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Chamba News: चुराह के किसान पालमपुर में सीखेंगे मशरूम उत्पादन के गुर
Mon, 12 Jan 2026 11:11 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 12 Jan 2026 11:11 PM IST
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चुराह (चंबा)। चुराह ब्लॉक के तीसा क्षेत्र के 30 किसान पालमपुर में मशरूम उत्पादन के गुर सीखेंगे। द हंस फाउंडेशन और एलआईसी एचएफएल के संयुक्त तत्वावधान में तीसा क्षेत्र किसानों का समूह मशरूम विकास परियोजना केंद्र पालमपुर, जिला कांगड़ा को रवाना हुआ। यह प्रशिक्षण 12 जनवरी से 16 जनवरी तक पांच दिन तक चलेगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत किसानों को मशरूम की आधुनिक खेती, बीज (स्पॉन) तैयार करने की विधि, उत्पादन तकनीक, रोग नियंत्रण, भंडारण और विपणन की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों द्वारा किसानों को यह भी बताया जाएगा कि कम लागत में बेहतर उत्पादन कर किस तरह अतिरिक्त आमदनी हासिल की जा सकती है।
द हंस फाउंडेशन तीसा के विषय वस्तु विशेषज्ञ रोहित राठौर ने बताया कि संस्था का उद्देश्य चुराह जैसे दुर्गम क्षेत्रों के किसानों को स्वरोजगार से जोड़ना और उनकी आय बढ़ाना है। मशरूम उत्पादन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसमें कम जगह, कम समय और कम पूंजी में बेहतर मुनाफा संभव है।
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इस प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है, ताकि वे लौटकर अपने-अपने गांवों में इसे सफलतापूर्वक अपना सकें। किसानों ने इस प्रशिक्षण को लेकर उत्साह जताया है। उनका कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें नई तकनीक सीखने और अपने क्षेत्र में रोजगार के नए साधन विकसित करने का अवसर देते हैं। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये किसान अपने-अपने गांवों में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देंगे, जिससे क्षेत्र में आय के नए रास्ते खुलेंगे।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत किसानों को मशरूम की आधुनिक खेती, बीज (स्पॉन) तैयार करने की विधि, उत्पादन तकनीक, रोग नियंत्रण, भंडारण और विपणन की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों द्वारा किसानों को यह भी बताया जाएगा कि कम लागत में बेहतर उत्पादन कर किस तरह अतिरिक्त आमदनी हासिल की जा सकती है।
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द हंस फाउंडेशन तीसा के विषय वस्तु विशेषज्ञ रोहित राठौर ने बताया कि संस्था का उद्देश्य चुराह जैसे दुर्गम क्षेत्रों के किसानों को स्वरोजगार से जोड़ना और उनकी आय बढ़ाना है। मशरूम उत्पादन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसमें कम जगह, कम समय और कम पूंजी में बेहतर मुनाफा संभव है।
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इस प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है, ताकि वे लौटकर अपने-अपने गांवों में इसे सफलतापूर्वक अपना सकें। किसानों ने इस प्रशिक्षण को लेकर उत्साह जताया है। उनका कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें नई तकनीक सीखने और अपने क्षेत्र में रोजगार के नए साधन विकसित करने का अवसर देते हैं। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये किसान अपने-अपने गांवों में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देंगे, जिससे क्षेत्र में आय के नए रास्ते खुलेंगे।