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पढ़िए, लोगों के सवाल, रोजगार मंत्री जी के जवाब
अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 19 Nov 2013 02:28 PM IST
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उद्योग और श्रम एवं रोजगार मंत्री मुकेश अग्निहोत्री अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के लिए शिमला कार्यालय आए।
उन्होंने न केवल सरकार के एक साल के काम गिनाए, बल्कि लोगों और उद्योगपतियों की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब भी दिए। पेश हैं इसके अंश -
आप हिमाचल सरकार में अहम महकमे संभाल रहे हैं। आपकी सरकार ने औद्योगिक विकास की दशा में क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर : औद्योगिक पैकेज का जो पिछला अरसा था, उसमें 48 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट मंजूर किए गए। इनमें से केवल 17 हजार करोड़ का ही निवेश हो पाया।
यह देखने में आया है कि प्रक्रिया का सरलीकरण बेहद जरूरी है। हमने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से विचार-विमर्श के बाद 90 दिन में प्रोजेक्ट क्लीयरेंस का समय तय किया। सभी डीसी को लैंड बैंक बनाने को कहा।
हिमाचल को औद्योगिक राज्य का दर्जा दिलाने के लिए भारत सरकार के मानक कड़े हैं। इसके लिए जमीन ज्यादा मांगी जा रही है। हमने केंद्र सरकार से पहाड़ी राज्य होने के नाते इन मानकों में राहत मांगी है। ऐसा हुआ तो यह औद्योगिक विकास के लिए बड़ा कदम होगा।
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आपने औद्योगिक नीति का ड्राफ्ट जारी किया। इस पर सुझाव मांगे गए। लेकिन फाइनल पॉलिसी अभी नोटिफाई नहीं हुई। क्या कारण है?
उत्तर: उद्योग विभाग ने प्रारूप जारी किया है। इसके बाद मुख्यमंत्री और वित्त विभाग के बीच चर्चा से पॉलिसी क्लीयर होगी, क्योंकि इसमें वित्तीय मसले जुड़े हैं।
महंगी बिजली के रेट घटने का मुद्दा है। हम बिजली के रेट तो नहीं, लेकिन इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी कम कर सकते हैं। इसलिए बिजली बोर्ड भी इससे जुड़ा है।
ये मसले जल्द क्लीयर होंगे और इसके बाद विभागवार आदेश इस बारे में जारी होंगे। इससे पहले जारी हुए इंडस्ट्रियल पॉलिसी भी यह प्रक्रिया पूरी न होने के कारण लागू नहीं हो पाई थी।
कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणापत्र में उद्योगों को लेकर कई वादे किए हैं। इन्हें पूरा करने में और कितना वक्त लेंगे?
उत्तर : कांग्रेस घोषणापत्र पूरे पांच साल के लिए है।
इसकी घोषणाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा करना है। घोषणापत्र को लागू करने के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति बनाई जा चुकी है। इंडस्ट्रियल पॉलिसी से शुरुआत कर दी गई है।
कौशल विकास भत्ते में आगामी पांच साल के लिए 500 करोड़ की व्यवस्था की गई है। जो लोग इस योजना पर उंगली उठा रहे हैं, उन्होंने अपने कार्यकाल में कुछ नहीं किया। इस योजना में हम नवंबर तक 14 हजार लोगों को लाभान्वित करेंगे। मार्च तक 50 फीसदी का लक्ष्य पूरा कर लेंगे।
सीआईआई के वाइस चेयरमैन अरुण रावत चाहते हैं कि उद्योग मंत्री औद्योगिक पैकेज का स्टेटस क्लीयर करें। ये आ रहा है या नहीं? निवेशक फैसला चाहता है कि इन्सेंटिव उसे मिलेंगे या नहीं?
उत्तर: उद्योगपतियों को हमसे ज्यादा पता होता है कि पैकेज आएगा या नहीं। फिर भी हम कह सकते हैं कि हमें एक चीज मिली हुई थी, जो छीन ली गई। हम प्रयास कर रहे हैं। अब जब केंद्र सरकार के अगले बजट पर काम शुरू होगा, जब फिर प्रभावी पैरवी भारत सरकार में करेंगे।
बीबीएन उद्योग संघ के अध्यक्ष राजेंद्र गुलेरिया ने पूछा था कि हिमाचल में 17 फीसदी इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी ले रहा है। यह कई पड़ोसी राज्यों से ज्यादा है। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्जिज भी ज्यादा हैं।
सरकार क्या कोई राहत देगी?
उत्तर: प्रदेश में बिजली की दरें रेगुलेटरी कमीशन तय करता है। बिजली शुल्क की दर सरकार के हाथ में है। नई उद्योग नीति में इस पर काम किया जा रहा है। इस पर उद्योगपतियों की मांगें भी सरकार के पास आई हैं।
हिमाचल विवि के विधि विभाग के विवेक राठौर ने पूछा था कि सरकार ने घोषणा पत्र के बेरोजगारी भत्ते को कौशल विकास भत्ते में क्यों बदला?
क्या इससे ऐसा नहीं लगता है कि वोट हथियाने के लिए इसका चुनावी लाभ लिया गया। उनका अनुपूरक प्रश्न था कि क्या उच्च शिक्षण संस्थानों या विवि में पढ़ रहे छात्रों या शोधार्थियों को कौशल विकास भत्ते के दायरे में नहीं ले सकती?
उत्तर: कौशल विकास भत्ता सरकार की नई पहल है। यह बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के लिए शुरू किया है। महज भत्ता देकर युवाओं की इस पर निर्भर बनाना इसका मकसद नहीं है।
कौशल विकास के प्रशिक्षण के बाद युवाओं के स्वरोजगार के लिए 4 फीसदी ब्याज दर पर डेढ़ लाख तक के ऋण देने की व्यवस्था भी है। उच्च शिक्षा और शोध के लिए यूजीसी और केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं के तहत वित्तीय लाभ दिए जाते हैं।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष तजेंद्र गोयल का तर्क है कि औद्योगिक विकास मंदी के दौर में है और हिमाचल सरकार बिजली की दरें महंगी करती जा रही है। इससे नए उद्योग हिमाचल में आएंगे?
उत्तर: मंदी का दौर तो पूरे देश में है। हम प्रयास कर रहे हैं कि इस दौर के बावजूद हम उद्योगों को टिकाए रखने और नए उद्योगों को आमंत्रित करने के लिए कुछ बेहतर करें।
सोलन शहर के सूर्या विहार में रहने वाले रूप सिंह नेगी और ऊना से हरोली के बाथू के पूर्व प्रधान केके राणा ने सवाल किया है कि हिमाचल के उद्योगों में 70 फीसदी हिमाचलियों को रोजगार की हकीकत कुछ और है।
उत्तर: औद्योगिक विकास से रोजगार मिला है। हिमाचल के लोग कुछ ओहदों पर काम नहीं करना चाहते हैं। यह भी सच्चाई है।
बतौर श्रम एवं रोजगार मंत्री में इस बात को बेहतरी से जानता हूं। हम औद्योगिक नीति में यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि गैर तकनीकी उच्च पदों पर हिमाचलियों को 70 फीसदी रोजगार मिले। कुछ उद्योग इसका उल्लंघन कर रहे हैं। हम इसमें सख्ती भी करेंगे।
पूर्व सरकार के कार्यकाल में आवंटित सीमेंट प्लांट्स के एमओयू को जारी रखने पर सरकार ने अभी निर्णय नहीं लिया है। पांच नए सीमेंट उद्योगों ने सरकार के नोटिस पर कुछ और समय भी मांगा है। सरकार इस बारे में क्या कर रही है?
उत्तर: इन्होंने लंबे अरसे से प्रास्पेक्टिंग लाइसेंस लिए थे, पर आज तक नहीं लगे। इनका हम मूल्यांकन कर रहे हैं कि इन्होंने क्या किया? यह मामला मंत्रिमंडल में जाएगा।
हिमाचल आना चाहता है टाटा उद्योग
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पैकेज के बिना भी टाटा और वर्धमान जैसे बड़े उद्योग हिमाचल आना चाहते हैं। दोनों समूहों के लोग जल्द मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिलने आ रहे हैं।
हो सकता है हिमाचल के लिए अच्छी खबर हो। बीबीएन के बाद ऊना जिला में बाथू-बाथड़ी-टाहलीवाल नए औद्योगिक क्षेत्र के रूप में उबर रहा है। तीन जिलों में नए औद्योगिक नगर बनाएंगे।
लोकसभा चुनाव पर जो पार्टी कहे
उद्योग मंत्री ने हमीरपुर सीट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना पर कहा कि कांग्रेस के पास प्रत्याशियों की कमी नहीं है। समय आने पर यह मालूम पड़ जाएगा।
राजनीति में इच्छाएं नहीं पाली जातीं। जो पार्टी कहे, मानना पड़ता है। 2003 में बहुत से लोग ऐसे थे, जो मुझे भी कहते थे कि यह नहीं जीत सकता। आज वही लोग बेहतर मानते हैं। समय बदलता है।
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उन्होंने न केवल सरकार के एक साल के काम गिनाए, बल्कि लोगों और उद्योगपतियों की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब भी दिए। पेश हैं इसके अंश -
आप हिमाचल सरकार में अहम महकमे संभाल रहे हैं। आपकी सरकार ने औद्योगिक विकास की दशा में क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर : औद्योगिक पैकेज का जो पिछला अरसा था, उसमें 48 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट मंजूर किए गए। इनमें से केवल 17 हजार करोड़ का ही निवेश हो पाया।
यह देखने में आया है कि प्रक्रिया का सरलीकरण बेहद जरूरी है। हमने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से विचार-विमर्श के बाद 90 दिन में प्रोजेक्ट क्लीयरेंस का समय तय किया। सभी डीसी को लैंड बैंक बनाने को कहा।
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हिमाचल को औद्योगिक राज्य का दर्जा दिलाने के लिए भारत सरकार के मानक कड़े हैं। इसके लिए जमीन ज्यादा मांगी जा रही है। हमने केंद्र सरकार से पहाड़ी राज्य होने के नाते इन मानकों में राहत मांगी है। ऐसा हुआ तो यह औद्योगिक विकास के लिए बड़ा कदम होगा।
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आपने औद्योगिक नीति का ड्राफ्ट जारी किया। इस पर सुझाव मांगे गए। लेकिन फाइनल पॉलिसी अभी नोटिफाई नहीं हुई। क्या कारण है?
उत्तर: उद्योग विभाग ने प्रारूप जारी किया है। इसके बाद मुख्यमंत्री और वित्त विभाग के बीच चर्चा से पॉलिसी क्लीयर होगी, क्योंकि इसमें वित्तीय मसले जुड़े हैं।
महंगी बिजली के रेट घटने का मुद्दा है। हम बिजली के रेट तो नहीं, लेकिन इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी कम कर सकते हैं। इसलिए बिजली बोर्ड भी इससे जुड़ा है।
ये मसले जल्द क्लीयर होंगे और इसके बाद विभागवार आदेश इस बारे में जारी होंगे। इससे पहले जारी हुए इंडस्ट्रियल पॉलिसी भी यह प्रक्रिया पूरी न होने के कारण लागू नहीं हो पाई थी।
कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणापत्र में उद्योगों को लेकर कई वादे किए हैं। इन्हें पूरा करने में और कितना वक्त लेंगे?
उत्तर : कांग्रेस घोषणापत्र पूरे पांच साल के लिए है।
इसकी घोषणाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा करना है। घोषणापत्र को लागू करने के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति बनाई जा चुकी है। इंडस्ट्रियल पॉलिसी से शुरुआत कर दी गई है।
कौशल विकास भत्ते में आगामी पांच साल के लिए 500 करोड़ की व्यवस्था की गई है। जो लोग इस योजना पर उंगली उठा रहे हैं, उन्होंने अपने कार्यकाल में कुछ नहीं किया। इस योजना में हम नवंबर तक 14 हजार लोगों को लाभान्वित करेंगे। मार्च तक 50 फीसदी का लक्ष्य पूरा कर लेंगे।
सीआईआई के वाइस चेयरमैन अरुण रावत चाहते हैं कि उद्योग मंत्री औद्योगिक पैकेज का स्टेटस क्लीयर करें। ये आ रहा है या नहीं? निवेशक फैसला चाहता है कि इन्सेंटिव उसे मिलेंगे या नहीं?
उत्तर: उद्योगपतियों को हमसे ज्यादा पता होता है कि पैकेज आएगा या नहीं। फिर भी हम कह सकते हैं कि हमें एक चीज मिली हुई थी, जो छीन ली गई। हम प्रयास कर रहे हैं। अब जब केंद्र सरकार के अगले बजट पर काम शुरू होगा, जब फिर प्रभावी पैरवी भारत सरकार में करेंगे।
बीबीएन उद्योग संघ के अध्यक्ष राजेंद्र गुलेरिया ने पूछा था कि हिमाचल में 17 फीसदी इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी ले रहा है। यह कई पड़ोसी राज्यों से ज्यादा है। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्जिज भी ज्यादा हैं।
सरकार क्या कोई राहत देगी?
उत्तर: प्रदेश में बिजली की दरें रेगुलेटरी कमीशन तय करता है। बिजली शुल्क की दर सरकार के हाथ में है। नई उद्योग नीति में इस पर काम किया जा रहा है। इस पर उद्योगपतियों की मांगें भी सरकार के पास आई हैं।
हिमाचल विवि के विधि विभाग के विवेक राठौर ने पूछा था कि सरकार ने घोषणा पत्र के बेरोजगारी भत्ते को कौशल विकास भत्ते में क्यों बदला?
क्या इससे ऐसा नहीं लगता है कि वोट हथियाने के लिए इसका चुनावी लाभ लिया गया। उनका अनुपूरक प्रश्न था कि क्या उच्च शिक्षण संस्थानों या विवि में पढ़ रहे छात्रों या शोधार्थियों को कौशल विकास भत्ते के दायरे में नहीं ले सकती?
उत्तर: कौशल विकास भत्ता सरकार की नई पहल है। यह बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के लिए शुरू किया है। महज भत्ता देकर युवाओं की इस पर निर्भर बनाना इसका मकसद नहीं है।
कौशल विकास के प्रशिक्षण के बाद युवाओं के स्वरोजगार के लिए 4 फीसदी ब्याज दर पर डेढ़ लाख तक के ऋण देने की व्यवस्था भी है। उच्च शिक्षा और शोध के लिए यूजीसी और केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं के तहत वित्तीय लाभ दिए जाते हैं।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष तजेंद्र गोयल का तर्क है कि औद्योगिक विकास मंदी के दौर में है और हिमाचल सरकार बिजली की दरें महंगी करती जा रही है। इससे नए उद्योग हिमाचल में आएंगे?
उत्तर: मंदी का दौर तो पूरे देश में है। हम प्रयास कर रहे हैं कि इस दौर के बावजूद हम उद्योगों को टिकाए रखने और नए उद्योगों को आमंत्रित करने के लिए कुछ बेहतर करें।
सोलन शहर के सूर्या विहार में रहने वाले रूप सिंह नेगी और ऊना से हरोली के बाथू के पूर्व प्रधान केके राणा ने सवाल किया है कि हिमाचल के उद्योगों में 70 फीसदी हिमाचलियों को रोजगार की हकीकत कुछ और है।
उत्तर: औद्योगिक विकास से रोजगार मिला है। हिमाचल के लोग कुछ ओहदों पर काम नहीं करना चाहते हैं। यह भी सच्चाई है।
बतौर श्रम एवं रोजगार मंत्री में इस बात को बेहतरी से जानता हूं। हम औद्योगिक नीति में यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि गैर तकनीकी उच्च पदों पर हिमाचलियों को 70 फीसदी रोजगार मिले। कुछ उद्योग इसका उल्लंघन कर रहे हैं। हम इसमें सख्ती भी करेंगे।
पूर्व सरकार के कार्यकाल में आवंटित सीमेंट प्लांट्स के एमओयू को जारी रखने पर सरकार ने अभी निर्णय नहीं लिया है। पांच नए सीमेंट उद्योगों ने सरकार के नोटिस पर कुछ और समय भी मांगा है। सरकार इस बारे में क्या कर रही है?
उत्तर: इन्होंने लंबे अरसे से प्रास्पेक्टिंग लाइसेंस लिए थे, पर आज तक नहीं लगे। इनका हम मूल्यांकन कर रहे हैं कि इन्होंने क्या किया? यह मामला मंत्रिमंडल में जाएगा।
हिमाचल आना चाहता है टाटा उद्योग
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पैकेज के बिना भी टाटा और वर्धमान जैसे बड़े उद्योग हिमाचल आना चाहते हैं। दोनों समूहों के लोग जल्द मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिलने आ रहे हैं।
हो सकता है हिमाचल के लिए अच्छी खबर हो। बीबीएन के बाद ऊना जिला में बाथू-बाथड़ी-टाहलीवाल नए औद्योगिक क्षेत्र के रूप में उबर रहा है। तीन जिलों में नए औद्योगिक नगर बनाएंगे।
लोकसभा चुनाव पर जो पार्टी कहे
उद्योग मंत्री ने हमीरपुर सीट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना पर कहा कि कांग्रेस के पास प्रत्याशियों की कमी नहीं है। समय आने पर यह मालूम पड़ जाएगा।
राजनीति में इच्छाएं नहीं पाली जातीं। जो पार्टी कहे, मानना पड़ता है। 2003 में बहुत से लोग ऐसे थे, जो मुझे भी कहते थे कि यह नहीं जीत सकता। आज वही लोग बेहतर मानते हैं। समय बदलता है।