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Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं को बताया जीव मुक्ति का महत्व
Wed, 20 May 2026 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 20 May 2026 12:51 AM IST
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व्यासपुर में कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। खेड़ा मंदिर लंगर हाल में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ सोमवार को हो गया। कथा प्रतिदिन शाम सात से दस बजे तक होगी। वृंदावन से आए स्वामी श्यामानंद महाराज ने पहले दिन श्रद्धालुओं को जीव मुक्ति और अध्यात्म का महत्व बताया।
कथा से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भगवान की लीला श्रवण में लीन नजर आए। स्वामी श्यामानंद ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर परमात्मा की एक पवित्र ज्योत विद्यमान है।
जब तक यह ज्योत शरीर में रहती है, तब तक शरीर सुंदर और जीवंत दिखाई देता है, लेकिन जैसे ही यह ज्योत निकल जाती है, शरीर निर्जीव हो जाता है। मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य अच्छे कर्म करना, धर्म के मार्ग पर चलना और प्रभु भक्ति में मन लगाना है।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने गृहस्थ जीवन को मर्यादा और प्रेमपूर्वक निभाना चाहिए। परिवार और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए प्रभु का सिमरन करना ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म से जुड़कर ही मनुष्य सच्ची शांति और मुक्ति प्राप्त कर सकता है। इस दौरान कथा स्थल आकर्षक ढंग से सजाया गया और श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।
महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण का आनंद लिया। कथा विराम पर श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान सरपंच कीर्ति खुराना, अनुकृति खुराना, पंकुश खुराना, पंच संदीप कुमार, जगदीश अरोड़ा, दीपक अरोड़ा, डॉ. सुभाष, अशोक धीमान, राजकुमार वर्मा, अरुण सैनी, राजू मंगला, लवली झांब सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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व्यासपुर। खेड़ा मंदिर लंगर हाल में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ सोमवार को हो गया। कथा प्रतिदिन शाम सात से दस बजे तक होगी। वृंदावन से आए स्वामी श्यामानंद महाराज ने पहले दिन श्रद्धालुओं को जीव मुक्ति और अध्यात्म का महत्व बताया।
कथा से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भगवान की लीला श्रवण में लीन नजर आए। स्वामी श्यामानंद ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर परमात्मा की एक पवित्र ज्योत विद्यमान है।
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जब तक यह ज्योत शरीर में रहती है, तब तक शरीर सुंदर और जीवंत दिखाई देता है, लेकिन जैसे ही यह ज्योत निकल जाती है, शरीर निर्जीव हो जाता है। मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य अच्छे कर्म करना, धर्म के मार्ग पर चलना और प्रभु भक्ति में मन लगाना है।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने गृहस्थ जीवन को मर्यादा और प्रेमपूर्वक निभाना चाहिए। परिवार और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए प्रभु का सिमरन करना ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म से जुड़कर ही मनुष्य सच्ची शांति और मुक्ति प्राप्त कर सकता है। इस दौरान कथा स्थल आकर्षक ढंग से सजाया गया और श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।
महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण का आनंद लिया। कथा विराम पर श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान सरपंच कीर्ति खुराना, अनुकृति खुराना, पंकुश खुराना, पंच संदीप कुमार, जगदीश अरोड़ा, दीपक अरोड़ा, डॉ. सुभाष, अशोक धीमान, राजकुमार वर्मा, अरुण सैनी, राजू मंगला, लवली झांब सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।