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Yamuna Nagar News: आयोग ने बीमा कंपनी को मुआवजा देने का दिया आदेश
Tue, 17 Mar 2026 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 17 Mar 2026 01:06 AM IST
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यमुनानगर। यमुनानगर जिले में एक वाहन मालिक को मुआवजे के लिए चार साल तक न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा। अब जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी और डीलर को सेवा में कमी का दोषी माना और मुआवजा देने का आदेश दिया।
छछरौली क्षेत्र के पहाड़ी गेट निवासी 59 वर्षीय मुकेश कुमार ने आयोग को शिकायत दी थी कि उन्होंने 10 अगस्त 2020 को पास्को मोटर्स से टाटा इंट्रा वी-30 वाहन करीब 6.91 लाख रुपये में खरीदा था। वाहन खरीदते समय डीलर ने भरोसा दिलाया था कि वाहन का बीमा भी उनकी ओर से करवाया जाएगा और उससे संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी जाएंगी।शिकायतकर्ता के अनुसार शुरुआती दो वर्षों तक वाहन का बीमा उसी प्रक्रिया से होता रहा। अगस्त 2022 में बीमा नवीनीकरण का समय आने पर कंपनी के एजेंट ने उनके घर आकर 29,500 रुपये नकद प्रीमियम ले लिया और जल्द बीमा कवर नोट देने का भरोसा दिया। कुछ समय बाद उन्हें यह भी बताया गया कि वाहन का बीमा हो चुका है, लेकिन उन्हें बीमा के दस्तावेज नहीं दिए गए। 31 अक्तूबर 2022 को उन्हें बीमा कंपनी की ओर से एक पत्र मिला, जिससे पता चला कि उनकी वाहन बीमा पॉलिसी 22 अगस्त 2022 से ही रद्द कर दी गई थी। पॉलिसी रद्द होने के कारण उन्हें वाहन चलाने में भी परेशानी हुई और अंततः 27 दिसंबर 2022 को दूसरी बीमा कंपनी से नया बीमा करवाना पड़ा, जिस पर 27,738 रुपये खर्च हुए। आयोग ने अपने आदेश में पास्को मोटर्स को निर्देश दिया कि वह 23,086 रुपये की प्रीमियम राशि शिकायतकर्ता को लौटाए और इस पर शिकायत दर्ज होने की तारीख से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दे। इसके अलावा मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए 5,500 रुपये देने का आदेश दिया गया। वहीं बीमा कंपनी को भी शिकायतकर्ता को 11,000 रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने कहा कि यह राशि 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी, अन्यथा पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना पड़ेगा। संवाद
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छछरौली क्षेत्र के पहाड़ी गेट निवासी 59 वर्षीय मुकेश कुमार ने आयोग को शिकायत दी थी कि उन्होंने 10 अगस्त 2020 को पास्को मोटर्स से टाटा इंट्रा वी-30 वाहन करीब 6.91 लाख रुपये में खरीदा था। वाहन खरीदते समय डीलर ने भरोसा दिलाया था कि वाहन का बीमा भी उनकी ओर से करवाया जाएगा और उससे संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी जाएंगी।शिकायतकर्ता के अनुसार शुरुआती दो वर्षों तक वाहन का बीमा उसी प्रक्रिया से होता रहा। अगस्त 2022 में बीमा नवीनीकरण का समय आने पर कंपनी के एजेंट ने उनके घर आकर 29,500 रुपये नकद प्रीमियम ले लिया और जल्द बीमा कवर नोट देने का भरोसा दिया। कुछ समय बाद उन्हें यह भी बताया गया कि वाहन का बीमा हो चुका है, लेकिन उन्हें बीमा के दस्तावेज नहीं दिए गए। 31 अक्तूबर 2022 को उन्हें बीमा कंपनी की ओर से एक पत्र मिला, जिससे पता चला कि उनकी वाहन बीमा पॉलिसी 22 अगस्त 2022 से ही रद्द कर दी गई थी। पॉलिसी रद्द होने के कारण उन्हें वाहन चलाने में भी परेशानी हुई और अंततः 27 दिसंबर 2022 को दूसरी बीमा कंपनी से नया बीमा करवाना पड़ा, जिस पर 27,738 रुपये खर्च हुए। आयोग ने अपने आदेश में पास्को मोटर्स को निर्देश दिया कि वह 23,086 रुपये की प्रीमियम राशि शिकायतकर्ता को लौटाए और इस पर शिकायत दर्ज होने की तारीख से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दे। इसके अलावा मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए 5,500 रुपये देने का आदेश दिया गया। वहीं बीमा कंपनी को भी शिकायतकर्ता को 11,000 रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने कहा कि यह राशि 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी, अन्यथा पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना पड़ेगा। संवाद
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