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Yamuna Nagar News: बाल रामलीला की तैयारी में जुटे शिक्षक
Thu, 10 Oct 2024 06:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 10 Oct 2024 06:01 AM IST
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जगाधरी। काफी दिनों से चुनाव ड्यूटी में व्यस्त चल रहे शिक्षक स्कूल लौट आए हैं। इसके बाद अब शिक्षक राजकीय प्राथमिक पाठशालाओं में होने वाली निपुण बाल रामलीला की तैयारियों में जुट गए हैं। शिक्षकों को बाल रामलीला में बोलने जाने वाले छोटे-छोटे संवाद तैयार करने हैं। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में निपुण बाल रामायण प्रतियोगिता का मंचन करवाया जाएगा।
इसमें प्राथमिक पाठशाला के बच्चे रामायण के विभिन्न पात्रों का किरदार निभाएंगे। जिसके लिए स्कूलों में बच्चों को अभ्यास भी करवाया जाना है। परंतु शिक्षकों के चुनाव ड्यूटी में व्यस्त होने के कारण अभ्यास नहीं हो पाया। वहीं, रामलीला के लिए शिक्षकों को संवाद तैयार करने हैं। चूंकि संवाद छोटे बच्चों ने बोलने हैं, इसलिए यह छोटे व सरल शब्दों में होने जरूरी है।
इसके लिए मुख्यालय की ओर से दिशा निर्देश व आदेश पत्र भी जारी किया है। स्कूलों में बाल रामलीला 12 से 27 अक्टूबर तक करवाई जानी है। जिसके लिए बहुत ही कम दिन बचे हैं। मात्र दो दिन में शिक्षकों को बच्चों के लिए संवाद तैयार कर उन्हें अभ्यास भी करवाना है। ऐसे में संवाद तैयार करने में शिक्षकों के पसीने छूटने लगे हैं।
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बता दें कि बच्चों में संस्कृति के प्रति आदर, संस्कार व मानवीय गुणों का विकास करने और उच्चारण, शब्दों का अर्थ व भाव समझाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग की ओर से निपुण बाल रामलीला करवाई जाती है। इसमें अन्य रामलीला वाले नहीं बल्कि सरल व छोटे-छोटे संवाद होते हैं। चूंकि लंबे और कठिन शब्दों के संवाद बच्चे बोल नहीं पाएंगे।
इसके चलते बच्चों के लिए छोटे-छोटे संवाद तैयार किए जाने हैं। यह रामलीला संवाद तैयार करने की जिम्मेदारी स्कूल के शिक्षकों को ही दी गई है। परंतु चुनाव ड्यूटी में व्यस्त होने के कारण शिक्षक न तो बच्चों को अभ्यास करवा और न संवाद तैयार कर सके। चूंकि संवाद में हिंदी के सरल शब्दों का प्रयोग किया जाना है, जिसे तैयार करने में शिक्षकों के पसीने छूटने लगे हैं।
संवाद तैयार करने के बाद शिक्षक बच्चों से बार बार बुलवाकर देख रहे हैं, ताकि अभ्यास व मंचन के दौरान उनकी जुबान न लड़खड़ाने लगे। शिक्षक अपने ही लिखे संवाद कई बार बदल भी चुके हैं। बच्चों को जिन शब्दों के उच्चारण में परेशानी हो रही है, उन्हें हटाकर पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। बार बार संवाद में बदलाव से शिक्षक काफी परेशान हो रहे हैं, चूंकि रामायण में स्पष्ट, उत्तम और श्रेष्ठ शब्दों का प्रयोग करने के निर्देश मिले हैं।
प्राइमरी स्कूल में रामायण मंचन के विभिन्न किरदारों के लिए विद्यार्थियों का चयन हो चुका है। इस दौरान जिले के दो हजार से ज्यादा बच्चे मुख्य सहित अन्य तमाम किरदार निभाएंगे। स्कूल स्तर पर बच्चों के चयन की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई है। शिक्षकों ने स्कूल स्तर पर बच्चों को उनके किरदार के अनुसार चयनित कर लिया है।
वर्जन
