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Yamuna Nagar News: जिले में सात सरकारी काॅलेज, तीन के पास भवन नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एक तरफ जहां उच्चतर शिक्षा की तरफ छात्र-छात्राओं का रुझान कम हो रहा है, तो वहीं उच्चतर शिक्षा के सरकारी शिक्षण संस्थानों के प्रति सरकार का ध्यान भी कम ही दिखाई दे रहा है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि कैथल जिले में पिछले कुछ वर्षों में सरकारी कॉलेजों की संख्या भले ही बढ़ी हो, लेकिन उनमें संसाधनों की भारी कमी है।
जिले में सरकारी कॉलेजों की संख्या कुल सात है, लेकिन हालत ये है कि तीन कॉलेजों के पास तो अपना भवन तक नहीं है। इन तीन कॉलेजों की कक्षाएं स्कूल की इमारतों में संचालित की जा रही हैं। ऐसे में कॉलेज में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
कहीं प्राथमिक स्कूलों के कमरों में स्नातक की पढ़ाई कराई जा रही है, तो कहीं आधे अधूरे ढांचे में छात्रों का भविष्य टिका है। स्टाफ और फर्नीचर की कमी के अलावा कैथल के कॉलेजों में कई प्रोफेसरों के पद भी रिक्त हैं। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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वहीं कैथल में बन रही महर्षि वाल्मीकि संस्कृत यूनिवर्सिटी की घोषणा तो साल 2015 में कर दी गई थी, लेकिन इस यूनिवर्सिटी का भवन अभी भी निर्माणाधीन है। यूनिवर्सिटी की कक्षाएं ढांड रोड पर किसी अन्य संस्थान की बिल्डिंग में चल रही है।
जबकि यूनिवर्सिटी की प्रशासनिक ईकाई डॉ. भीम राव अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय में बैठती है। ऐसे में छात्र-छात्राओं के साथ प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
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कैथल। एक तरफ जहां उच्चतर शिक्षा की तरफ छात्र-छात्राओं का रुझान कम हो रहा है, तो वहीं उच्चतर शिक्षा के सरकारी शिक्षण संस्थानों के प्रति सरकार का ध्यान भी कम ही दिखाई दे रहा है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि कैथल जिले में पिछले कुछ वर्षों में सरकारी कॉलेजों की संख्या भले ही बढ़ी हो, लेकिन उनमें संसाधनों की भारी कमी है।
जिले में सरकारी कॉलेजों की संख्या कुल सात है, लेकिन हालत ये है कि तीन कॉलेजों के पास तो अपना भवन तक नहीं है। इन तीन कॉलेजों की कक्षाएं स्कूल की इमारतों में संचालित की जा रही हैं। ऐसे में कॉलेज में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
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कहीं प्राथमिक स्कूलों के कमरों में स्नातक की पढ़ाई कराई जा रही है, तो कहीं आधे अधूरे ढांचे में छात्रों का भविष्य टिका है। स्टाफ और फर्नीचर की कमी के अलावा कैथल के कॉलेजों में कई प्रोफेसरों के पद भी रिक्त हैं। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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वहीं कैथल में बन रही महर्षि वाल्मीकि संस्कृत यूनिवर्सिटी की घोषणा तो साल 2015 में कर दी गई थी, लेकिन इस यूनिवर्सिटी का भवन अभी भी निर्माणाधीन है। यूनिवर्सिटी की कक्षाएं ढांड रोड पर किसी अन्य संस्थान की बिल्डिंग में चल रही है।
जबकि यूनिवर्सिटी की प्रशासनिक ईकाई डॉ. भीम राव अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय में बैठती है। ऐसे में छात्र-छात्राओं के साथ प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहा है।