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Yamuna Nagar News: दो साल से 13 की आबादी को नहीं मिला एक फिजिशियन
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले की आबादी 13 लाख से अधिक है। फिर भी इतनी बड़ी आबादी के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास एक फिजिशियन तक नहीं है। बिना फिजिशियन के लोग परेशान हो गए हैं। करीब दो साल होने को है, जब से जिले में एक भी फिजिशियन नहीं आया। इससे पहले जो फिजिशियन थे वह भी अनुबंध पर थे। अस्पताल में उपचार करना तो दूर जब नौकरी के लिए मेडिकल कराना होता है तो उन लोगों को कुरुक्षेत्र, करनाल या फिर अंबाला में भेज दिया जाता है। 105 करोड़ रुपये से 200 बेड का मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल का नया भवन तो बन गया लेकिन इसमें भी फिजिशियन नहीं है। पिछले दिनों केबिनेट मंत्री की तबीयत खराब हो गई थी तो उन्हें भी फिजिशियन न होने के कारण प्राइवेट अस्पताल ले जाना पड़ा था।
200 बेड का अस्पताल बनने के बाद जिस तरह से से जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है उस हिसाब से यहां कम से कम दो फिजिशियन तो होने ही चाहिए। परंतु यहां तो एक भी नहीं है। जिला अस्पताल में रोजाना 1500 से 2000 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें ज्यादातर मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, सर्दी, हार्ट जैसी बीमारियों से ग्रस्त होते हैं। ओपीडी में इनकी जांच फिजिशियन को करनी होती है। इसके अलावा जगाधरी अस्पताल में भी भीड़ बहुत ज्यादा रहती है इसलिए वहां भी फिजिशियन की जरूरत है। दो साल पहले जब फिजिशियन का अनुबंध खत्म हुआ था तो दोबारा विभाग ने किसी को जिले में नियुक्त नहीं किया। पिछले दिनों एक फिजिशियन की नियुक्त का सिविल सर्जन कार्यालय में पत्र आया था लेकिन उसने ज्वाइन ही नहीं किया।
मेडिकल के लिए दूसरे जिलों की दौड़
फिजिशियन के न होने से वह लोग भी परेशान हैं जिनकी सरकारी नौकरी लगती है। नौकरी पर ज्वाइन करने से पहले उन्हें अपने स्वास्थ्य का मेडिकल करवाना होता है। जिसमें फिजिशियन के अलावा ईएनटी, हड्डी विशेषज्ञ समेत कई डॉक्टर जांच के बाद प्रमाण पत्र जारी करते हैं। बाकी डॉक्टरों से तो यहां जांच हो जाती है, लेकिन फिजिशियन से चेकअप कराने के लिए मरीजों को अंबाला या फिर कुरुक्षेत्र में रेफर किया जा रहा है। ऐसे में जो मेडिकल एक दिन में एक जगह हो जाना चाहिए उसके लिए दो दिन खराब होते हैं। साथ ही समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। जिला अस्पताल में मेडिकल ऑफिसरों के 55 में से 23 पद खाली हैं।
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फिजिशियन की मांग की हुई है : मंजीत सिंह
सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह का कहना है कि जिले में फिजिशियन का पद काफी समय से खाली है। एक डॉक्टर की नियुक्ति हुई थी, लेकिन उसने ज्वाइन नहीं किया। फिजिशियन की मांग विभाग से की हुई है। उम्मीद है जल्द ही फिजिशियन मिल जाएगा।
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यमुनानगर। जिले की आबादी 13 लाख से अधिक है। फिर भी इतनी बड़ी आबादी के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास एक फिजिशियन तक नहीं है। बिना फिजिशियन के लोग परेशान हो गए हैं। करीब दो साल होने को है, जब से जिले में एक भी फिजिशियन नहीं आया। इससे पहले जो फिजिशियन थे वह भी अनुबंध पर थे। अस्पताल में उपचार करना तो दूर जब नौकरी के लिए मेडिकल कराना होता है तो उन लोगों को कुरुक्षेत्र, करनाल या फिर अंबाला में भेज दिया जाता है। 105 करोड़ रुपये से 200 बेड का मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल का नया भवन तो बन गया लेकिन इसमें भी फिजिशियन नहीं है। पिछले दिनों केबिनेट मंत्री की तबीयत खराब हो गई थी तो उन्हें भी फिजिशियन न होने के कारण प्राइवेट अस्पताल ले जाना पड़ा था।
200 बेड का अस्पताल बनने के बाद जिस तरह से से जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है उस हिसाब से यहां कम से कम दो फिजिशियन तो होने ही चाहिए। परंतु यहां तो एक भी नहीं है। जिला अस्पताल में रोजाना 1500 से 2000 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें ज्यादातर मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, सर्दी, हार्ट जैसी बीमारियों से ग्रस्त होते हैं। ओपीडी में इनकी जांच फिजिशियन को करनी होती है। इसके अलावा जगाधरी अस्पताल में भी भीड़ बहुत ज्यादा रहती है इसलिए वहां भी फिजिशियन की जरूरत है। दो साल पहले जब फिजिशियन का अनुबंध खत्म हुआ था तो दोबारा विभाग ने किसी को जिले में नियुक्त नहीं किया। पिछले दिनों एक फिजिशियन की नियुक्त का सिविल सर्जन कार्यालय में पत्र आया था लेकिन उसने ज्वाइन ही नहीं किया।
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मेडिकल के लिए दूसरे जिलों की दौड़
फिजिशियन के न होने से वह लोग भी परेशान हैं जिनकी सरकारी नौकरी लगती है। नौकरी पर ज्वाइन करने से पहले उन्हें अपने स्वास्थ्य का मेडिकल करवाना होता है। जिसमें फिजिशियन के अलावा ईएनटी, हड्डी विशेषज्ञ समेत कई डॉक्टर जांच के बाद प्रमाण पत्र जारी करते हैं। बाकी डॉक्टरों से तो यहां जांच हो जाती है, लेकिन फिजिशियन से चेकअप कराने के लिए मरीजों को अंबाला या फिर कुरुक्षेत्र में रेफर किया जा रहा है। ऐसे में जो मेडिकल एक दिन में एक जगह हो जाना चाहिए उसके लिए दो दिन खराब होते हैं। साथ ही समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। जिला अस्पताल में मेडिकल ऑफिसरों के 55 में से 23 पद खाली हैं।
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फिजिशियन की मांग की हुई है : मंजीत सिंह
सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह का कहना है कि जिले में फिजिशियन का पद काफी समय से खाली है। एक डॉक्टर की नियुक्ति हुई थी, लेकिन उसने ज्वाइन नहीं किया। फिजिशियन की मांग विभाग से की हुई है। उम्मीद है जल्द ही फिजिशियन मिल जाएगा।