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Chamba News: दवाई के लिए टांडा की दौड़ लगा रहे 165 एचआईवी पाॅजिटिव मरीज
Wed, 11 Sep 2024 10:09 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 11 Sep 2024 10:09 PM IST
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चंबा। जिले के 165 एचआईवी मरीजों के लिए पांच साल में मेडिकल कॉलेज में एआरटी सेंटर नहीं खुल पाया है। इस कारण इन मरीजों को बीमारी के इलाज की दवाई लेने के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। चंबा मेडिकल कॉलेज अभी तक बिना एआरटी सेंटर चल रहा है। एनएमसी की गाइडलाइन के अनुसार हर मेडिकल कॉलेज के पास अपना एआरटी सेंटर होना जरूरी है, जिससे जिले के एचआईवी पाॅजिटिव मरीजों को स्वास्थ्य जांच के अलावा दवाई लेने के लिए भटकना न पड़े। आकांक्षी जिला के मेडिकल कॉलेज में पांच साल में कोई भी सरकार यह सेंटर नहीं खोल पाई है। यही कारण है कि जिले के 165 एचआईवी पाॅजिटिव मरीज रूटीन टेस्ट और दवाई के लिए 100 किलोमीटर दूर टांडा जा रहे हैं।
कहने के लिए सरकार ने चंबा को आकांक्षी जिला घोषित किया है, लेकिन जिले को आकांक्षी की सूची से बाहर निकालने के लिए न तो केंद्र सरकार कोई प्रयास कर रही है और न ही प्रदेश सरकार गंभीर दिख रही है। सवाल उठता है कि पांच साल में जिस मेडिकल कॉलेज में एक एआरटी सेंटर तक नहीं खुल पाया है, वहां अन्य आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मेडिकल कॉलेज में कब शुरू हो पाएंगी। लोगों में हरीश कुमार, चैन सिंह, संजय शर्मा, टेक चंद, महिंद्र सिंह और विनोद कुमार ने सरकार से मांग की है कि चंबा मेडिकल कॉलेज में एआरटी सेंटर के साथ अन्य आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं भी शुरू करवाई जाएं। उधर, प्राचार्य डॉक्टर एसएस डोगरा ने बताया कि जल्द ही मेडिकल कॉलेज में एआरटी सेंटर खुलवाने की व्यवस्था करवाई जाएगी। इसके लिए उचित स्थान की तलाश की जा रही है।
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जानिए क्या है एआरटी
एड्स की ऐसी दवाइयां अब उपलब्ध हैं। जिन्हें एंटी रिवर्स ट्रांसक्रिप्ट एंजाइम वायरल थैरेपी और एंटी रेट्रोवायरल थैरेपी दवाइयों के नाम से जाना जाता है। सिपला की ट्रायोम्यून जैसी यह दवाइयां महंगी हैं, प्रति व्यक्ति सालाना खर्च तकरीबन 15 हजार रुपए होता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी डब्ल्यूबीसी की संख्या में नियंत्रित कर एड्स पीड़ित को स्वस्थ बनाए रखती है। यह हर जगह आसानी से नहीं मिलती है।
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कहने के लिए सरकार ने चंबा को आकांक्षी जिला घोषित किया है, लेकिन जिले को आकांक्षी की सूची से बाहर निकालने के लिए न तो केंद्र सरकार कोई प्रयास कर रही है और न ही प्रदेश सरकार गंभीर दिख रही है। सवाल उठता है कि पांच साल में जिस मेडिकल कॉलेज में एक एआरटी सेंटर तक नहीं खुल पाया है, वहां अन्य आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मेडिकल कॉलेज में कब शुरू हो पाएंगी। लोगों में हरीश कुमार, चैन सिंह, संजय शर्मा, टेक चंद, महिंद्र सिंह और विनोद कुमार ने सरकार से मांग की है कि चंबा मेडिकल कॉलेज में एआरटी सेंटर के साथ अन्य आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं भी शुरू करवाई जाएं। उधर, प्राचार्य डॉक्टर एसएस डोगरा ने बताया कि जल्द ही मेडिकल कॉलेज में एआरटी सेंटर खुलवाने की व्यवस्था करवाई जाएगी। इसके लिए उचित स्थान की तलाश की जा रही है।
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जानिए क्या है एआरटी
एड्स की ऐसी दवाइयां अब उपलब्ध हैं। जिन्हें एंटी रिवर्स ट्रांसक्रिप्ट एंजाइम वायरल थैरेपी और एंटी रेट्रोवायरल थैरेपी दवाइयों के नाम से जाना जाता है। सिपला की ट्रायोम्यून जैसी यह दवाइयां महंगी हैं, प्रति व्यक्ति सालाना खर्च तकरीबन 15 हजार रुपए होता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी डब्ल्यूबीसी की संख्या में नियंत्रित कर एड्स पीड़ित को स्वस्थ बनाए रखती है। यह हर जगह आसानी से नहीं मिलती है।
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