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हिंदी को अपनाने से देश में एकता और मजबूती आएगी
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-रमन शर्मा, प्रिंसिपल , डीएसवी स्कूल रादौर
- फोटो : Yamuna Nagar
देश की मातृभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार की हर पहल महत्वपूर्ण है। अमर उजाला के अभियान ‘हिंदी हैं हम’ को भी जानकार कई मायनों में अहम बता रहे हैं। शहरवासियों के अनुसार यह पहल जन-जन तक पहुंचे, इसके लिए बच्चों, युवाओं से लेकर बुजुर्गों को इससे जुड़ना चाहिए। यह साझा संकल्प है, जिसमें हर वर्ग को शामिल होकर सार्थक बनाना चाहिए।
कोट्स
-धीरे-धीरे युवा समझने लगे हैं कि जिंदगी केवल नौकरी तक सीमित नहीं है। हो सकता है कि खास अंदाज में अंग्रेजी बोलकर आपको कॉल सेंटर आदि में नौकरी मिल जाए पर हिंदी आपकी सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक जरूरतों को पूरा करती है। रोजगार की दृष्टि से भी देखा जाए तो हिंदी में नए-नए अवसर मिल रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि हम सभी इन मौकों और मातृभाषा का सम्मान करें। हिंदी को अपनाने से देश में एकता और मजबूती आएगी।-रमन शर्मा, प्रिंसिपल, डीएसवी स्कूल रादौर
-संकोच तब तक रहता है जब तक कि आप आत्मविश्वास के साथ हिंदी में खुद को प्रस्तुत नहीं करते। जब आप ऐसा करते हैं तो आपको हिंदी और अपनी ताकत का पता चलता है। बड़ी तादाद में युवा हिंदी की दम पर अलग-अलग क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। हमारी जड़ें हिंदी में हैं। हमें कभी उनसे अलग नहीं होना चाहिए।- बच्चे को उसी की भाषा में पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि वह जो पढ़े उसे सही ढंग से आगे भी पहुंचा सके।-डॉ. अंजना तलूजा, शाखा प्रबंधन, परिवार नियोजन एसोसिएशन
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-आज हर जगह अंग्रेजी का प्रभुत्व अधिक है, लेकिन यह हम पर थोपी गई है। जो भाषा हम बचपन से बोलते आए हैं, उसी में हर बात को ज्यादा बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। अंग्रेजी हमारे समाज में स्टेटस सिंबल बन गई है। अब यह हर जगह हम पर थोपी जा रही है। खासतौर पर पढ़ाई में। अगर पढ़ाई का माध्यम हमारी अपनी भाषा हो तो हम समाज को ज्यादा अच्छे से समझ सकेंगे। यदि हिंदी को बाजार की भाषा बना दिया जाए तो निश्चित तौर पर लोग हिंदी पर जोर देंगे और बच्चों को हिंदी पढ़ने, बोलने और सीखने के लिए प्रेरित करेंगे।-नीरा जैन, अधिवक्ता, जिला न्यायालय
-सरकार को हर उत्पाद, जिनमें अंग्रेजी में लेबल लगा रहता है, उसकी जगह हिंदी में लिखना अनिवार्य कर देना चाहिए। विश्व का सबसे बड़ा बाजार भारत है। जिसे भी प्रवेश करना होगा उसे हिंदी सीखनी ही पड़ेगी। जिस प्रकार प्रतियोगिताओं में अंग्रेजी को अधिक मान्यता दी जा रही है, ठीक उसी प्रकार हमें भी हिंदी के समकक्ष अवधी, संस्कृत जैसी भाषाओं के साथ क्षेत्रीय भाषाओं को आगे लाना चाहिए क्योंकि हिंदी में कई भाषाओं का समावेश है।-डॉ. सूर्यपाल, हिंदी प्राध्यापक, राजकीय स्कूल हमीदा
-हिंदी को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाए। अंग्रेजी का बुखार हमारे दिमाग में घुस गया है, जिसके दबाव में हिंदी किसी कोने में दुबक सी गई है। हमें अपनी भाषा के प्रति जागरूक होना होगा और उसे उसकी पहचान दिलानी होगी। हिंदी को मनोरंजन की भाषा बना दिया गया। इसका महत्व हम नहीं समझते, लेकिन विदेशों में हमारे पुराणों पर रिसर्च किए जा रहे हैं। अमर उजाला का हिंदी है हम अभियान सराहनीय है। -डॉ. इंदू गुप्ता, प्रदेश अध्यक्षा, अग्रवाल वैश्य सम्मेलन सभा
