हिमाचल प्रदेश: पांगी घाटी की महिलाएं बनीं प्रेरणा, ठांगी, अखरोट बेच लिखी सफलता की कहानी; जानें विस्तार से
हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा की पांगी घाटी की महिलाएं दूसरों के लिए प्रेरणा की मिसाल बन गई हैं। ये महिलाएं ठांगी और अखरोट के व्यापार में सफलता हासिल कर रही हैं बल्कि लाखों का कारोबार भी कर रही हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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पांगी घाटी की महिलाएं न सिर्फ अपने परिवारों का पेट भरने में सक्षम हो रही हैं बल्कि दूसरों के लिए भी आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। अपनी मेहनत, लगन और एकजुटता के बल पर पांगी की इन महिलाओं ने ‘पीर पंजाल जंगल प्रोड्यूसर कंपनी’ की नींव रखी, जो अब न केवल वन-आधारित उत्पादों ठांगी और अखरोट के व्यापार में सफलता हासिल कर रही है बल्कि लाखों का कारोबार भी कर रही हैं।
इस अनोखी पहल ने न केवल पांगी के गांवों में महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता दी है बल्कि यह साबित कर दिया है कि जब महिलाएं एकजुट होती हैं तो वे किसी भी मुश्किल को पार कर सकती हैं। पीर पंजाल जंगल प्रोड्यूसर कंपनी 19 गांवों की 896 महिलाओं की ओर से संचालित की जा रही है। कंपनी में प्रत्येक महिला सदस्य के लिए केवल 100 रुपये का सदस्यता शुल्क लिया जाता है और कंपनी का मुनाफा समान रूप से सभी में वितरित किया जाता है। खास बात यह है कि इसमें हर ओहदों पर महिलाएं हैं।
कंपनी ने हैदराबाद की एक कंपनी को ड्राईफ्रूट की आपूर्ति कर 14 माह में 35.05 लाख कमाए। इसमें सरकार को भी जीएसटी के रूप में दो लाख मिले। कंपनी की अध्यक्ष भागतो देवी, सचिव जमना देवी, सदस्य सुनीता ठाकुर ने बताया कि यह सफलता 13 नवंबर 2024 में आईआईएम हैदराबाद के मार्गदर्शन में हुए एक जागरूकता शिविर के बाद संभव हुई।
महिलाएं हैदराबाद की कंपनी को ठांगी 2,600 रुपये और अखरोट 500 से 2,000 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेच रही हैं। कंपनी ने 2025-26 का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। ड्राई फ्रूट की ये उपज 19 गांवों के 135 वन-आधारित उत्पादकों से आई हैं। महिलाएं अन्य ग्रामीण महिलाओं को प्राकृतिक संसाधनों के बल स्वावलंबन से जोड़ने को प्रेरित कर रही हैं।