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Yamuna Nagar News: स्वरोजगार से परिवार को आर्थिक मजबूती दे रहीं महिलाएं
Sun, 26 Jul 2026 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 26 Jul 2026 01:20 AM IST
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पशुओं के पास मौजूद सिंद्रो देवी। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कलानौर गांव की महिलाओं ने सशक्त होने का ऐसा बीड़ा उठाया है कि आज वे किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं।स्वरोजगार को अपनाकर ये महिलाएं अपने परिवारों की आर्थिक मजबूती दे रही हैं। पशुपालन से लेकर ब्यूटी पार्लर, कपड़ा, कॉस्मेटिक और जनरल स्टोर का संचालन कर रही हैं।
गांव की कर्मजीत कौर पहले एक साधारण गृहिणी थीं। आत्मनिर्भर बनने के सपने ने उन्हें एक सफल कारोबारी बना दिया। पिछले 10 साल से वह ब्यूटी पार्लर, कॉस्मेटिक, कपड़ा और जनरल स्टोर का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में किराया ज्यादा होने के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन हार नहीं मानी। अब वह अपने घर से ही जनरल स्टोर और अन्य व्यवसाय चला रही हैं, जिससे अच्छी आमदनी हो रही है।
समूह की सदस्य अनीता और बबीता दोनों सास बहु ने मिलकर पशुपालन को अपनाया है और दूध उत्पादन से अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। इनके अलावा शोभा देवी, मोनिका, कमलेश और सिंद्रो भी सक्रिय रूप से पशुपालन से जुड़ी हुई हैं। वहीं, समूह की सदस्य कुसुम के बच्चे अभी छोटे हैं, जिस कारण वह घर पर ही रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद वह समूह की बैठकों और अन्य गतिविधियों में पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
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महिलाएं राखी महिला ग्राम संगठन के तहत सीजा समूह और नई लहर महिला कलस्टर फैडरेशन ऑफ इंडिया के माध्यम से काम कर रही है। समूह में सरोज प्रधान, कर्मजीत कौर सचिव और शीला देवी खजांची की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। सदस्यों में मोनिका, कमलेश, कुसुम, बबीता, सिंद्रो, शोभा और अनीता शामिल हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद हौसला ऐसा है कि प्रधान सरोज, खजांची शीला देवी और सदस्य कमलेश समूह के कार्यों को संभालने के साथ-साथ मजदूरी भी करती हैं ताकि परिवार को बेहतर ढंग से चलाया जा सके।
महिलाओं का कहना है कि उनके जीवन में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब उनके समूह को सरस मेला में स्टॉल लगाने का अवसर मिला। मेले में उनके उत्पादों को काफी सराहना मिली, जिससे महिलाओं का हौसला सातवें आसमान पर पहुंच गया। तब से लेकर आज तक इन महिलाओं ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है।
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यमुनानगर। कलानौर गांव की महिलाओं ने सशक्त होने का ऐसा बीड़ा उठाया है कि आज वे किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं।स्वरोजगार को अपनाकर ये महिलाएं अपने परिवारों की आर्थिक मजबूती दे रही हैं। पशुपालन से लेकर ब्यूटी पार्लर, कपड़ा, कॉस्मेटिक और जनरल स्टोर का संचालन कर रही हैं।
गांव की कर्मजीत कौर पहले एक साधारण गृहिणी थीं। आत्मनिर्भर बनने के सपने ने उन्हें एक सफल कारोबारी बना दिया। पिछले 10 साल से वह ब्यूटी पार्लर, कॉस्मेटिक, कपड़ा और जनरल स्टोर का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में किराया ज्यादा होने के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन हार नहीं मानी। अब वह अपने घर से ही जनरल स्टोर और अन्य व्यवसाय चला रही हैं, जिससे अच्छी आमदनी हो रही है।
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समूह की सदस्य अनीता और बबीता दोनों सास बहु ने मिलकर पशुपालन को अपनाया है और दूध उत्पादन से अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। इनके अलावा शोभा देवी, मोनिका, कमलेश और सिंद्रो भी सक्रिय रूप से पशुपालन से जुड़ी हुई हैं। वहीं, समूह की सदस्य कुसुम के बच्चे अभी छोटे हैं, जिस कारण वह घर पर ही रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद वह समूह की बैठकों और अन्य गतिविधियों में पूरी तरह सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
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महिलाएं राखी महिला ग्राम संगठन के तहत सीजा समूह और नई लहर महिला कलस्टर फैडरेशन ऑफ इंडिया के माध्यम से काम कर रही है। समूह में सरोज प्रधान, कर्मजीत कौर सचिव और शीला देवी खजांची की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। सदस्यों में मोनिका, कमलेश, कुसुम, बबीता, सिंद्रो, शोभा और अनीता शामिल हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद हौसला ऐसा है कि प्रधान सरोज, खजांची शीला देवी और सदस्य कमलेश समूह के कार्यों को संभालने के साथ-साथ मजदूरी भी करती हैं ताकि परिवार को बेहतर ढंग से चलाया जा सके।
महिलाओं का कहना है कि उनके जीवन में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब उनके समूह को सरस मेला में स्टॉल लगाने का अवसर मिला। मेले में उनके उत्पादों को काफी सराहना मिली, जिससे महिलाओं का हौसला सातवें आसमान पर पहुंच गया। तब से लेकर आज तक इन महिलाओं ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है।

पशुओं के पास मौजूद सिंद्रो देवी। स्वयं