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108 एंबुलेंस में नहीं मिली दवाइयां और जरूरी उपकरण
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चंबा। जिले में चलने वाली 108 एंबुलेंस वाहनों में बड़ी खामियां सामने आई है। समय पर एंबुलेंस न मिलने से नवजात की मौत के मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के औचक निरीक्षण में बात सामने आई है। जांच पाया गया कि कई एंबुलेंस वाहनों में न ही जरूरी दवाइयां है और नहीं जरूरी उपकरण। इससे साफ है कि 108 एंबुलेंस वाहनों में मरीजों को सुविधाएं देने के नाम पर उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट जल्द ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को भेजेंगे।
गौरतलब हो कि बार-बार 108 एंबुलेंसो को लेकर मिल रही शिकायतों के चलते सोमवार शाम को मुख्य चिकित्सा अधिकरी व स्वास्थ्य अधिकारी ने एंबुलेंसो का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान एंबुलेंस के अंदर कई खामियां पाई गई। जिसकी एक रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट को स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य निदेशक को भेजेंगे।
इसके साथ ही एसडीएम चंबा ने भी मेडिकल कॉलेज में जाकर एंबुलेंस वाहनों से संबंधित रिकॉर्ड को तलब किया। एंबुलेंस के भीतर मरीज की आवश्यकता अनुसार जो दवाइयां होनी चाहिए, वह एंबुलेंस में मौजूद नहीं थी। इतना ही नहीं जीवन रक्षा के लिए जरूरी यंत्र लिफाफे में बंद पड़े थे। जिनका इस्तेमाल शायद ही कभी किया गया हो।
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एंबुलेंस के भीतर सफाई व्यवस्था भी उचित नहीं पाई गई। वाहन में धूल मिट्टी इतनी भरी हुई थी कि जिससे मरीज को एंबुलेंस के अंदर भीतर लेने में परेशानी हो। जांच में पता चला कि एंबुलेंस की खिंचाई ठीक नहीं है। इससे वह बार-बार रास्ते में बंद हो जाती है। कई बार ब्रेक काम करना बंद कर देती है। एंबुलेंस में रखी स्टेपनी की हालत भी खस्ता है।
एंबुुलेंस में कंपनी की ओर से जो फोन लगाए गए थे। उसे निकाला जा चुका है। कर्मचारी अपने फोन का इस्तेमाल करके मरीजों की लोकेशन पर पहुंच रहे हैं। कुल मिलाकर चंबा में चलने वाली एंबुुलेंस राम भरोसे ही चल रही है।
पांगी से आई एंबुलेंस की हालत खस्ता, सुविधाएं भी नहीं
पांगी से मरीज को लेकर चंबा पहुंची एंबुलेंस का जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने निरीक्षण किया। तो उसके अंदर दवाई, जरूरी उपकरण कुछ भी नहीं पाया गया। खाली गाड़ी में मरीजों को ढोया जा रहा है। इसके अलावा एंबुलेंस में मरीज को लेटाने वाली सीट के कवर फट चुके थे। अगर इमरजेंसी में मरीज को किसी दवा या अन्य जीवन रक्षा उपकरण की जरूरत पड़ जाए, तो ऐसी कोई सुविधा पांगी की एंबुुलेंस में मौजूद नहीं थी। हालांकि पांगी जिला का सबसे दुर्गम क्षेत्र है। लेकिन एंबुलेंस संचालक कंपनी लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है।
एंबुलेंस कर्मचारियों से जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने यूनिफार्म के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 के बाद उन्हें एक बार भी वर्दी नहीं दी गई है। इसके अलावा एंबुलेंस कर्मियों के गले में कोई आई कार्ड भी नहीं था। जिससे उनकी पद की पहचान हो सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वाईडी शर्मा ने बताया कि चंबा में एंबुलेंस वाहनों का औचक निरीक्षण किया गया है। एक एंबुलेंस में दवाई और अन्य कोई भी उपकरण नहीं था। जबकि दूसरी एंबुलेंस में भी कई खामियां पाई गई है। इसकी रिपोर्ट बना दी गई है। जिसे स्वास्थ्य निदेशक को भेजा जाएगा।
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गौरतलब हो कि बार-बार 108 एंबुलेंसो को लेकर मिल रही शिकायतों के चलते सोमवार शाम को मुख्य चिकित्सा अधिकरी व स्वास्थ्य अधिकारी ने एंबुलेंसो का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान एंबुलेंस के अंदर कई खामियां पाई गई। जिसकी एक रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट को स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य निदेशक को भेजेंगे।
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इसके साथ ही एसडीएम चंबा ने भी मेडिकल कॉलेज में जाकर एंबुलेंस वाहनों से संबंधित रिकॉर्ड को तलब किया। एंबुलेंस के भीतर मरीज की आवश्यकता अनुसार जो दवाइयां होनी चाहिए, वह एंबुलेंस में मौजूद नहीं थी। इतना ही नहीं जीवन रक्षा के लिए जरूरी यंत्र लिफाफे में बंद पड़े थे। जिनका इस्तेमाल शायद ही कभी किया गया हो।
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एंबुलेंस के भीतर सफाई व्यवस्था भी उचित नहीं पाई गई। वाहन में धूल मिट्टी इतनी भरी हुई थी कि जिससे मरीज को एंबुलेंस के अंदर भीतर लेने में परेशानी हो। जांच में पता चला कि एंबुलेंस की खिंचाई ठीक नहीं है। इससे वह बार-बार रास्ते में बंद हो जाती है। कई बार ब्रेक काम करना बंद कर देती है। एंबुलेंस में रखी स्टेपनी की हालत भी खस्ता है।
एंबुुलेंस में कंपनी की ओर से जो फोन लगाए गए थे। उसे निकाला जा चुका है। कर्मचारी अपने फोन का इस्तेमाल करके मरीजों की लोकेशन पर पहुंच रहे हैं। कुल मिलाकर चंबा में चलने वाली एंबुुलेंस राम भरोसे ही चल रही है।
पांगी से आई एंबुलेंस की हालत खस्ता, सुविधाएं भी नहीं
पांगी से मरीज को लेकर चंबा पहुंची एंबुलेंस का जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने निरीक्षण किया। तो उसके अंदर दवाई, जरूरी उपकरण कुछ भी नहीं पाया गया। खाली गाड़ी में मरीजों को ढोया जा रहा है। इसके अलावा एंबुलेंस में मरीज को लेटाने वाली सीट के कवर फट चुके थे। अगर इमरजेंसी में मरीज को किसी दवा या अन्य जीवन रक्षा उपकरण की जरूरत पड़ जाए, तो ऐसी कोई सुविधा पांगी की एंबुुलेंस में मौजूद नहीं थी। हालांकि पांगी जिला का सबसे दुर्गम क्षेत्र है। लेकिन एंबुलेंस संचालक कंपनी लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है।
एंबुलेंस कर्मचारियों से जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने यूनिफार्म के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 के बाद उन्हें एक बार भी वर्दी नहीं दी गई है। इसके अलावा एंबुलेंस कर्मियों के गले में कोई आई कार्ड भी नहीं था। जिससे उनकी पद की पहचान हो सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वाईडी शर्मा ने बताया कि चंबा में एंबुलेंस वाहनों का औचक निरीक्षण किया गया है। एक एंबुलेंस में दवाई और अन्य कोई भी उपकरण नहीं था। जबकि दूसरी एंबुलेंस में भी कई खामियां पाई गई है। इसकी रिपोर्ट बना दी गई है। जिसे स्वास्थ्य निदेशक को भेजा जाएगा।