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Chamba News: खाली पदों की परछाई में चल रही आंगनबाड़ी व्यवस्था
Fri, 05 Jun 2026 10:52 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 05 Jun 2026 10:52 PM IST
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सीडीपीओ जैसे अहम पदों पर तैनाती न होने से अतिरिक्त चार्ज से चलाया जा रहा काम
भरमौर, पांगी और चुवाड़ी में अन्य कर्मचारी देख रहे सीडीपीओ का पद भार
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले में आंगनबाड़ी व्यवस्था को चलाने वाली ब्लॉक स्तरीय मशीनरी खुद खाली पदों के सहारे खड़ी नजर आ रही है। सीडीपीओ जैसे अहम पदों पर तैनाती न होने से कहीं अतिरिक्त चार्ज से काम चलाया जा रहा है। कहीं पूरी जिम्मेदारी जुगाड़ व्यवस्था पर टिक गई है। इसका असर आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी और लाभार्थी सेवाओं पर पड़ रहा है।
बाल विकास परियोजना अधिकारियों यानी सीडीपीओ के कई पद खाली हैं। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। बाल विकास परियोजना कार्यालय में सीडीपीओ का पद खाली है। अतिरिक्त कार्यभार जिला कार्यक्रम अधिकारी को दिया है। डीपीओ के पास पहले से पूरे जिले का जिम्मा है। चंबा ब्लॉक का चार्ज मिलने से उनका काम भी प्रभावित हो रहा है।
दूसरी तरफ, भरमौर, पांगी और चुवाड़ी परियोजना कार्यालयों में भी सीडीपीओ तैनात नहीं हैं। दूसरे कर्मचारियों को अतिरिक्त चार्ज दिया है। भरमौर और पांगी जैसे दुर्गम इलाकों में सीडीपीओ न होने से मॉनिटरिंग ठप है। पोषाहार वितरण, कुपोषण मुक्ति अभियान और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत मिलने वाले लाभ समय पर नहीं मिल रहे। अधिकारियों के हस्ताक्षर करवाने और समस्या बताने के लिए कोई अधिकारी नहीं मिलता। कई केंद्रों का निरीक्षण महीनों से नहीं हुआ है। बिल पास करवाने से लेकर रिपोर्ट भेजने तक हर काम लटक रहा है। गौरतलब है कि सीडीपीओ ब्लॉक स्तर पर एकीकृत बाल विकास योजना का नोडल अधिकारी होता है। उसके न होने से आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर लाभार्थियों तक पूरी चेन प्रभावित हो रही है। जिले में 1495 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। बड़े अधिकारियों के साथ सुपरवाइजरों के पद भी खाली हैं।
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संबंधित विभाग की रिक्तियों की रिपोर्ट सरकार को भेजी है। उम्मीद है कि सरकार जल्द नियुक्तियां करेगी। - मुकेश रेपसवाल, उपायुक्त
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भरमौर, पांगी और चुवाड़ी में अन्य कर्मचारी देख रहे सीडीपीओ का पद भार
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले में आंगनबाड़ी व्यवस्था को चलाने वाली ब्लॉक स्तरीय मशीनरी खुद खाली पदों के सहारे खड़ी नजर आ रही है। सीडीपीओ जैसे अहम पदों पर तैनाती न होने से कहीं अतिरिक्त चार्ज से काम चलाया जा रहा है। कहीं पूरी जिम्मेदारी जुगाड़ व्यवस्था पर टिक गई है। इसका असर आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी और लाभार्थी सेवाओं पर पड़ रहा है।
बाल विकास परियोजना अधिकारियों यानी सीडीपीओ के कई पद खाली हैं। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। बाल विकास परियोजना कार्यालय में सीडीपीओ का पद खाली है। अतिरिक्त कार्यभार जिला कार्यक्रम अधिकारी को दिया है। डीपीओ के पास पहले से पूरे जिले का जिम्मा है। चंबा ब्लॉक का चार्ज मिलने से उनका काम भी प्रभावित हो रहा है।
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दूसरी तरफ, भरमौर, पांगी और चुवाड़ी परियोजना कार्यालयों में भी सीडीपीओ तैनात नहीं हैं। दूसरे कर्मचारियों को अतिरिक्त चार्ज दिया है। भरमौर और पांगी जैसे दुर्गम इलाकों में सीडीपीओ न होने से मॉनिटरिंग ठप है। पोषाहार वितरण, कुपोषण मुक्ति अभियान और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत मिलने वाले लाभ समय पर नहीं मिल रहे। अधिकारियों के हस्ताक्षर करवाने और समस्या बताने के लिए कोई अधिकारी नहीं मिलता। कई केंद्रों का निरीक्षण महीनों से नहीं हुआ है। बिल पास करवाने से लेकर रिपोर्ट भेजने तक हर काम लटक रहा है। गौरतलब है कि सीडीपीओ ब्लॉक स्तर पर एकीकृत बाल विकास योजना का नोडल अधिकारी होता है। उसके न होने से आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर लाभार्थियों तक पूरी चेन प्रभावित हो रही है। जिले में 1495 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। बड़े अधिकारियों के साथ सुपरवाइजरों के पद भी खाली हैं।
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संबंधित विभाग की रिक्तियों की रिपोर्ट सरकार को भेजी है। उम्मीद है कि सरकार जल्द नियुक्तियां करेगी। - मुकेश रेपसवाल, उपायुक्त