एफएलएन समन्वयक संजीव सैनी ने बताया कि बच्चों को नैतिक मूल्य, संस्कृति व भाषा से जोड़ने के उद्देश्य से रामलीला करवाई जा रही है। मंचन व संवाद से विद्यार्थियों का उच्चारण कुशल होगा। विभाग की ओर से राजकीय पाठशालाओं में रामलीला का मंचन करवाया जा रहा है। इसके लिए शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई है।
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इसमें प्राथमिक पाठशाला के बच्चे रामायण के विभिन्न पात्रों का किरदार निभाएंगे। जिसके लिए स्कूलों में बच्चों को अभ्यास भी करवाया जाना है। परंतु शिक्षकों के चुनाव ड्यूटी में व्यस्त होने के कारण अभ्यास नहीं हो पाया। वहीं, रामलीला के लिए शिक्षकों को संवाद तैयार करने हैं। चूंकि संवाद छोटे बच्चों ने बोलने हैं, इसलिए यह छोटे व सरल शब्दों में होने जरूरी है।
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इसके लिए मुख्यालय की ओर से दिशा निर्देश व आदेश पत्र भी जारी किया है। स्कूलों में बाल रामलीला 12 से 27 अक्टूबर तक करवाई जानी है। जिसके लिए बहुत ही कम दिन बचे हैं। मात्र दो दिन में शिक्षकों को बच्चों के लिए संवाद तैयार कर उन्हें अभ्यास भी करवाना है। ऐसे में संवाद तैयार करने में शिक्षकों के पसीने छूटने लगे हैं।
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बता दें कि बच्चों में संस्कृति के प्रति आदर, संस्कार व मानवीय गुणों का विकास करने और उच्चारण, शब्दों का अर्थ व भाव समझाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग की ओर से निपुण बाल रामलीला करवाई जाती है। इसमें अन्य रामलीला वाले नहीं बल्कि सरल व छोटे-छोटे संवाद होते हैं। चूंकि लंबे और कठिन शब्दों के संवाद बच्चे बोल नहीं पाएंगे।
इसके चलते बच्चों के लिए छोटे-छोटे संवाद तैयार किए जाने हैं। यह रामलीला संवाद तैयार करने की जिम्मेदारी स्कूल के शिक्षकों को ही दी गई है। परंतु चुनाव ड्यूटी में व्यस्त होने के कारण शिक्षक न तो बच्चों को अभ्यास करवा और न संवाद तैयार कर सके। चूंकि संवाद में हिंदी के सरल शब्दों का प्रयोग किया जाना है, जिसे तैयार करने में शिक्षकों के पसीने छूटने लगे हैं।
संवाद तैयार करने के बाद शिक्षक बच्चों से बार बार बुलवाकर देख रहे हैं, ताकि अभ्यास व मंचन के दौरान उनकी जुबान न लड़खड़ाने लगे। शिक्षक अपने ही लिखे संवाद कई बार बदल भी चुके हैं। बच्चों को जिन शब्दों के उच्चारण में परेशानी हो रही है, उन्हें हटाकर पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। बार बार संवाद में बदलाव से शिक्षक काफी परेशान हो रहे हैं, चूंकि रामायण में स्पष्ट, उत्तम और श्रेष्ठ शब्दों का प्रयोग करने के निर्देश मिले हैं।
प्राइमरी स्कूल में रामायण मंचन के विभिन्न किरदारों के लिए विद्यार्थियों का चयन हो चुका है। इस दौरान जिले के दो हजार से ज्यादा बच्चे मुख्य सहित अन्य तमाम किरदार निभाएंगे। स्कूल स्तर पर बच्चों के चयन की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई है। शिक्षकों ने स्कूल स्तर पर बच्चों को उनके किरदार के अनुसार चयनित कर लिया है।
वर्जन
एफएलएन समन्वयक संजीव सैनी ने बताया कि बच्चों को नैतिक मूल्य, संस्कृति व भाषा से जोड़ने के उद्देश्य से रामलीला करवाई जा रही है। मंचन व संवाद से विद्यार्थियों का उच्चारण कुशल होगा। विभाग की ओर से राजकीय पाठशालाओं में रामलीला का मंचन करवाया जा रहा है। इसके लिए शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई है।