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जान जोखिम में डाल पुल पार कर रहे ग्रामीण
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खस्ताहाल ज्यूरा पुल ।संवाद
- फोटो : Chamba
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भरमौर (चंबा)। भरमौर-गरीमा-सियूर-ज्यूरा सड़क पर ज्यूरा माता मंदिर के पास रावी नदी पर बने पुल को लोग अपनी जान जोखिम में डालकर पार करने को मजबूर हैं।
करीब एक माह पहले पहाड़ी से गिरे पत्थरों की जद में आने से लकड़ी का पुल क्षतिग्रस्त हो गया था जिसकी अभी तक विभाग ने सुध नहीं ली है।
हालांकि, पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद विभागीय अधिकारियों ने जल्द पुल की मरम्मत करवाने का वायदा किया था। पहाड़ी से गिरे पत्थरों के कारण पुल के बीचोबीच तख्ते और किनारे पर लगी रेलिंग टूट गई है। इसके चलते गरीमा और सियूर पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीणों का संपर्क होली उपमंडल के साथ पूरी तरह से कट चुका है। ग्रामीण अपनी जान दांव पर लगाकर पुल को पार करने में विवश हैं।
क्षतिग्रस्त पुल के कारण दो पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्रामीणों राम प्रसाद, तिलक कुमार, सुभाष शर्मा, सुरेश कुमार, पवन शर्मा, संजीव कुमार आदि का कहना है पुल क्षतिग्रस्त होने से बागवान अपना सेब मंडियों में समय पर नहीं पहुंचा पा रहे हैं। ग्रामीणों को अब 12 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय कर वाया भरमौर होकर अपने गंतव्यों की ओर जाना पड़ रहा है।
ज्यूरा पुल से होकर होली पहुंचना ग्रामीणों के लिए आसान रहता है। बावजूद इसके पुल की समय पर मरम्मत न होना चिंता का विषय बना हुआ है। - शिव कुमार, निवासी सियूर।
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सेब सीजन जोरों पर है। ऐसे में गरीमा और सियूर पंचायतों के ग्रामीणों को अपनी मेहनत की कमाई मंडियों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। -रामप्रसाद निवासी रते।
पुल की खस्ता हालत के कारण ग्रामीण जान पर खेलकर पुल पार करने के लिए मजबूर हैं। सर्दियों में उन्हें राशन का कोटा घरों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। - अनिल कुमार, निवासी सियूर।
लोगों की समस्या को देखते हुए विभाग को समय पर पुल की मरम्मत करवाकर छोटे वाहनों के लिए बहाल किया जाना चाहिए। -रविंद्र कुमार, निवासी सियूर।
ज्यूरा पुल को लेकर सात लाख का प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा गया है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद युद्धस्तर पर कार्य आरंभ करवाया जाएगा।
जय चंद, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग गरोला।
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करीब एक माह पहले पहाड़ी से गिरे पत्थरों की जद में आने से लकड़ी का पुल क्षतिग्रस्त हो गया था जिसकी अभी तक विभाग ने सुध नहीं ली है।
हालांकि, पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद विभागीय अधिकारियों ने जल्द पुल की मरम्मत करवाने का वायदा किया था। पहाड़ी से गिरे पत्थरों के कारण पुल के बीचोबीच तख्ते और किनारे पर लगी रेलिंग टूट गई है। इसके चलते गरीमा और सियूर पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीणों का संपर्क होली उपमंडल के साथ पूरी तरह से कट चुका है। ग्रामीण अपनी जान दांव पर लगाकर पुल को पार करने में विवश हैं।
क्षतिग्रस्त पुल के कारण दो पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्रामीणों राम प्रसाद, तिलक कुमार, सुभाष शर्मा, सुरेश कुमार, पवन शर्मा, संजीव कुमार आदि का कहना है पुल क्षतिग्रस्त होने से बागवान अपना सेब मंडियों में समय पर नहीं पहुंचा पा रहे हैं। ग्रामीणों को अब 12 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय कर वाया भरमौर होकर अपने गंतव्यों की ओर जाना पड़ रहा है।
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ज्यूरा पुल से होकर होली पहुंचना ग्रामीणों के लिए आसान रहता है। बावजूद इसके पुल की समय पर मरम्मत न होना चिंता का विषय बना हुआ है। - शिव कुमार, निवासी सियूर।
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सेब सीजन जोरों पर है। ऐसे में गरीमा और सियूर पंचायतों के ग्रामीणों को अपनी मेहनत की कमाई मंडियों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। -रामप्रसाद निवासी रते।
पुल की खस्ता हालत के कारण ग्रामीण जान पर खेलकर पुल पार करने के लिए मजबूर हैं। सर्दियों में उन्हें राशन का कोटा घरों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। - अनिल कुमार, निवासी सियूर।
लोगों की समस्या को देखते हुए विभाग को समय पर पुल की मरम्मत करवाकर छोटे वाहनों के लिए बहाल किया जाना चाहिए। -रविंद्र कुमार, निवासी सियूर।
ज्यूरा पुल को लेकर सात लाख का प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा गया है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद युद्धस्तर पर कार्य आरंभ करवाया जाएगा।
जय चंद, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग गरोला।