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विकास खंड सलूणी में लंपी रोग की दवाई लेने को भटक रहे पशु पालक
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सलूणी (चंबा)। लंपी रोग से अपने मवेशियों को बचाने के लिए विकास खंड सलूणी के 10,000 पशुपालकों को दवाइयां नहीं मिल रही हैं। पशु चिकित्सालय में जाने पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। पशु चिकित्सक उन्हें दवाई की पर्ची तो दे रहे हैं, लेकिन दवाई उन्हें निजी दुकान में जाकर पैसे देकर खरीदनी पड़ रही है। इससे पशुपालक काफी परेशान हैं।
विकास खंड सलूणी की 43 पंचायतों में रहने वाले अधिकतर परिवारों के पास अपने मवेशी हैं। मौजूदा समय में मवेशियों में लंपी रोग फैला हुआ है। इस बीमारी से सलूणी के मवेशी भी अछूते नहीं हैं।
विकास खंड में अब तक लंपी रोग के 1840 मामले सामने आ चुके हैं। रोजाना पशुपालक अपने बीमार मवेशियों को उपचार के लिए पशु चिकित्सालय लेकर जा रहे हैं। या पशु चिकित्सा केंद्र में जाकर बीमारी के उपचार के लिए दवाइयां लेने पहुंच रहे हैं, लेकिन पशुपालकों को अपने मवेशियों का इलाज करने के लिए दवाइयां नहीं मिल रही हैं। इसकी वजह से पशुपालक काफी परेशान हैं। समय रहते उन्हें दवाइयां आवंटित नहीं की गई तो सलूणह में लंपी रोग से मवेशियों के मरने की संख्या काफी बढ़ जाएगी।
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परिचर्चा
- लंपी रोग तेजी से फैल रहा है, लेकिन सलूणी में पशुपालकों को इसकी दवाई नहीं मिल रही है। पशु चिकित्सालय में जाकर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। विभाग को तुरंत दवाई का प्रबंध करना चाहिए। -वीरेंद्र कुमार, पशुपालक
-ग्रामीण क्षेत्रों में लोग खेती बैल के जरिये करते हैं और दूध के लिए गाय को पालते हैं। मौजूदा समय में उनके ये मवेशी लंपी रोग की चपेट में आ रहे हैं, लेकिन पशुपालन विभाग उन्हें लंपी रोग की दवाई नहीं दे पा रहा है। -चतरो राम, पशुपालक
-विकास खंड सलूणी में लंपी रोग मवेशियों को अपनी चपेट में ले रहा है। इससे मवेशियों को बचाने के लिए दवाई मिलना काफी जरूरी है। पशुपालकों को पशु चिकित्सालय में दवाई नहीं मिल रही है। इससे पशु पालक काफी परेशान हैं। -राज कुमार, पशुपालक
-लंपी रोग से लोगों के मवेशी मर रहे हैं, लेकिन पशुपालन विभाग पशु पालकों को इस रोग की दवाई नहीं देे पा रहा है। इसे लेकर पशुपालकों में विभाग के प्रति भारी रोष है। -टेक चंद, पशु पालक।
-सलूणी में लंपी रोग की दवाइयां खत्म हो चुकी हैं। इस बारे में उच्चाधिकारी को अवगत करवा दिया गया है। जल्द ही यहां दवाइयों की खेप पहुंच सकती है। उसके बाद पशुपालकों को दवाइयां आवंटित कर दी जाएंगी। -डॉ. अंतल, उपमंडलीय पशु चिकित्सालय सलूणी के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी
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विकास खंड सलूणी की 43 पंचायतों में रहने वाले अधिकतर परिवारों के पास अपने मवेशी हैं। मौजूदा समय में मवेशियों में लंपी रोग फैला हुआ है। इस बीमारी से सलूणी के मवेशी भी अछूते नहीं हैं।
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विकास खंड में अब तक लंपी रोग के 1840 मामले सामने आ चुके हैं। रोजाना पशुपालक अपने बीमार मवेशियों को उपचार के लिए पशु चिकित्सालय लेकर जा रहे हैं। या पशु चिकित्सा केंद्र में जाकर बीमारी के उपचार के लिए दवाइयां लेने पहुंच रहे हैं, लेकिन पशुपालकों को अपने मवेशियों का इलाज करने के लिए दवाइयां नहीं मिल रही हैं। इसकी वजह से पशुपालक काफी परेशान हैं। समय रहते उन्हें दवाइयां आवंटित नहीं की गई तो सलूणह में लंपी रोग से मवेशियों के मरने की संख्या काफी बढ़ जाएगी।
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परिचर्चा
- लंपी रोग तेजी से फैल रहा है, लेकिन सलूणी में पशुपालकों को इसकी दवाई नहीं मिल रही है। पशु चिकित्सालय में जाकर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। विभाग को तुरंत दवाई का प्रबंध करना चाहिए। -वीरेंद्र कुमार, पशुपालक
-ग्रामीण क्षेत्रों में लोग खेती बैल के जरिये करते हैं और दूध के लिए गाय को पालते हैं। मौजूदा समय में उनके ये मवेशी लंपी रोग की चपेट में आ रहे हैं, लेकिन पशुपालन विभाग उन्हें लंपी रोग की दवाई नहीं दे पा रहा है। -चतरो राम, पशुपालक
-विकास खंड सलूणी में लंपी रोग मवेशियों को अपनी चपेट में ले रहा है। इससे मवेशियों को बचाने के लिए दवाई मिलना काफी जरूरी है। पशुपालकों को पशु चिकित्सालय में दवाई नहीं मिल रही है। इससे पशु पालक काफी परेशान हैं। -राज कुमार, पशुपालक
-लंपी रोग से लोगों के मवेशी मर रहे हैं, लेकिन पशुपालन विभाग पशु पालकों को इस रोग की दवाई नहीं देे पा रहा है। इसे लेकर पशुपालकों में विभाग के प्रति भारी रोष है। -टेक चंद, पशु पालक।
-सलूणी में लंपी रोग की दवाइयां खत्म हो चुकी हैं। इस बारे में उच्चाधिकारी को अवगत करवा दिया गया है। जल्द ही यहां दवाइयों की खेप पहुंच सकती है। उसके बाद पशुपालकों को दवाइयां आवंटित कर दी जाएंगी। -डॉ. अंतल, उपमंडलीय पशु चिकित्सालय सलूणी के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी