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दादा और पोती की चिताएं जलीं एक साथ
Updated Sun, 23 Sep 2018 08:08 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शाहतलाई (बिलासपुर)। रविवार को सरयाली खड्ड किनारे दादा व पोती की दो चिताएं एक साथ जलीं। मंजर को देखकर हर किसी का दिल पसीज गया। नघ्यार पंचायत के गांव मरूडा के रहने वाले दोनों को ग्रामीणों ने नम आंखों के साथ विदाई दी।
गौरतलब है कि शनिवार शाम गांव मरूडा निवासी बाल किशन (65) अपने पोती रितिका (10) व पोते अभिषेक (8) के साथ अपनी बेटी को बड़सर में छोड़ कर अपने घर वापस आ रहे थे। गांव भालत के समीप गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने वट वृक्ष के टियाले के साथ जोर से टकरा गई। इससे बाल किशन की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे में रितिका और छोटे भाई अभिषेक को ज्यादा ही गंभीर चोटें आईं। दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद ऊना अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया लेकिन सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली रितिका ने भी ऊना अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। रितिका के पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले छोटे भाई अभिषेक को भी टांगों में चोटें आई हैं जिसका ऊना अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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ज्ञात रहे उपरोक्त परिवार के सदस्य दरकोटी में शादी समारोह के लिए गए हुए थे और वहीं से अपने परिवार के सदस्यों को छोड़ने के लिए बड़सर गए हुए थे। मृतक बाल कृष्ण दियोटसिद्ध मंदिर से बतौर पुजारी सेवानिवृत्त हुए थे। हादसे की शिकार रितिका के पिता बद्दी में प्राइवेट नौकरी करते हैं जबकि माता शालू गृहिणी है। दादा और पोती की कार एक्सीडेंट में मौत से क्षेत्र में सन्नाटा छाया हुआ है। श्मशानघाट में सैकड़ों लोगों ने हादसे में शिकार हुए दादा और पोती को नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की।
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शाहतलाई (बिलासपुर)। रविवार को सरयाली खड्ड किनारे दादा व पोती की दो चिताएं एक साथ जलीं। मंजर को देखकर हर किसी का दिल पसीज गया। नघ्यार पंचायत के गांव मरूडा के रहने वाले दोनों को ग्रामीणों ने नम आंखों के साथ विदाई दी।
गौरतलब है कि शनिवार शाम गांव मरूडा निवासी बाल किशन (65) अपने पोती रितिका (10) व पोते अभिषेक (8) के साथ अपनी बेटी को बड़सर में छोड़ कर अपने घर वापस आ रहे थे। गांव भालत के समीप गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने वट वृक्ष के टियाले के साथ जोर से टकरा गई। इससे बाल किशन की मौके पर ही मौत हो गई।
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हादसे में रितिका और छोटे भाई अभिषेक को ज्यादा ही गंभीर चोटें आईं। दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद ऊना अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया लेकिन सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली रितिका ने भी ऊना अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। रितिका के पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले छोटे भाई अभिषेक को भी टांगों में चोटें आई हैं जिसका ऊना अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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ज्ञात रहे उपरोक्त परिवार के सदस्य दरकोटी में शादी समारोह के लिए गए हुए थे और वहीं से अपने परिवार के सदस्यों को छोड़ने के लिए बड़सर गए हुए थे। मृतक बाल कृष्ण दियोटसिद्ध मंदिर से बतौर पुजारी सेवानिवृत्त हुए थे। हादसे की शिकार रितिका के पिता बद्दी में प्राइवेट नौकरी करते हैं जबकि माता शालू गृहिणी है। दादा और पोती की कार एक्सीडेंट में मौत से क्षेत्र में सन्नाटा छाया हुआ है। श्मशानघाट में सैकड़ों लोगों ने हादसे में शिकार हुए दादा और पोती को नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की।