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बागवानों की ढुलाई पर ही खर्च हो जाती है सारी कमाई
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होली (चंबा)। होली उपमंडल के बागवानों के लिए सड़कों का अभाव परेशानी का सबब बन गया है। हालात यह हैं कि बागवानों को अपनी कमाई का अधिकतर हिस्सा उत्पादों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने में ही खर्च करना पड़ रहा है।
बागवानों को तुड़ान के बाद सेब की पेटियां मुख्य सड़क तक पहुंचाने की एवज में प्रति पेटी 100 से लेकर 200 रुपये खच्चर मालिक को देने पड़ते हैं। ऐसे में बागवानों की दिक्कतें आज तक खत्म नहीं हुईं। कई बार नेता क्षेत्र की पंचायतों और गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने संबंधी बड़े-बड़े दावे करते हैं लेकिन ये दावे महज दावे ही बन कर रह रहे हैं। बागवानों को आज भी वर्षों पहले की तरह ही पीठ पर या खच्चरों के माध्यम से सेब की पेटियां सड़क तक पहुंचानी पड़ रही हैं।
गौरतलब है कि होली उपमंडल के क्वारंसी पंचायत के गांव क्वारसी और भरबाली सड़क से महरूम हैं। कुठेड़ पंचायत का गांव कलाह, बजोल, गरौंदा और न्याग्रां पंचायत का सूरेह गांव में भी सड़क नहीं पहुंच पाई है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को रोजाना नौ से लेकर बीस किमी तक का सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में जून-जुलाई के अंत में सेब तुड़ान सीजन शुरू होने पर बागवानों की मुश्किलें
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बढ़ने वाली हैं। बागवानों को अब अपने बगीचों से सेब तुड़ान के बाद उसे सड़क तक पहुंचाने की चिंता सतानी शुरू हो गई है। हर वर्ष बागवानों को बागीचों से सेब सड़क तक पहुंचाने के लिए 100 से 200 रुपये प्रति पेटी के हिसाब से खच्चर मालिकों को अदा करने पड़ते हैं। इसके अलावा कई बार बागवानों को खच्चरें न मिल पाने पर पीठ पर लाद कर ही सेब की पेटियां सड़क तक पहुंचानी पड़ती हैं।
बागवानों अमित कुमार, सुरेंद्र कुमार, राजीव कुुमार, जगदीश चंद, दिलीप सिंह और विनोद कुमार ने कहा कि सड़क के अभाव में उनका सेब बागीचों में ही सड़ जाता है। खच्चरों के माध्यम से मंडियों में सेब पहुंचाने की एवज में कई बार वे सेब के दाम भी पूरे नहीं कर पाते हैं। इसके चलते बागवानों की चिंता बढ़ जाती है। कहा कि कई क्षेत्र के राजनेताओं से गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग उठाई गई है। बावजूद इसके अभी तक गांवों को सड़क तक नसीब नहीं हो पाई है।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता संजीव महाजन ने कहा कि बजोल पंचायत में पुल का निर्माण कार्य पूरा होने वाला है। अगले माह पंचायत को सड़क से जोड़ दिया जाएगा। क्वारसी के लिए सड़क का रि-टेंडरिंग हो रहा है। कहा कि धीरे-धीरे शेष पंचायतों को भी सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए विभाग प्रयासरत है।
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बागवानों को तुड़ान के बाद सेब की पेटियां मुख्य सड़क तक पहुंचाने की एवज में प्रति पेटी 100 से लेकर 200 रुपये खच्चर मालिक को देने पड़ते हैं। ऐसे में बागवानों की दिक्कतें आज तक खत्म नहीं हुईं। कई बार नेता क्षेत्र की पंचायतों और गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने संबंधी बड़े-बड़े दावे करते हैं लेकिन ये दावे महज दावे ही बन कर रह रहे हैं। बागवानों को आज भी वर्षों पहले की तरह ही पीठ पर या खच्चरों के माध्यम से सेब की पेटियां सड़क तक पहुंचानी पड़ रही हैं।
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गौरतलब है कि होली उपमंडल के क्वारंसी पंचायत के गांव क्वारसी और भरबाली सड़क से महरूम हैं। कुठेड़ पंचायत का गांव कलाह, बजोल, गरौंदा और न्याग्रां पंचायत का सूरेह गांव में भी सड़क नहीं पहुंच पाई है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को रोजाना नौ से लेकर बीस किमी तक का सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में जून-जुलाई के अंत में सेब तुड़ान सीजन शुरू होने पर बागवानों की मुश्किलें
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बढ़ने वाली हैं। बागवानों को अब अपने बगीचों से सेब तुड़ान के बाद उसे सड़क तक पहुंचाने की चिंता सतानी शुरू हो गई है। हर वर्ष बागवानों को बागीचों से सेब सड़क तक पहुंचाने के लिए 100 से 200 रुपये प्रति पेटी के हिसाब से खच्चर मालिकों को अदा करने पड़ते हैं। इसके अलावा कई बार बागवानों को खच्चरें न मिल पाने पर पीठ पर लाद कर ही सेब की पेटियां सड़क तक पहुंचानी पड़ती हैं।
बागवानों अमित कुमार, सुरेंद्र कुमार, राजीव कुुमार, जगदीश चंद, दिलीप सिंह और विनोद कुमार ने कहा कि सड़क के अभाव में उनका सेब बागीचों में ही सड़ जाता है। खच्चरों के माध्यम से मंडियों में सेब पहुंचाने की एवज में कई बार वे सेब के दाम भी पूरे नहीं कर पाते हैं। इसके चलते बागवानों की चिंता बढ़ जाती है। कहा कि कई क्षेत्र के राजनेताओं से गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग उठाई गई है। बावजूद इसके अभी तक गांवों को सड़क तक नसीब नहीं हो पाई है।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता संजीव महाजन ने कहा कि बजोल पंचायत में पुल का निर्माण कार्य पूरा होने वाला है। अगले माह पंचायत को सड़क से जोड़ दिया जाएगा। क्वारसी के लिए सड़क का रि-टेंडरिंग हो रहा है। कहा कि धीरे-धीरे शेष पंचायतों को भी सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए विभाग प्रयासरत है।