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ट्रेन का स्वागत, 20 हजार परिवारों के हितों की चिंता करे केंद्र : जितेंद्र
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हिमुडा निदेशक मंडल के सदस्य बोले- बरमाणा के ट्रांसपोर्ट कारोबार पर पड़ सकता है असर
रेल परियोजना का 1500 करोड़ का खर्च केंद्र उठाए
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमुडा निदेशक मंडल के सदस्य जितेंद्र चंदेल ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी-बरमाणा रेल परियोजना को लेकर केंद्र सरकार से 20 हजार परिवारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वह रेल परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इससे बरमाणा क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट कारोबार पर पड़ने वाले संभावित असर को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
बिलासपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में चंदेल ने कहा कि समझौता ज्ञापन के अनुसार बिलासपुर से बरमाणा तक रेल पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार को करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। जब इस परियोजना को आगे लेह तक पहुंचाया जाना है तो इसका आर्थिक बोझ हिमाचल प्रदेश पर क्यों डाला जा रहा है। उन्होंने मांग की कि इस खर्च को केंद्र सरकार वहन करे।
चंदेल ने कहा कि बरमाणा क्षेत्र में करीब 20 हजार परिवार ट्रांसपोर्ट कारोबार और इससे जुड़े कार्यों पर निर्भर हैं। रेल से माल ढुलाई बढ़ने पर इन परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि रेल का आना अच्छी बात है और वे इसका स्वागत करते हैं, लेकिन ट्रांसपोर्ट कारोबार पर निर्भर परिवारों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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उन्होंने केंद्र सरकार से प्रभावित ट्रांसपोर्टरों और उनके परिवारों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्ट योजना बनाने की मांग की।
इस अवसर पर पूर्व जिला परिषद सदस्य राजेंद्र ठाकुर, सिहड़ा पंचायत प्रधान दयानंद, एनएसयूआई प्रदेश सचिव रितिक सोनी और कांग्रेस नेता पवन ठाकुर मौजूद रहे।
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रेल परियोजना का 1500 करोड़ का खर्च केंद्र उठाए
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमुडा निदेशक मंडल के सदस्य जितेंद्र चंदेल ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी-बरमाणा रेल परियोजना को लेकर केंद्र सरकार से 20 हजार परिवारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वह रेल परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इससे बरमाणा क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट कारोबार पर पड़ने वाले संभावित असर को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
बिलासपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में चंदेल ने कहा कि समझौता ज्ञापन के अनुसार बिलासपुर से बरमाणा तक रेल पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार को करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। जब इस परियोजना को आगे लेह तक पहुंचाया जाना है तो इसका आर्थिक बोझ हिमाचल प्रदेश पर क्यों डाला जा रहा है। उन्होंने मांग की कि इस खर्च को केंद्र सरकार वहन करे।
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चंदेल ने कहा कि बरमाणा क्षेत्र में करीब 20 हजार परिवार ट्रांसपोर्ट कारोबार और इससे जुड़े कार्यों पर निर्भर हैं। रेल से माल ढुलाई बढ़ने पर इन परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि रेल का आना अच्छी बात है और वे इसका स्वागत करते हैं, लेकिन ट्रांसपोर्ट कारोबार पर निर्भर परिवारों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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उन्होंने केंद्र सरकार से प्रभावित ट्रांसपोर्टरों और उनके परिवारों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्ट योजना बनाने की मांग की।
इस अवसर पर पूर्व जिला परिषद सदस्य राजेंद्र ठाकुर, सिहड़ा पंचायत प्रधान दयानंद, एनएसयूआई प्रदेश सचिव रितिक सोनी और कांग्रेस नेता पवन ठाकुर मौजूद रहे।