फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Application to transfer cheque bounce case from Ghumarwin rejected.

Bilaspur News: चेक बाउंस केस घुमारवीं से ट्रांसफर करने की अर्जी खारिज

Tue, 06 Oct 2026 11:31 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:31 PM IST
विज्ञापन
Application to transfer cheque bounce case from Ghumarwin rejected.
सत्र न्यायालय ने कहा- सिर्फ बचाव की अर्जी खारिज होने से पक्षपात साबित नहीं होता
विज्ञापन

हस्तलेख विशेषज्ञ से जांच की मांग ठुकराने के बाद दायर की थी स्थानांतरण अर्जी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। वर्ष 2017 से घुमारवीं की अदालत में लंबित चेक बाउंस मामले को दूसरी सक्षम अदालत में स्थानांतरित करने की मांग को बिलासपुर के सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया है। सत्र न्यायाधीश ज्योत्सना सुमंत ढढवाल ने कहा कि आवेदक ऐसा कोई ठोस आधार साबित नहीं कर सका, जिससे यह माना जाए कि घुमारवीं की अदालत में उसे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल सकती। दोनों पक्षों की साक्ष्य प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और मामला अंतिम बहस के चरण में है।
आरोपी पक्ष ने बचाव में विवादित हस्तलिपि और हस्ताक्षरों की जांच हस्तलेख विशेषज्ञ से करवाने की अर्जी दी थी। निचली अदालत ने अर्जी खारिज करते हुए दो हजार रुपये का खर्च भी लगाया। इसके बाद आरोपी पक्ष ने सत्र न्यायालय में मामला दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की।
विज्ञापन

आवेदक ने दलील दी कि हस्तलेख विशेषज्ञ से जांच की अर्जी खारिज किए जाने से उसके बचाव को नुकसान हुआ है। साथ ही आरोप लगाया कि खुले न्यायालय में यह टिप्पणी की गई कि मामला उसके खिलाफ तय किया जाएगा। अधिवक्ता के हमीरपुर की अदालतों में नियमित रूप से पेश होने के कारण तारीखों को लेकर कठिनाई होने की बात भी कही। इन आधारों पर निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताते हुए केस स्थानांतरित करने की मांग की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निचली अदालत ने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की थी। अदालत ने केवल यह कहा था कि मामला पुराना है और इसका जल्द निपटारा किया जाना जरूरी है। सत्र न्यायालय ने कहा कि सुनवाई के दौरान किसी पक्ष की अर्जी खारिज होना अपने आप में मामला स्थानांतरित करने का आधार नहीं है। निचली अदालत के आदेश से आपत्ति होने पर कानून में उपलब्ध उचित उपाय अपनाया जा सकता है। केवल अर्जी खारिज होने से अदालत के पक्षपात या निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलने की आशंका साबित नहीं होती।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed