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Bilaspur News: आओ बसंत मनाएं झूम-झूम कर
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-जिले के संस्कृति भवन के बैठक कक्ष में हुई गोष्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर की ओर से संस्कृति भवन के बैठक कक्ष में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी सुबह 11:00 बजे शुरू हुई। कार्यक्रम में शिवपाल गर्ग ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बीना वर्धन ने की और मंच का संचालन रचना चंदेल ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती विद्या मंदिर डियारा बिलासपुर के छात्र-छात्राओं ने मां सरस्वती की वंदना से किया। उसके बाद अमरनाथ धीमान ने इन आंंखों का क्या कसूर, कर्मवीर ने हां मैं अंधेरा हूं, पूनम शर्मा ने धुंध और धूप की धोखेबाजी में, रचना चंदेल ने बसंत, रविंद्र शर्मा ने कोई बगडी रा कोई बुग्गा रा बणदे थे, बड़ो कम्मा री चीज हूंदा था बिन्ना, जीत राम सुमन ने गंगा युमना के घाटों पे, कोई तो तिलक लगाता होगा, शिवपाल गर्ग ने जिंदगी से जिरह करता था, नहीं ये होंसला रचना प्रस्तुत की। डॉ, रविंदर ठाकुर ने आनंदित होकर झूम उठे, सुप्त प्रकृति एवं जल जीव, कुसुमोत्सव के मिलन हेतु, ऋतु सहचरी ऋतु प्रति प्रीत, सुरेंद्र मिन्हास ने खरी जेई नौकरी मिली जाओ, गांव गल्लेज हऊं इज्जत पाऊं, रामपाल डोगरा ने आओ बसंत मनाएं झूम-झूम कर, नाच नाच कर, सुशील पुंडीर ने सर्दी की ठिठुरन गई, पतझड़ गई, धुंध की वीरानी गई, लो बसंत ऋतु आई, प्रदीप गुप्ता ने आओ अपना पडोसी धर्म निभाएं, किसके घर में क्या हो रहा है,उसकी जासूसी खूब करवाएं रचना प्रस्तुत की। अनीश ठाकुर ने जिंदगी पैसे ही नहीं, जिंदगी ऐसे ही है, हुसैन अली ने मेरी तलब के तकाजे पे थोडा़ गौर तो कर ए मैं तेरे दर पे आया हूं, कई दर छोड़ के, सुषमा खजूरिया ने हम सबके राम निहारे चक्षु अभिराम, राम जन्म भूमि हम सबका स्वाभिमान, रेखा चंदेल ने अम्मा पूछदी सुन धी, मेरिये पहाड़ी गाना सुनाया। प्यारी देवी ने कितनी अच्छी है, मां तू कितनी भोली है, ओ मां रचना प्रस्तुत की। जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने सभी साहित्यकारों का धन्यवाद किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर की ओर से संस्कृति भवन के बैठक कक्ष में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी सुबह 11:00 बजे शुरू हुई। कार्यक्रम में शिवपाल गर्ग ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बीना वर्धन ने की और मंच का संचालन रचना चंदेल ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती विद्या मंदिर डियारा बिलासपुर के छात्र-छात्राओं ने मां सरस्वती की वंदना से किया। उसके बाद अमरनाथ धीमान ने इन आंंखों का क्या कसूर, कर्मवीर ने हां मैं अंधेरा हूं, पूनम शर्मा ने धुंध और धूप की धोखेबाजी में, रचना चंदेल ने बसंत, रविंद्र शर्मा ने कोई बगडी रा कोई बुग्गा रा बणदे थे, बड़ो कम्मा री चीज हूंदा था बिन्ना, जीत राम सुमन ने गंगा युमना के घाटों पे, कोई तो तिलक लगाता होगा, शिवपाल गर्ग ने जिंदगी से जिरह करता था, नहीं ये होंसला रचना प्रस्तुत की। डॉ, रविंदर ठाकुर ने आनंदित होकर झूम उठे, सुप्त प्रकृति एवं जल जीव, कुसुमोत्सव के मिलन हेतु, ऋतु सहचरी ऋतु प्रति प्रीत, सुरेंद्र मिन्हास ने खरी जेई नौकरी मिली जाओ, गांव गल्लेज हऊं इज्जत पाऊं, रामपाल डोगरा ने आओ बसंत मनाएं झूम-झूम कर, नाच नाच कर, सुशील पुंडीर ने सर्दी की ठिठुरन गई, पतझड़ गई, धुंध की वीरानी गई, लो बसंत ऋतु आई, प्रदीप गुप्ता ने आओ अपना पडोसी धर्म निभाएं, किसके घर में क्या हो रहा है,उसकी जासूसी खूब करवाएं रचना प्रस्तुत की। अनीश ठाकुर ने जिंदगी पैसे ही नहीं, जिंदगी ऐसे ही है, हुसैन अली ने मेरी तलब के तकाजे पे थोडा़ गौर तो कर ए मैं तेरे दर पे आया हूं, कई दर छोड़ के, सुषमा खजूरिया ने हम सबके राम निहारे चक्षु अभिराम, राम जन्म भूमि हम सबका स्वाभिमान, रेखा चंदेल ने अम्मा पूछदी सुन धी, मेरिये पहाड़ी गाना सुनाया। प्यारी देवी ने कितनी अच्छी है, मां तू कितनी भोली है, ओ मां रचना प्रस्तुत की। जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने सभी साहित्यकारों का धन्यवाद किया।
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