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-धीरे-धीरे युवा समझने लगे हैं कि जिंदगी केवल नौकरी तक सीमित नहीं है। हो सकता है कि खास अंदाज में अंग्रेजी बोलकर आपको कॉल सेंटर आदि में नौकरी मिल जाए पर हिंदी आपकी सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक जरूरतों को पूरा करती है। रोजगार की दृष्टि से भी देखा जाए तो हिंदी में नए-नए अवसर मिल रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि हम सभी इन मौकों और मातृभाषा का सम्मान करें। हिंदी को अपनाने से देश में एकता और मजबूती आएगी।-रमन शर्मा, प्रिंसिपल, डीएसवी स्कूल रादौर
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-संकोच तब तक रहता है जब तक कि आप आत्मविश्वास के साथ हिंदी में खुद को प्रस्तुत नहीं करते। जब आप ऐसा करते हैं तो आपको हिंदी और अपनी ताकत का पता चलता है। बड़ी तादाद में युवा हिंदी की दम पर अलग-अलग क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। हमारी जड़ें हिंदी में हैं। हमें कभी उनसे अलग नहीं होना चाहिए।- बच्चे को उसी की भाषा में पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि वह जो पढ़े उसे सही ढंग से आगे भी पहुंचा सके।-डॉ. अंजना तलूजा, शाखा प्रबंधन, परिवार नियोजन एसोसिएशन
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-आज हर जगह अंग्रेजी का प्रभुत्व अधिक है, लेकिन यह हम पर थोपी गई है। जो भाषा हम बचपन से बोलते आए हैं, उसी में हर बात को ज्यादा बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। अंग्रेजी हमारे समाज में स्टेटस सिंबल बन गई है। अब यह हर जगह हम पर थोपी जा रही है। खासतौर पर पढ़ाई में। अगर पढ़ाई का माध्यम हमारी अपनी भाषा हो तो हम समाज को ज्यादा अच्छे से समझ सकेंगे। यदि हिंदी को बाजार की भाषा बना दिया जाए तो निश्चित तौर पर लोग हिंदी पर जोर देंगे और बच्चों को हिंदी पढ़ने, बोलने और सीखने के लिए प्रेरित करेंगे।-नीरा जैन, अधिवक्ता, जिला न्यायालय
-सरकार को हर उत्पाद, जिनमें अंग्रेजी में लेबल लगा रहता है, उसकी जगह हिंदी में लिखना अनिवार्य कर देना चाहिए। विश्व का सबसे बड़ा बाजार भारत है। जिसे भी प्रवेश करना होगा उसे हिंदी सीखनी ही पड़ेगी। जिस प्रकार प्रतियोगिताओं में अंग्रेजी को अधिक मान्यता दी जा रही है, ठीक उसी प्रकार हमें भी हिंदी के समकक्ष अवधी, संस्कृत जैसी भाषाओं के साथ क्षेत्रीय भाषाओं को आगे लाना चाहिए क्योंकि हिंदी में कई भाषाओं का समावेश है।-डॉ. सूर्यपाल, हिंदी प्राध्यापक, राजकीय स्कूल हमीदा
-हिंदी को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाए। अंग्रेजी का बुखार हमारे दिमाग में घुस गया है, जिसके दबाव में हिंदी किसी कोने में दुबक सी गई है। हमें अपनी भाषा के प्रति जागरूक होना होगा और उसे उसकी पहचान दिलानी होगी। हिंदी को मनोरंजन की भाषा बना दिया गया। इसका महत्व हम नहीं समझते, लेकिन विदेशों में हमारे पुराणों पर रिसर्च किए जा रहे हैं। अमर उजाला का हिंदी है हम अभियान सराहनीय है। -डॉ. इंदू गुप्ता, प्रदेश अध्यक्षा, अग्रवाल वैश्य सम्मेलन सभा

नीरा जैन, अधिवक्ता, जिला न्यायालय- फोटो : Yamuna Nagar

डॉ. अंजना तलूजा, शाखा प्रबंधन, परिवार नियोजन एसोसिएशन- फोटो : Yamuna Nagar

डॉ. सूर्यपाल, हिंदी प्राध्यापक।- फोटो : Yamuna Nagar

डॉ. इंदू गुप्ता, प्रदेश अध्यक्षा, अग्रवाल वैश्य सम्मेलन सभा- फोटो : Yamuna Nagar