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माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा धर्म : शुक्ल
Mon, 27 Jul 2026 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 27 Jul 2026 12:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। शहर की यमुना गली स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित पांच दिवसीय श्रीकृष्ण कथा रविवार को तीसरे दिन भी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ जारी रही। कथा के दौरान कथावाचक आचार्य पं. भगवती प्रसाद शुक्ल ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का रसपान कराया।
आचार्य भगवती प्रसाद शुक्ल ने कहा कि मनुष्य की कमाई तभी पवित्र होती है, जब उसमें से कुछ अंश जरूरतमंदों और समाज सेवा के कार्यों में लगाया जाए। दान करने से धन की शुद्धि होती है और व्यक्ति के भीतर से अहंकार समाप्त होता है। उन्होंने कहा कि जिसके पास विद्या है, वह विद्या का दान करे, जिसके पास शक्ति है वह सेवा के माध्यम से उसका उपयोग करे और संपन्न व्यक्ति को धन का सदुपयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धन का अहंकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है, जबकि संतोष, सेवा और विनम्रता का भाव जीवन को महान बनाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से माता-पिता की सेवा को सर्वोच्च धर्म बताते हुए कहा कि जिन माता-पिता ने बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उनकी सेवा करना प्रत्येक संतान का कर्तव्य है। इस अवसर पर पुष्पेंद्र मिश्रा, सुरेश शुक्ला, अवनी गुप्ता, रविंद्र शर्मा, रोहित गुप्ता, विनोद सोनी, संजय शर्मा, अमित गुप्ता, संजीव चौहान श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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रादौर। शहर की यमुना गली स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित पांच दिवसीय श्रीकृष्ण कथा रविवार को तीसरे दिन भी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ जारी रही। कथा के दौरान कथावाचक आचार्य पं. भगवती प्रसाद शुक्ल ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का रसपान कराया।
आचार्य भगवती प्रसाद शुक्ल ने कहा कि मनुष्य की कमाई तभी पवित्र होती है, जब उसमें से कुछ अंश जरूरतमंदों और समाज सेवा के कार्यों में लगाया जाए। दान करने से धन की शुद्धि होती है और व्यक्ति के भीतर से अहंकार समाप्त होता है। उन्होंने कहा कि जिसके पास विद्या है, वह विद्या का दान करे, जिसके पास शक्ति है वह सेवा के माध्यम से उसका उपयोग करे और संपन्न व्यक्ति को धन का सदुपयोग करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि धन का अहंकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है, जबकि संतोष, सेवा और विनम्रता का भाव जीवन को महान बनाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से माता-पिता की सेवा को सर्वोच्च धर्म बताते हुए कहा कि जिन माता-पिता ने बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उनकी सेवा करना प्रत्येक संतान का कर्तव्य है। इस अवसर पर पुष्पेंद्र मिश्रा, सुरेश शुक्ला, अवनी गुप्ता, रविंद्र शर्मा, रोहित गुप्ता, विनोद सोनी, संजय शर्मा, अमित गुप्ता, संजीव चौहान श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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