फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   Wife fulfilling resolve of her husband to held daily bhandara in Yamunanagar

उम्मीद की मशाल: हर दिन लगे भंडारा...पति की मौत के बाद पत्नी कर रही संकल्प पूरा

Sun, 12 Jun 2022 07:18 PM IST
भूपेंद्र सिंह राहुल शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा)
राहुल शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 12 Jun 2022 07:18 PM IST
सार

यमुनानगर में रेलवे रोड पर श्रीगीता भवन मंदिर में साढ़े सात साल से रोज दोपहर में भंडारा लगता है। जितेंद्र शर्मा ने 6 नवंबर 2014 से शुरुआत की थी, लेकिन 26 मार्च 2021 में देहांत हो गया। जितेंद्र की मौत पर पत्नी सीमा ने कमान संभाली और एक दिन भी भंडारा नहीं रुकने दिया।

विज्ञापन
Wife fulfilling resolve of her husband to held daily bhandara in Yamunanagar
रेलवे रोड स्थित श्रीगीता भवन मंदिर में भंडारे के लिए खाना तैयार करतीं महिलाएं। सीमा शर्मा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हर दिन भंडारा लगे....ऐसा संकल्प लाल द्वारा के जितेंद्र शर्मा का था। हरियाणा के यमुनानगर में जिन्होंने रेलवे रोड स्थित श्रीगीता भवन मंदिर में 6 नवंबर 2014 में भंडारे की सेवा शुरू की, पर सवा छह साल बाद 26 मार्च 2021 को उनका देहांत हो गया। बावजूद इसके हर दिन भंडारे का संकल्प अधूरा नहीं है, क्योंकि इसे जितेंद्र की पत्नी सीमा पूरा कर रही हैं।

विज्ञापन


सीमा ने पति जितेंद्र की मौत के बाद एक भी दिन भंडारा रुकने नहीं दिया। जितेंद्र के सेवाभाव को यादकर उनकी मौत के बाद लगातार दानी-सज्जन भंडारे की सेवा में मदद कर रहे हैं, वहीं काफी लोग अपनी ओर से भी भंडारा देने को बुकिंग कराने लगे है। 
विज्ञापन


ऐसे हुई सेवा की शुरुआत
लालद्वारा के जितेंद्र शर्मा ने छह नवंबर 2014 को श्रीगुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव से रेलवे रोड स्थित श्रीगीता भवन मंदिर में भंडारे की सेवा शुरू की। पत्नी सीमा शर्मा बताती हैं कि मंदिर के सामने गुरुद्वारा साहिब है, जहां 6 नवंबर को पति जितेंद्र शर्मा गए। वहां लंगर सेवा देख मंदिर में हर दिन भंडारे की सेवा शुरू करने का संकल्प लिया। सीमा ने बताया कि जितेंद्र उनसे कुुछ पैसे लेकर चावल, घी और चने की दाल लाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


मंदिर के पास ही उन्हें नेपाल का बहादुर नाम का युवक मिला। बहादुर व जितेंद्र ने मिलकर चावल, घी व चने की दाल की खिचड़ी बनाई और उसे मंदिर के पास दुकानदारों व राहगीरों में बांटने लगे। दुकानदारों ने वजह पूछी, तब जितेंद्र ने बताया कि मंदिर में भंडारे की सेवा शुरू कर रहे हैं। इसके अगले दिन मंदिर परिसर में 30 लोगों से भंडारे की सेवा शुरू की। भंडारे में खाना खाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। कोरोना काल में भी भंडारे का खाना पैकिंग में जरूरतमंदों तक पहुंचाया। 

रोज पहुंचते 400-500 लोग, 70 किलो आटे व 20-25 किलो दाल-सब्जी खपत 
सीमा बताती हैं हर दिन मंदिर में लग रहे भंडारे में खाना खाने 400-500 लोग पहुंचते हैं। इनके लिए खाना बनाने को पेड वर्कर्स हैं। रोज करीब 70 किलो आटा व 20-25 किलो दाल-सब्जी की खपत होती है। दाल, रोटी व सब्जी के अलावा पूड़ी बने तो आटे की खपत बढ़ जाती है।


चावल परोसे जाने पर आटे की खपत कम हो जाती है। चावल की भी 35-40 किलो की खपत हो जाती है। गर्मियों में खाने के साथ लस्सी और सर्दियों में सुबह के समय चाय-बिस्किट दिए जाते हैं। इसके अलावा मंदिर में लोग मिठाई व फल भी दे जाते हैं, जिसे भंडारे में परोसा जाता है। जन्मदिन, बरसी व अन्य मौकों पर लोग अपनी ओर से भंडारे देने का बुकिंग कराते हैं। सेवा में कमेटी में उपप्रधान संजीव भार्गव, चेयरपर्सन डॉ. ऊषा डीडी सहित जिलेभर से दानी-सज्जनों का सहयोग है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed