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Yamuna Nagar News: युवाओं की नसों में घुल रहा नशे का जहर
Thu, 26 Jun 2025 03:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 26 Jun 2025 03:07 AM IST
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यमुनानगर। 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य यही है कि लोग नशे की लत को छोड़ें। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग से लेकर एनजीओ तक लोगों को जागरूक भी कर रही हैं। जिस तरह से नशा तस्करी बढ़ रही है उससे नशा छोड़ने वालों की डगर इतनी आसान भी नहीं है। 2022 से अब तक जिले में करीब 650 नशा तस्कर पकड़े गए हैं।
स्मैक, अफीम, गांजा व नशीली दवाइयां युवाओं की नसों में जहर घोल रही हैं। हालांकि पुलिस समय-समय पर नशा तस्करों को पकड़ती रहती है। बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ व दवाइयां भी यमुनानगर पुलिस ने बरामद की हैं। तस्कर जेल से छूटने के बाद फिर से नशा बेचना शुरू कर देते हैं। नशे की जरूरत को पूरा करने के लिए कहीं न कहीं युवा अपराध की तरफ भी बढ़ रहे हैं। जिला पुलिस अब खेलाें के माध्यम से युवाओं को नशे से बचाने का प्रयास कर रही है।
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बीच में छूट गया पुलिस का अभियान:
तीन साल पहल जिले के तत्कालीन एसपी कमलदीप गोयल के समय में युवाओं को नशे की दलदल से बाहर निकालने के लिए विशेष अभियान शुरू हुआ था। हमीदा, जम्मू कॉलोनी, कैंप, आजाद नगर समेत कई जगहों से नशा करने वाले 501 युवाओं की पहचान की गई थी। इनका उपचार जिला नागरिक अस्पताल से कराया गया था। बकायदा पुलिस की बस में बिठाकर सभी को अस्पताल ले जाकर उन्हें दवाई दिलाई जाती थी। फिर उन्हें वापस छोड़ दिया जाता था। इसके लिए हमीदा निवासी सुरेंद्र मदान, डॉ. सतीश लोहट, फतेह सिंह गिल, राम सिंह कांबोज, हाशिम नंबरदार व अन्य ने पुलिस को विशेष सहयोग किया। इन लोगों ने जीने की राह नाम से एनजीओ भी बनाई। अध्यक्ष सुरेंद्र मदान ने बताया कि एसपी का ट्रांसफर होते ही बाद में किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। बस सेवा बंद करने तो कभी पूरी दवाई न मिलने के कारण युवाओं का उपचार पूरा नहीं हो पाया। इसलिए वह फिर से नशे के आदि हो गए। मेडिकल स्टोर पर सरेआम नशे के कैप्सूल मिल जाते हैं। कई बार युवाओं को अस्पताल से पूरी दवाई नहीं मिलती और वह बाहर से खरीदनी पड़ती है।
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चार साल में बरामद हुए नशीले पदार्थ
वर्ष 2022 में कुल 171 केस दर्ज हुए, जिनमें आरोपियों से 11.528 किलो अफीम, 1.816 किलो चरस, 187.50 ग्राम हेरोइन, 65.634 किलो गांजा व 36,523 नशीली दवाइयां पकड़ी गई। वर्ष 2023 में कुल 87 केस दर्ज हुए, जिनमें आरोपियों से 78.16 ग्राम अफीम, 10.04 ग्राम चरस, 2.728 किलो हेरोइन, 12.300 किलो गांजा व 88,856 नशीली दवाइयां पकड़ी गई। वर्ष 2024 में कुल 80 केस दर्ज हुए, जिनमें आरोपियों से 4.621 किलो अफीम, 24.24 ग्राम चरस, 1.600 किलो हेरोइन, 11.271 किलो गांजा व 2, 96,241 नशीली दवाइयां पकड़ी गई। इस साल 2025 में 17 जून तक कुल 52 केस दर्ज हुए, जिनमें 106 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से 7.108 किलो अफीम, 3.212 किलो चरस, 1.298 किलो हेरोइन, 7.148 किलो गांजा, 51.480 किलो चूरापोस्त, 6594 नशीली दवाइयां पकड़ी। इनके अलावा इस साल 4.714 किलो अफीम के पौधे भी बरामद किए गए।
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15 बेड का नशा मुक्ति केंद्र है: डॉ. बुलबुल
उप सिविल सर्जन डॉ. बुलबुल कटारिया ने बताया कि जिला नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग का 15 बेड का नशा मुक्ति केंद्र भी है। जिसमें नशा छोड़ने वालों का उपचार चल रहा है। लोगों का नशा व तंबाकू की लत छुड़ाने के लिए सालभर जागरूकता कार्यक्रम किए जाते हैं। खासकर स्कूल, कॉलेजों में ताकि कम उम्र से ही युवाओं को नशे की चपेट में आने से रोका जा सके। 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर भी जागरूकता कार्यक्रम किए जाएंगे।
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स्मैक, अफीम, गांजा व नशीली दवाइयां युवाओं की नसों में जहर घोल रही हैं। हालांकि पुलिस समय-समय पर नशा तस्करों को पकड़ती रहती है। बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ व दवाइयां भी यमुनानगर पुलिस ने बरामद की हैं। तस्कर जेल से छूटने के बाद फिर से नशा बेचना शुरू कर देते हैं। नशे की जरूरत को पूरा करने के लिए कहीं न कहीं युवा अपराध की तरफ भी बढ़ रहे हैं। जिला पुलिस अब खेलाें के माध्यम से युवाओं को नशे से बचाने का प्रयास कर रही है।
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बीच में छूट गया पुलिस का अभियान:
तीन साल पहल जिले के तत्कालीन एसपी कमलदीप गोयल के समय में युवाओं को नशे की दलदल से बाहर निकालने के लिए विशेष अभियान शुरू हुआ था। हमीदा, जम्मू कॉलोनी, कैंप, आजाद नगर समेत कई जगहों से नशा करने वाले 501 युवाओं की पहचान की गई थी। इनका उपचार जिला नागरिक अस्पताल से कराया गया था। बकायदा पुलिस की बस में बिठाकर सभी को अस्पताल ले जाकर उन्हें दवाई दिलाई जाती थी। फिर उन्हें वापस छोड़ दिया जाता था। इसके लिए हमीदा निवासी सुरेंद्र मदान, डॉ. सतीश लोहट, फतेह सिंह गिल, राम सिंह कांबोज, हाशिम नंबरदार व अन्य ने पुलिस को विशेष सहयोग किया। इन लोगों ने जीने की राह नाम से एनजीओ भी बनाई। अध्यक्ष सुरेंद्र मदान ने बताया कि एसपी का ट्रांसफर होते ही बाद में किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। बस सेवा बंद करने तो कभी पूरी दवाई न मिलने के कारण युवाओं का उपचार पूरा नहीं हो पाया। इसलिए वह फिर से नशे के आदि हो गए। मेडिकल स्टोर पर सरेआम नशे के कैप्सूल मिल जाते हैं। कई बार युवाओं को अस्पताल से पूरी दवाई नहीं मिलती और वह बाहर से खरीदनी पड़ती है।
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चार साल में बरामद हुए नशीले पदार्थ
वर्ष 2022 में कुल 171 केस दर्ज हुए, जिनमें आरोपियों से 11.528 किलो अफीम, 1.816 किलो चरस, 187.50 ग्राम हेरोइन, 65.634 किलो गांजा व 36,523 नशीली दवाइयां पकड़ी गई। वर्ष 2023 में कुल 87 केस दर्ज हुए, जिनमें आरोपियों से 78.16 ग्राम अफीम, 10.04 ग्राम चरस, 2.728 किलो हेरोइन, 12.300 किलो गांजा व 88,856 नशीली दवाइयां पकड़ी गई। वर्ष 2024 में कुल 80 केस दर्ज हुए, जिनमें आरोपियों से 4.621 किलो अफीम, 24.24 ग्राम चरस, 1.600 किलो हेरोइन, 11.271 किलो गांजा व 2, 96,241 नशीली दवाइयां पकड़ी गई। इस साल 2025 में 17 जून तक कुल 52 केस दर्ज हुए, जिनमें 106 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से 7.108 किलो अफीम, 3.212 किलो चरस, 1.298 किलो हेरोइन, 7.148 किलो गांजा, 51.480 किलो चूरापोस्त, 6594 नशीली दवाइयां पकड़ी। इनके अलावा इस साल 4.714 किलो अफीम के पौधे भी बरामद किए गए।
15 बेड का नशा मुक्ति केंद्र है: डॉ. बुलबुल
उप सिविल सर्जन डॉ. बुलबुल कटारिया ने बताया कि जिला नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग का 15 बेड का नशा मुक्ति केंद्र भी है। जिसमें नशा छोड़ने वालों का उपचार चल रहा है। लोगों का नशा व तंबाकू की लत छुड़ाने के लिए सालभर जागरूकता कार्यक्रम किए जाते हैं। खासकर स्कूल, कॉलेजों में ताकि कम उम्र से ही युवाओं को नशे की चपेट में आने से रोका जा सके। 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर भी जागरूकता कार्यक्रम किए जाएंगे।