{"_id":"e66eaadd4cca6de97bfb5b31dcbf286d","slug":"education-news-hindi-news-46","type":"story","status":"publish","title_hn":"मांगे न मानी, तो लौटाईं जाएंगी डिग्रियां ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मांगे न मानी, तो लौटाईं जाएंगी डिग्रियां
ब्यूरो/अमर उजाला, बिलासपुर
Updated Wed, 18 Nov 2015 07:16 PM IST
विज्ञापन
लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत कॉलेज प्रवक्ताओं ने प्रदेश सरकार से मांगें मनवाने के संघर्ष का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। प्रवक्ताओं ने चेताया है कि अगर जल्द उनकी मांगे न मानी गई, तो अतिरिक्त सचिव शिक्षा को एमफिल और पीएचडी की डिग्रियां लौटा दी जाएंगी।
विज्ञापन
प्रवक्ताओं का कहना है कि मांगों को लेकर कई बार अतिरिक्त सचिव शिक्षा पीसी धीमान से मिला जा चुका है, लेकिन आज दिन तक इस बारे में कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। इससे प्रदेश भर के प्रवक्ताओं में फैले भारी रोष ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है।
विज्ञापन
हिमाचल गवर्नमेंट कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के उपप्रधान सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रदेश भर के प्रवक्ता टाइम स्केल और ग्रेड-पे देने के लिए लंबित डीपीसी को बिना एपीआई जल्द करवाने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि इस वजह से 400 के करीब कॉलेज प्रवक्ताओं को सीनियर स्केल, सेलेक्शन ग्रेड और पीबी-चार मिलना है।
विज्ञापन
लेकिन डीपीसी न होने के कारण प्रवक्ताओं को मौद्रिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ प्रवक्ताओं की दो-दो प्रमोशन देय हो चुकी है। 2011 से डीपीसी न होने के कारण हिमाचल के विभिन्न कॉलेजों में कार्यरत सभी प्रवक्ताओं में निराशा का माहौल है।
उन्होंने बताया कि कॉलेज प्रवक्ताओं को काफी वर्षों से यूजीसी मानकों के तहत एमफिल और पीएचडी की विशेष इंक्रीमेंट मिलती थी, जिसे हाल ही में वापिस ले लिया गया है, उसे दोबारा बहाल किया जाए।
साथ ही अनुबंध पर लगे प्रवक्ताओं को रेगुलर करने के लिए 31 मार्च की शर्त हटाई जाए जबकि रेगुलर के समय नेशनल बेनिफिट भी दिए जाए। इसके साथ ही प्रवक्ताओं ने पंजाब और अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रदेश के कॉलेजों में प्रोफेसर के पद सृजित करने की भी मांग की है।
सुरेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और कॉलेजों में आधार संरचना के मद्देनजर एपीआई परफोर्मा को दोबारा बनाया जाए। इसके साथ ही सप्ताह में पढ़ाने के घंटे की अवधि यूजीसी मानकों के अनुसार किया जाए। क्योंकि एक दिन में लगातार पांच घंटे कॉलेजों में पीजी और यूजी कक्षाएं पढ़ाना न तो व्यवहारिक है और न ही यूजीसी मानकों के अनुसार ठीक है।
यूजीसी मानकों के मुताबिक रूसा के तहत प्रत्येक प्रवक्ता को पढ़ाने की अवधि अनुसार कॉलेजों में नए पद सृजित कर उन्हें जल्द भरा जाना चाहिए ।