{"_id":"59909d8b4f1c1b4a3a8b47ed","slug":"131502649739-bilaspur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"6.5 करोड़ की अधूरी पेयजल योजना की विजिलेंस जांच शुरू","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
6.5 करोड़ की अधूरी पेयजल योजना की विजिलेंस जांच शुरू
Updated Mon, 14 Aug 2017 12:12 AM IST
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
बरमाणा (बिलासपुर)।
कोलबांध परियोजना की ओर से धौण कोठी और हरनोड़ा पंचायत के लिए 6.5 करोड़ से बनने वाली पेयजल योजना में बरती गई अनियमितताओं की विजिलेंस जांच शुरू हो गई है। इस बाबत विजिलेंस अधिकारियों ने पंचायत प्रधान को कार्यालय में आकर बयान दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं। अब इस योजना में धांधलियां बरतने वालों के खिलाफ जल्द की शिकंजा कसे जाने की उम्मीद है। आरोप हैं कि वर्ष 2008 में इस योजना को बनाने के लिए जारी किए गए पैसे का दुरुपयोग किया गया है। इस वजह से नौ वर्ष बीतने के बाद भी योजना अधूरी पड़ी है। लोगों को अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि 9 सालों में पानी की योजना के लिए आया 6.50 करोड़ गया तो गया कहां?
धौणकोठी पंचायत प्रधान सुरेंद्रपाल शर्मा का कहना है कि शुरू में दो पंचायतों को ही योजना से जोड़ा जाना था। मगर बाद में पंजगाईं पंचायत के गांव कुननू को भी इससे जोड़ने का फैसला लिया गया। मगर 9 सालों के लंबे इंतजार के बाद भी लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। आज भी योजना अधूरी है और लोग प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर हैं। मगर वो प्राकृतिक स्रोत भी एसीसी ब्लास्टिंग से सूखते जा रहे हैं। इसके कारण स्थानीय लोगों को पेयजल की कमी से जूझना पड़ रहा है। सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि साढ़े छह करोड़ की योजना से इलाके में विभाग ने पाइपें तो बिछा दी हैं। मगर किसी को पानी के कनेक्शन नहीं दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत दली पांदा में टैंक बनना था, जिससे लोगों को पेयजल सप्लाई दी जानी थी। मगर अब वह टैंक भी गिरने की कगार पर पहुंच गया है। प्रधान ने कहा कि 9 सालों से लोगों में आशा थी कि योजना से लोगों की पेयजल किल्लत दूर होगी। मगर आईपीएच विभाग ने लोगों की उस उम्मीद को भी खत्म कर दिया है। उन्होंने बताया कि जो विभाग द्वारा पाइपें बिछाई गई थी वो भी कई जगह से गायब हैं।
विज्ञापन
बरमाणा (बिलासपुर)।
कोलबांध परियोजना की ओर से धौण कोठी और हरनोड़ा पंचायत के लिए 6.5 करोड़ से बनने वाली पेयजल योजना में बरती गई अनियमितताओं की विजिलेंस जांच शुरू हो गई है। इस बाबत विजिलेंस अधिकारियों ने पंचायत प्रधान को कार्यालय में आकर बयान दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं। अब इस योजना में धांधलियां बरतने वालों के खिलाफ जल्द की शिकंजा कसे जाने की उम्मीद है। आरोप हैं कि वर्ष 2008 में इस योजना को बनाने के लिए जारी किए गए पैसे का दुरुपयोग किया गया है। इस वजह से नौ वर्ष बीतने के बाद भी योजना अधूरी पड़ी है। लोगों को अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि 9 सालों में पानी की योजना के लिए आया 6.50 करोड़ गया तो गया कहां?
धौणकोठी पंचायत प्रधान सुरेंद्रपाल शर्मा का कहना है कि शुरू में दो पंचायतों को ही योजना से जोड़ा जाना था। मगर बाद में पंजगाईं पंचायत के गांव कुननू को भी इससे जोड़ने का फैसला लिया गया। मगर 9 सालों के लंबे इंतजार के बाद भी लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। आज भी योजना अधूरी है और लोग प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर हैं। मगर वो प्राकृतिक स्रोत भी एसीसी ब्लास्टिंग से सूखते जा रहे हैं। इसके कारण स्थानीय लोगों को पेयजल की कमी से जूझना पड़ रहा है। सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि साढ़े छह करोड़ की योजना से इलाके में विभाग ने पाइपें तो बिछा दी हैं। मगर किसी को पानी के कनेक्शन नहीं दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत दली पांदा में टैंक बनना था, जिससे लोगों को पेयजल सप्लाई दी जानी थी। मगर अब वह टैंक भी गिरने की कगार पर पहुंच गया है। प्रधान ने कहा कि 9 सालों से लोगों में आशा थी कि योजना से लोगों की पेयजल किल्लत दूर होगी। मगर आईपीएच विभाग ने लोगों की उस उम्मीद को भी खत्म कर दिया है। उन्होंने बताया कि जो विभाग द्वारा पाइपें बिछाई गई थी वो भी कई जगह से गायब हैं।
विज्ञापन