसान गेहूं की बिजाई करते हैं तो उन्हें बीज की क्षमता बढ़ानी पड़ती है। दिसंबर में गेहूं की बिजाई करने से किसानों को हानि होने की अधिक संभावना रहती है। जिले में अधिकांश किसान दो फसलों मक्की और गेहूं को ही तवज्जो देते हैं। जिला चंबा की बात की जाए तो 35 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई की जाती है। लंबे समय से बारिश न होने से जलस्रोतों और पनिहारों समेत बावड़ियों में 25 से 30 प्रतिशत जलस्तर की कमी दर्ज की गई है।
बारिश के अभाव में सेब के पेड़ों की कटिंग-प्रूनिंग का कार्य नहीं हो पा रहा है। इतना ही नहीं, सूखे जैसी उत्पन्न हो रही स्थिति से गेहूं की बिजाई का कार्य भी अधर में लटका हुआ है।
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बलि राम, बागवान, खणी निवासी
जनजातीय क्षेत्र भरमौर में पहले ही शुष्क ठंड ने दुश्वारियां बढ़ा रखी हैं, ऊपर से बारिश न होने से अब किसान गेहूं की बिजाई समय पर नहीं कर पा रहे हैं। खेतों में रोपित की गई सब्जियां भी सूख चुकी हैं।
अर्जुन सिंह, गांव मांडों निवासी
बारिश न होने और खग्गल कूहल का निर्माण न होने से प्राकृतिक जलस्रोतों में पानी की कमी होने के साथ किसान चाह कर भी गेहूं की बिजाई का कार्य आरंभ नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, पूर्व मेंं भी बारिश न होने से उन्होंने धान की बिजाई का कार्य भी देरी से किया था।
कुलभूषण उपमन्यु, पर्यावरणविद और किसान
पहली मर्तबा उन्होंने अपने खेतों में हल्दी की फसल लगाई। कृषि विभाग से मिल कर पूरी एहतियात और विभागीय परामर्श से रोपित करने के बाद अब हल्दी के पत्ते समयानुसार बारिश न होने से सूख गए हैं, जिससे उन्हें काफी घाटा उठाना पड़ रहा है।
राज कुमार ठाकुर, किसान
चंबा जिला में 10 प्रतिशत भूमि सिंचित है जबकि 90 प्रतिशत भूमि पर बारिश से ही सिंचाई होती है। किसान अक्तूबर से लेकर 15 नवंबर तक गेहूं की बिजाई कर सकते हैं। इसके बाद किसानों को बिजाई के लिए अधिक बीज लगाना होगा। बारिश के अभाव में किसानों की चिंताएं तो अवश्य बढ़ी हैं।
कुलदीप धीमान, कृषि उपनिदेशक
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अक्तूबर से लेकर 15 नवंबर तक का समय गेहूं की बिजाई के लिए सही माना जाता है। इसके बाद यदि किसान गेहूं की बिजाई करते हैं तो उन्हें बीज की क्षमता बढ़ानी पड़ती है। दिसंबर में गेहूं की बिजाई करने से किसानों को हानि होने की अधिक संभावना रहती है। जिले में अधिकांश किसान दो फसलों मक्की और गेहूं को ही तवज्जो देते हैं। जिला चंबा की बात की जाए तो 35 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई की जाती है। लंबे समय से बारिश न होने से जलस्रोतों और पनिहारों समेत बावड़ियों में 25 से 30 प्रतिशत जलस्तर की कमी दर्ज की गई है।
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बारिश के अभाव में सेब के पेड़ों की कटिंग-प्रूनिंग का कार्य नहीं हो पा रहा है। इतना ही नहीं, सूखे जैसी उत्पन्न हो रही स्थिति से गेहूं की बिजाई का कार्य भी अधर में लटका हुआ है।
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बलि राम, बागवान, खणी निवासी
जनजातीय क्षेत्र भरमौर में पहले ही शुष्क ठंड ने दुश्वारियां बढ़ा रखी हैं, ऊपर से बारिश न होने से अब किसान गेहूं की बिजाई समय पर नहीं कर पा रहे हैं। खेतों में रोपित की गई सब्जियां भी सूख चुकी हैं।
अर्जुन सिंह, गांव मांडों निवासी
बारिश न होने और खग्गल कूहल का निर्माण न होने से प्राकृतिक जलस्रोतों में पानी की कमी होने के साथ किसान चाह कर भी गेहूं की बिजाई का कार्य आरंभ नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि, पूर्व मेंं भी बारिश न होने से उन्होंने धान की बिजाई का कार्य भी देरी से किया था।
कुलभूषण उपमन्यु, पर्यावरणविद और किसान
पहली मर्तबा उन्होंने अपने खेतों में हल्दी की फसल लगाई। कृषि विभाग से मिल कर पूरी एहतियात और विभागीय परामर्श से रोपित करने के बाद अब हल्दी के पत्ते समयानुसार बारिश न होने से सूख गए हैं, जिससे उन्हें काफी घाटा उठाना पड़ रहा है।
राज कुमार ठाकुर, किसान
चंबा जिला में 10 प्रतिशत भूमि सिंचित है जबकि 90 प्रतिशत भूमि पर बारिश से ही सिंचाई होती है। किसान अक्तूबर से लेकर 15 नवंबर तक गेहूं की बिजाई कर सकते हैं। इसके बाद किसानों को बिजाई के लिए अधिक बीज लगाना होगा। बारिश के अभाव में किसानों की चिंताएं तो अवश्य बढ़ी हैं।
कुलदीप धीमान, कृषि उपनिदेशक