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हिमाचल में भ्रष्टाचार का हाल: फरियादी बोला- साहब, न शराब पिला सका न मीट खिला सका, इसलिए नहीं हुई तकसीम

Fri, 16 Jan 2026 06:00 AM IST
अंकेश डोगरा नीरज महाजन, भराड़ी (बिलासपुर)।
नीरज महाजन, भराड़ी (बिलासपुर)। Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 16 Jan 2026 06:00 AM IST
सार

हिमाचल में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं। ये पता तब लगता है जब कोई खुलकर इसके खिलाफ बोलता है। ऐसा ही मामला घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के तहत कोट पंचायत में आया। जहां सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम में फरियादी ने राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। पढ़ें पूरी खबर...

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Ghumarwin Kot panchayat Allegations of corruption sarkar gaon ke dwar program
सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम में राजस्व विभाग के अधिकारियों की शिकायत करते सीता राम। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के तहत कोट पंचायत में सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम में वीरवार को एक फरियादी ने राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के सामने फरियादी ने खुले मंच से कहा कि राजस्व कर्मी जमीन के बंटवारे (तकसीम) के एवज में शराब और मीट की मांग कर रहे हैं। शिकायत सुनते ही मंत्री ने कड़ा संज्ञान लेते हुए उपायुक्त को तुरंत उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए।

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ब्रह्मली गांव के निवासी सीता राम, पुत्र राम लाल ने भारी मन से अपनी व्यथा सुनाई। सीता राम ने बताया कि वह दिहाड़ी-मजदूरी कर अपना घर चलाता है। पिछले लंबे समय से वह अपनी पुश्तैनी जमीन की तकसीम करवाने के लिए राजस्व विभाग की चौखट घिस रहा है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि विभाग के कुछ कर्मचारी सीधे तौर पर काम के बदले शराब और मांस की दावत मांगते हैं। चूंकि वह एक गरीब मजदूर है और उनकी यह अनैतिक मांग पूरी करने में असमर्थ है, इसलिए उसकी फाइल को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। 

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फरियादी ने बताया कि जमीन का बंटवारा न होने के कारण वह अपने घर में शौचालय तक का निर्माण नहीं कर पा रहा है। कानूनी पेचीदगियों और विभाग की सुस्ती के कारण उसका पूरा परिवार नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। सीता राम ने बताया कि उसने पहले भी उपायुक्त के समक्ष गुहार लगाई थी, जिसके बाद वर्ष 2024 में नायब तहसीलदार ने मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट भी तैयार की थी, लेकिन धरातल पर आज तक कुछ नहीं हुआ।

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मंत्री राजेश धर्माणी ने फरियादी की बात को बीच में ही रोकते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की क्लास लगा दी। उन्होंने कहा कि एक गरीब व्यक्ति से इस तरह की मांग करना न केवल भ्रष्टाचार है बल्कि पूरी तरह से अमानवीय है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि लंबित पड़े तकसीम के मामलों का निपटारा समयबद्ध तरीके से किया जाए ताकि लोगों को दर-दर न भटकना पड़े। कार्यक्रम में मौजूद उपायुक्त ने मंत्री के आदेशों के बाद तुरंत मामले की फाइल तलब कर ली है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस प्रकरण की गहनता से जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि किन अधिकारियों की लापरवाही से काम रुका है और अनैतिक मांग करने वाले कर्मी कौन हैं। 
 
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