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Chamba News: मेडिकल कॉलेज में सात दिन नहीं होंगे मरीजों के डयलिसिस
Wed, 22 May 2024 10:48 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 22 May 2024 10:48 PM IST
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चंबा मेडिकल कालेज के डायलसिस सेंटर में काम करता मजदूर।संवाद
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में अगले सात दिन तक मरीजों के डायलिसिस नहीं होंगे। सरकार ने नई कंपनी को डायलिसिस सेंटर चलाने का टेंडर दिया है।
पुरानी कंपनी अपनी मशीनों को निकाल रही है। नई कंपनी अपनी मशीनों को स्थापित करने का कार्य शुरू करेगी। इस वजह से चंबा मेडिकल कॉलेज में अगले सात दिन तक किसी भी मरीज का डायलिसिस नहीं होगा। मौजूदा समय में करीब पचास ऐसे मरीज हैं, जो अपना डायलिसिस करवाने के लिए मेडिकल कॉलेज के सेंटर पर निर्भर हैं। इन मरीजों के लिए जिले में कहीं भी डायलिसिस करवाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके चलते मरीजों को अब डायलिसिस करवाने के लिए जिले के बाहर की दौड़ लगानी पड़ेगी। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने गरीब मरीजों के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने का प्रावधान किया है। साथ ही चंबा के मरीजों का नूरपुर अस्पताल में डायलिसिस करवाने को लेकर सिफारिश की है, जिससे जिला के मरीज नूरपुर में जाकर अपना डायलिसिस करवा सकें।
किडनी के रोगियों को सबसे ज्यादा डायलिसिस करवाने की जरूरत पड़ती है। जिला चंबा में करीब 50 ऐसे मरीज हैं, जो डायलिसिस करवाने के लिए यहां निर्भर हैं। बुधवार को चंबा मेडिकल कॉलेज से एक मरीज को डायलिसिस करवाने के लिए रेफर कर दिया गया। ऐसे में परिजन मरीज को टांडा या अन्य बाहरी अस्पताल में पहुंचाने को लेकर चिंतित हैं। जिले के बाहर निजी सेंटरों में मरीज का डायलिसिस करने के लिए 6000 से 10000 रुपये फीस ली जाती है, जबकि मेडिकल कॉलेज चंबा में चल रहे सेंटर में मरीज का डायलिसिस 1500 रुपये में किया जा रहा था।
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चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बिपन ठाकुर ने बताया कि नई कंपनी सेंटर में अपनी मशीनें स्थापित कर रही है। सात दिन में डायलिसिस सेंटर पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा। नूरपुर में चंबा के मरीजों के डायलिसिस की अस्थायी व्यवस्था करवाई जा रही है। मरीजों को वहां जाने के लिए किराया भी प्रबंधन उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रहा है।
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पुरानी कंपनी अपनी मशीनों को निकाल रही है। नई कंपनी अपनी मशीनों को स्थापित करने का कार्य शुरू करेगी। इस वजह से चंबा मेडिकल कॉलेज में अगले सात दिन तक किसी भी मरीज का डायलिसिस नहीं होगा। मौजूदा समय में करीब पचास ऐसे मरीज हैं, जो अपना डायलिसिस करवाने के लिए मेडिकल कॉलेज के सेंटर पर निर्भर हैं। इन मरीजों के लिए जिले में कहीं भी डायलिसिस करवाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके चलते मरीजों को अब डायलिसिस करवाने के लिए जिले के बाहर की दौड़ लगानी पड़ेगी। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने गरीब मरीजों के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने का प्रावधान किया है। साथ ही चंबा के मरीजों का नूरपुर अस्पताल में डायलिसिस करवाने को लेकर सिफारिश की है, जिससे जिला के मरीज नूरपुर में जाकर अपना डायलिसिस करवा सकें।
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किडनी के रोगियों को सबसे ज्यादा डायलिसिस करवाने की जरूरत पड़ती है। जिला चंबा में करीब 50 ऐसे मरीज हैं, जो डायलिसिस करवाने के लिए यहां निर्भर हैं। बुधवार को चंबा मेडिकल कॉलेज से एक मरीज को डायलिसिस करवाने के लिए रेफर कर दिया गया। ऐसे में परिजन मरीज को टांडा या अन्य बाहरी अस्पताल में पहुंचाने को लेकर चिंतित हैं। जिले के बाहर निजी सेंटरों में मरीज का डायलिसिस करने के लिए 6000 से 10000 रुपये फीस ली जाती है, जबकि मेडिकल कॉलेज चंबा में चल रहे सेंटर में मरीज का डायलिसिस 1500 रुपये में किया जा रहा था।
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चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बिपन ठाकुर ने बताया कि नई कंपनी सेंटर में अपनी मशीनें स्थापित कर रही है। सात दिन में डायलिसिस सेंटर पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा। नूरपुर में चंबा के मरीजों के डायलिसिस की अस्थायी व्यवस्था करवाई जा रही है। मरीजों को वहां जाने के लिए किराया भी प्रबंधन उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रहा है।