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तंग गलियों में बने पुराने भवनों से हादसे का खतरा

Sun, 31 Jul 2016 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 31 Jul 2016 12:02 AM IST
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पुराने भवन जर्जर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
जगाधरी में सौ से अधिक पुराने भवन हैं, जिनमें दर्जनों की हालत पूरी तरह जर्जर है। तंग गलियों में बने इन कंडम भवनों के बारिश के मौसम में ढहने का खतरा बना हुआ है। इनके गिरने ये बड़ा हादसा भी संभव है। म्यूनिसिपल एक्ट में जर्जर मकानों को गिराने का प्रावधान है, लेकिन नगर निगम की कार्रवाई जर्जर भवनों के मालिकों को महज नोटिस देने तक सिमटी है।
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जगाधरी में रेलवे बाजार, गोमती मोहल्ला, पटरी मोहल्ला, राजावाली गली, बैलगड़ान, लोहरान मोहल्ला, चिड़िया मंदिर रोड, सुथरिया मोहल्ला, तेलीयान गली, झिवरवाली गली और देवी भवन बाजार समेत जगाधरी में पुराने मकानों की भरमार है। अधिकांश मकान ऐसे हैं, जो 100 साल से भी ज्यादा पुराने हैं और जिनके बारिश के मौसम में कभी भी ढहने की आशंका बनी रहती है।
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बुधवार को जगाधरी के मुख्य बाजार में बुड़िया चौकी के नजदीक करनैल सिंह का 70-80 साल पुराना मकान बारिश में ढह चुका है। इससे पहले वर्ष 2010 में जगाधरी के हनुमान गेट के समीप एक पुराना मकान ढह जाने से स्कूल से लौट रही एक बच्ची की मौत हो गई थी। जबकि दो बच्चियां गंभीर रूप से घायल हो गए थी। हादसों के बावजूद नगर निगम पुराने जर्जर भवनों की अनदेखी कर रहा है।
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तंग गलियों में हैं कई दो मंजिला पुराने व जर्जर भवन
जगाधरी में कई पुराने व जर्जर भावन तंग गलियों में हैं, जहां तक पैदल या साइकिल के जरिए ही जाया जा सकता है। अगर बारिश के दिनों में इन मकानों में से कोई ढह गया, तो बचाव कार्यों में दिक्कत आना लाजमी है। इन भवनों में ज्यादातर लोग किरायेदार ही हैं, जो मकानों की जर्जर हालत से परिचित होने पर भी उन्हें दुरुस्त कराने की जहमत नहीं उठाते हैं। उधर, ऐसे मकानों के मालिक भी इस ओर बेपरवाह बने हुए हैं।

कोट्स
वार्ड नंबर-4 के पार्षद प्रमोद सेठी का कहना है कि जगाधरी में पुराने भवन जर्जर होकर कभी भी गिरने की स्थिति मे हैं। निगम को सर्वे कर चिंहित कंडम भवनों के मालिकों को नोटिस देना चाहिए। अगर फिर भी वह भवन दुरुस्त नहीं कराते हैं, तो निगम द्वारा ऐसे मकानों को गिराया जाना चाहिए।


वर्जन
ऐसे भवनों के सर्वे हेतु निर्देश दिए हैं। कंडम भवनों की पहचान की जा रही है। जल्द ही उनके मालिकों को नोटिस दिया जाएगा। अगर वह खुद भवनों को नहीं हटवाते तो नगर निगम उनके खर्च पर ही भवनों को गिराएगा।  
प्रेमचंद, ज्वाइंट कमिश्नर (जगाधरी जोन), नगर निगम
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