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Bilaspur News: शक्तिबाण से मूर्छित हुए लक्ष्मण, संजीवनी लेकर पहुंचे हनुमान
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घुमारवीं रामलीला मंचन में लक्ष्मण मूर्छा का दृश्य। संवाद
- फोटो : Archive
घुमारवीं की रामलीला में अंगद संवाद और राम-रावण युद्ध का मंचन, लक्ष्मण मूर्छा का प्रसंग देख भावुक हुए दर्शक
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। आदर्श रामलीला नाटक समिति घुमारवीं की रामलीला के आठवें दिन लक्ष्मण मूर्छा और हनुमान के संजीवनी लाने के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण के मूर्छित होने और उन्हें बचाने के लिए हनुमान के संजीवनी बूटी लाने का प्रभावशाली मंचन किया गया। इसके अलावा रावण दरबार, विभीषण निष्कासन, अंगद संवाद और राम-रावण युद्ध के प्रसंग भी मंच पर जीवंत किए गए।कार्यक्रम में लोक निर्माण विभाग के भोरंज मंडल में तैनात सहायक अभियंता राजेश ठाकुर ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त किया और कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
रावण दरबार के दृश्य में विभीषण ने रावण को माता सीता को सम्मानपूर्वक भगवान श्रीराम के पास लौटाने और युद्ध टालने की सलाह दी, लेकिन रावण ने उनकी बात मानने के बजाय उन्हें लंका से निष्कासित कर दिया। इसके बाद विभीषण भगवान श्रीराम की शरण में पहुंच गए। अंगद संवाद में अंगद ने रावण के दरबार में पैर जमाकर चुनौती दी कि कोई उनका पैर हिलाकर दिखाए। दरबार में मौजूद योद्धा ऐसा करने में असफल रहे। इस दृश्य में अंगद के साहस और दृढ़ संकल्प को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
राम-रावण की सेनाओं के बीच युद्ध के दौरान मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण रणभूमि में मूर्छित होकर गिर पड़े। भाई को अचेत देखकर भगवान श्रीराम व्याकुल हो उठे। वैद्य की सलाह पर हनुमान संजीवनी बूटी लेने पर्वत की ओर रवाना हुए। बूटी की पहचान नहीं कर पाने पर वह पूरा पर्वत ही उठा लाए। हनुमान के पराक्रम और प्रभुभक्ति के इस दृश्य पर दर्शकों ने खूब सराहना की।
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रामलीला में रावण की भूमिका संजय कुमार, भगवान श्रीराम की अभिषेक टेसू, लक्ष्मण की भुवनेश गौतम, सुग्रीव की जगन्नाथ राणा, विभीषण की ज्योति शर्मा, हनुमान की सुरेश धीमान, अंगद की जोगिंद्र सिंह, मेघनाद की आशीष वर्धन, कुंभकर्ण की संदीप गौतम, मंत्री की शशि, सेनापति की अंकू, जामवंत की यश और वैद्य की भूमिका मान सिंह ने निभाई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। आदर्श रामलीला नाटक समिति घुमारवीं की रामलीला के आठवें दिन लक्ष्मण मूर्छा और हनुमान के संजीवनी लाने के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण के मूर्छित होने और उन्हें बचाने के लिए हनुमान के संजीवनी बूटी लाने का प्रभावशाली मंचन किया गया। इसके अलावा रावण दरबार, विभीषण निष्कासन, अंगद संवाद और राम-रावण युद्ध के प्रसंग भी मंच पर जीवंत किए गए।कार्यक्रम में लोक निर्माण विभाग के भोरंज मंडल में तैनात सहायक अभियंता राजेश ठाकुर ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त किया और कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
रावण दरबार के दृश्य में विभीषण ने रावण को माता सीता को सम्मानपूर्वक भगवान श्रीराम के पास लौटाने और युद्ध टालने की सलाह दी, लेकिन रावण ने उनकी बात मानने के बजाय उन्हें लंका से निष्कासित कर दिया। इसके बाद विभीषण भगवान श्रीराम की शरण में पहुंच गए। अंगद संवाद में अंगद ने रावण के दरबार में पैर जमाकर चुनौती दी कि कोई उनका पैर हिलाकर दिखाए। दरबार में मौजूद योद्धा ऐसा करने में असफल रहे। इस दृश्य में अंगद के साहस और दृढ़ संकल्प को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
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राम-रावण की सेनाओं के बीच युद्ध के दौरान मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण रणभूमि में मूर्छित होकर गिर पड़े। भाई को अचेत देखकर भगवान श्रीराम व्याकुल हो उठे। वैद्य की सलाह पर हनुमान संजीवनी बूटी लेने पर्वत की ओर रवाना हुए। बूटी की पहचान नहीं कर पाने पर वह पूरा पर्वत ही उठा लाए। हनुमान के पराक्रम और प्रभुभक्ति के इस दृश्य पर दर्शकों ने खूब सराहना की।
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रामलीला में रावण की भूमिका संजय कुमार, भगवान श्रीराम की अभिषेक टेसू, लक्ष्मण की भुवनेश गौतम, सुग्रीव की जगन्नाथ राणा, विभीषण की ज्योति शर्मा, हनुमान की सुरेश धीमान, अंगद की जोगिंद्र सिंह, मेघनाद की आशीष वर्धन, कुंभकर्ण की संदीप गौतम, मंत्री की शशि, सेनापति की अंकू, जामवंत की यश और वैद्य की भूमिका मान सिंह ने निभाई।