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Yamuna Nagar News: त्रिलोकपुर में तीन देवियों का धाम, दर्शनों से बनते बिगड़े काम
Tue, 08 Oct 2024 05:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 08 Oct 2024 05:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले के साथ हिमाचल प्रदेश की सीमा पर सिरमौर जिले के त्रिलोकपुर स्थित मां बाला सुंदरी मंदिर नवरात्र में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। तीन देवियों के धाम त्रिलोकपुर में जिले से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शनों व पूजन के लिए जा रहे हैं। मां बाला सुंदरी जिले के हजारों लोगों की कुलदेवी हैं, इसलिए हर साल नवरात्र पर मां के दर्शनों के लिए जिले से हजारों लोग त्रिलोकपुर जाते हैं।
त्रिलोकपुर में बाला सुंदरी के साथ ललिता व त्रिपुर भैरवी के भी भव्य मंदिर हैं। ऐसी मान्यता है कि जो कोई भी यहां तीनों देवियों के दर्शन कर लेता है, उसके बिगड़े काम बनते हैं। त्रिलोकपुर के मां बाला सुंदरी मंदिर की स्थापना को लेकर मान्यता है कि करीब 450 वर्ष पूर्व यहां रामदास नाम का धार्मिक प्रवृत्ति का वैश्य रहता था, जिसने उस समय क्षेत्र में नमक को कमी देख उत्तरप्रदेश के देवबंद से नमक लाकर यहां बेचने का कारोबार किया।
रामदास को एक बार महसूस हुआ कि वह जितना नमक लाया था, उससे कहीं अधिक बेचने के बाद भी नमक का गोदाम खाली नहीं हो रहा है। उसी रात मां बाला सुंदरी ने उसे स्वप्न में दर्शन देकर बताया कि मैं पिंडी रूप में तुम्हारे नमक में विराजमान हूं और तुम मंदिर बनाकर इस पिंडी को स्थापित करो।
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यही स्वप्न उस रात सिरमौर रियासत के तत्कालीन राजा प्रदीप प्रकाश को भी आया। मां के आदेश पर राजा ने इसी स्थान पर माता का भव्य मंदिर बनवाकर मां की पिंडी की स्थापना की। इस मंदिर की स्थापना से लेकर अब तक लाला रामदास के वंशज ही माता की पूजा, आरती व अन्य सेवा कार्य कर रहे हैं।
त्रिलोकपुर में शिवालिक की शांत व प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पहाड़ियों के बीच महामाया मां बाला सुंदरी का मंदिर है। ऐसा माना गया है कि यहां मां के दर्शनों से सभी प्रकार के विकार लुप्त हो जाते हैं और मन शांत होता है। त्रिलोकपुर के पूर्व में दो मील दूर ललिता देवी का हजारों वर्ष पुराना मंदिर है। इसके पास ही बाणगंगा नाम का प्राकृतिक झरना है।
त्रिलोकपुर के पश्चिमोत्तर में आठ मील दूर त्रिपुर भैरवी का मंदिर है। ललिता देवी व त्रिपुर भैरवी के मंदिरों में स्थानीय लोग दूध, मक्खन व अनाज का प्रसाद चढ़ाकर अपने अन्न-धन, पशु व परिवार को सभी प्रकार की संकट व बाधाओं से रक्षा करने की मन्नत मांगते हैं। इस प्रकार तीन देवियों के इस स्थान पर वास होने के कारण ही इस जगह को त्रिलोकपुर के नाम से जाना जाता है।
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यमुनानगर। जिले के साथ हिमाचल प्रदेश की सीमा पर सिरमौर जिले के त्रिलोकपुर स्थित मां बाला सुंदरी मंदिर नवरात्र में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। तीन देवियों के धाम त्रिलोकपुर में जिले से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शनों व पूजन के लिए जा रहे हैं। मां बाला सुंदरी जिले के हजारों लोगों की कुलदेवी हैं, इसलिए हर साल नवरात्र पर मां के दर्शनों के लिए जिले से हजारों लोग त्रिलोकपुर जाते हैं।
त्रिलोकपुर में बाला सुंदरी के साथ ललिता व त्रिपुर भैरवी के भी भव्य मंदिर हैं। ऐसी मान्यता है कि जो कोई भी यहां तीनों देवियों के दर्शन कर लेता है, उसके बिगड़े काम बनते हैं। त्रिलोकपुर के मां बाला सुंदरी मंदिर की स्थापना को लेकर मान्यता है कि करीब 450 वर्ष पूर्व यहां रामदास नाम का धार्मिक प्रवृत्ति का वैश्य रहता था, जिसने उस समय क्षेत्र में नमक को कमी देख उत्तरप्रदेश के देवबंद से नमक लाकर यहां बेचने का कारोबार किया।
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रामदास को एक बार महसूस हुआ कि वह जितना नमक लाया था, उससे कहीं अधिक बेचने के बाद भी नमक का गोदाम खाली नहीं हो रहा है। उसी रात मां बाला सुंदरी ने उसे स्वप्न में दर्शन देकर बताया कि मैं पिंडी रूप में तुम्हारे नमक में विराजमान हूं और तुम मंदिर बनाकर इस पिंडी को स्थापित करो।
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यही स्वप्न उस रात सिरमौर रियासत के तत्कालीन राजा प्रदीप प्रकाश को भी आया। मां के आदेश पर राजा ने इसी स्थान पर माता का भव्य मंदिर बनवाकर मां की पिंडी की स्थापना की। इस मंदिर की स्थापना से लेकर अब तक लाला रामदास के वंशज ही माता की पूजा, आरती व अन्य सेवा कार्य कर रहे हैं।
त्रिलोकपुर में शिवालिक की शांत व प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पहाड़ियों के बीच महामाया मां बाला सुंदरी का मंदिर है। ऐसा माना गया है कि यहां मां के दर्शनों से सभी प्रकार के विकार लुप्त हो जाते हैं और मन शांत होता है। त्रिलोकपुर के पूर्व में दो मील दूर ललिता देवी का हजारों वर्ष पुराना मंदिर है। इसके पास ही बाणगंगा नाम का प्राकृतिक झरना है।
त्रिलोकपुर के पश्चिमोत्तर में आठ मील दूर त्रिपुर भैरवी का मंदिर है। ललिता देवी व त्रिपुर भैरवी के मंदिरों में स्थानीय लोग दूध, मक्खन व अनाज का प्रसाद चढ़ाकर अपने अन्न-धन, पशु व परिवार को सभी प्रकार की संकट व बाधाओं से रक्षा करने की मन्नत मांगते हैं। इस प्रकार तीन देवियों के इस स्थान पर वास होने के कारण ही इस जगह को त्रिलोकपुर के नाम से जाना जाता है।