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सुबह-शाम खेतों में पहरेदारी, नहीं लगा पा रहे दिहाड़ी

Wed, 25 Aug 2021 10:20 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Aug 2021 10:20 PM IST
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Guarding in the fields in the morning and evening, unable to pay daily wages
सलूणी (चंबा)। विकास खंड सलूणी की आधा दर्जन से अधिक पंचायतों के लोग बंदरों के आतंक से मनरेगा में दिहाड़ी नहीं लगा पा रहे हैं। ग्रामीणों को दिनभर अपने खेतों में बंदरों से मक्की की फसल बचाने के लिए रखवाली करनी पड़ रही है। इसकी वजह से लोग चाहकर भी मनरेगा में दिहाड़ी नहीं लगा पा रहे हैं। लोग जब अपने खेतों को छोड़कर मनरेगा में काम करने के लिए जाते हैं तो बंदरों के झुंड खेतों में मक्की की फसल को बरबाद कर देते हैं। कई लोगों के खेतों में तो बंदरों ने मक्की की फसल को बरबाद कर दिया है। इसके चलते अब ग्रामीण अपनी फसल को बचाने के लिए मनरेगा में दिहाड़ी भी नहीं लगा पा रहे हैं। इससे पंचायत में विकास कार्यों पर भी असर पड़ रहा है।
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ग्रामीणों मनोज कुमार, पियुष कुमार, गौरव, परस राम, कुलदीप सिंह, चतर सिंह, टेक चंद, प्रेम लाल, नर सिंह और नरेंद्र ने बताया कि ग्राम पंचायत सलूणी, खरल, सियुला, किलोड़, सूरी, सुंडला, दिघाई और पुखरी में बंदरों का आतंक काफी बढ़ गया है। लोगों को सुबह से लेकर शाम तक खेतों में पहरा देना पड़ रहा है। सरकार ने गरीब परिवारों को सौ दिन का रोजगार देने के उद्देश्य से मनरेगा योजना चलाई थी लेकिन, लोग बंदरों के आतंक से सरकार की योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि बंदरों को पकड़कर रिहायसी बस्ती से दूर जंगल में छोड़ा जाए। वनमंडलाधिकारी सलूणी कुलदीप जम्वाल ने बताया कि उनके ध्यान में मामला लाया गया है। जल्द बंदरों को पकड़ने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
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