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रिटायरमेंट के बाद भी बच्चों को पढ़ा रहे हैं जयकुमार रोहिल्ला
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गांव देवधर निवासी जय कुमार रोहिल्ला मुख्य अध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हो चुके है। इसके बाद भी वे अपने क्षेत्र के सरकारी व अन्य शिक्षण संस्थानों में पहुंचकर बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। प्राइमरी स्कूल से मुख्य अध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुए जय कुमार रोहिल्ला को 2001 में राज्य शिक्षक पुरस्कार से नवाजा गया था। वहीं 2002 में उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, लाइफटाइम एजुकेशनल अचीवमेंट अवार्ड, भारतीय शिक्षा स्वर्ण पदक, नेशनल स्टेट्स एजुकेशन अवार्ड, राष्ट्रीय विकास रत्न, एशिया पेसिफिक इंटरनेशनल अवार्ड, नेशनल अचीवमेंट अवार्ड 2018 से सम्मानित किया जा चुका हैं।
जय कुमार रोहिल्ला ने बताया कि वे एक दिन भी अपने घर पर आराम नहीं करते। उन्होंने बताया कि वे 30 अगस्त 2009 को सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद से वे लगातार स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को पढ़ाने के अलावा, स्कूल में पौधे भी लगाते हैं। इसके अलावा जरूरतमंद बच्चों को अपने पास शिक्षण सामग्री, स्कूल वर्दी, जूते इत्यादि भी उपलब्ध करवाते हैं। इन दिनों वे स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पुन: मुख्य धारा में जोड़ने का काम कर रहे हैं। सर्वे करके स्कूल में दाखिल करवाना, उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक करना, सामाजिक बुराइयों से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हैं।
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अटल बिहारी वाजपेयी ने बुलाया था घर
-जयकुमार रोहिल्ला के लोक सेवा के कार्यों को देखते हुए 2003 में उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी ने चाय पर आमंत्रित किया था। यहां पर अटल वाजपेयी ने कविता आगे बढ़ो आगे बढ़ो सुनाई। अटल वाजपेयी ने कहा था कि शिक्षकों से ही समाज को सही दिशा मिलती है। शिक्षकों को नैतिक शिक्षा व संस्कारों को युवाओं में भरना होगा। उनकी बातचीत व संदेश ने जीवन में बड़ा प्रभाव छोड़ा।
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174 जोड़ों को बंधन में बांध चुके हैं
-जय कुमार रोहिल्ला कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। वे अब तक 2000 से अधिक पौधे लगा चुके हैं। इसके साथ ही हर साल सात कन्याओं की शादी करवाते हैं। इसके लिए उन्होंने एक समिति बनाई है। अभी तक वह समिति से 174 कन्याओं की शादी करवा चुके हैं। इतना ही नहीं इन जोड़ों की कुशलता का ध्यान भी रखते हैं और इनसे मिलते जुलते रहते हैं। किसी भी समस्या पर इनके साथ भी खड़े होते हैं।
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जय कुमार रोहिल्ला ने बताया कि वे एक दिन भी अपने घर पर आराम नहीं करते। उन्होंने बताया कि वे 30 अगस्त 2009 को सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद से वे लगातार स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को पढ़ाने के अलावा, स्कूल में पौधे भी लगाते हैं। इसके अलावा जरूरतमंद बच्चों को अपने पास शिक्षण सामग्री, स्कूल वर्दी, जूते इत्यादि भी उपलब्ध करवाते हैं। इन दिनों वे स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पुन: मुख्य धारा में जोड़ने का काम कर रहे हैं। सर्वे करके स्कूल में दाखिल करवाना, उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक करना, सामाजिक बुराइयों से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हैं।
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अटल बिहारी वाजपेयी ने बुलाया था घर
-जयकुमार रोहिल्ला के लोक सेवा के कार्यों को देखते हुए 2003 में उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी ने चाय पर आमंत्रित किया था। यहां पर अटल वाजपेयी ने कविता आगे बढ़ो आगे बढ़ो सुनाई। अटल वाजपेयी ने कहा था कि शिक्षकों से ही समाज को सही दिशा मिलती है। शिक्षकों को नैतिक शिक्षा व संस्कारों को युवाओं में भरना होगा। उनकी बातचीत व संदेश ने जीवन में बड़ा प्रभाव छोड़ा।
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174 जोड़ों को बंधन में बांध चुके हैं
-जय कुमार रोहिल्ला कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। वे अब तक 2000 से अधिक पौधे लगा चुके हैं। इसके साथ ही हर साल सात कन्याओं की शादी करवाते हैं। इसके लिए उन्होंने एक समिति बनाई है। अभी तक वह समिति से 174 कन्याओं की शादी करवा चुके हैं। इतना ही नहीं इन जोड़ों की कुशलता का ध्यान भी रखते हैं और इनसे मिलते जुलते रहते हैं। किसी भी समस्या पर इनके साथ भी खड़े होते हैं।