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Yamuna Nagar News: पेपर मिल चलने से पोपलर की खेती को मिलेगा बढ़ावा
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यमुनानगर। चार साल से बंद पड़ी बल्लारपुर इंडस्ट्रीज लिमिटेड (बिल्ट) यानि यमुनानगर पेपर मिल को चलाने की तैयारी जोर शोर से हो रही है। पेपर मिल के चलने से लोगों को केवल रोजगार ही नहीं मिलेगा बल्कि इससे जिले में पोपलर की खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। जिसका सीधा फायदा किसानों को होगा। किसानों का रूझान खेतों में लकड़ी उगाने की तरफ होगा। पेपर मिल को चलाने के लिए रोजाना करीब 225 मीट्रिक टन लकड़ी की जरूरत होगी। सालभर पेपर मिल चलते रहने से लकड़ी की मांग भी बनी रहेगी। किसानों को अब केवल पेपर मिल के चलने का इंतजार है।
जिले में मानकपुर और मानकपुर में दो लक्कड़ मंडियां हैं। जिनमें रोजाना पोपलर व सफेदा लकड़ी की खरीद होती है। इन मंडियों में जिले के अलावा पंजाब व उत्तर प्रदेश से भी करीब 400 ट्रालियों व ट्रकों में रोजाना लकड़ी आती है। फिलहाल इस सारी लकड़ी की खपत केवल प्लाईवुड फैक्ट्रियों व सॉ मिलों में है। इसी का फायदा प्लाईवुड फैक्टरी संचालक उठाते हैं। आपस में मोनोपली करके वह खुद ही लकड़ी का रेट घटा देते हैं तो खुद ही बढ़ा देते हैं। इसका सीधा नुकसान किसानों को होता है, क्योंकि उन्हें लकड़ी का वाजिब रेट नहीं मिल पाता। परंतु पेपर मिल के चलने के बाद ऐसा नहीं होगा।
मिल के चलने से लकड़ी की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी। मंडियों में लकड़ी खरीदने वाले आढ़तियों के पास अब पेपर मिल में लकड़ी बेचने का विकल्प होगा, क्योंकि फिलहाल आढ़ती प्लाईवुड फैक्टरियों पर ही निर्भर हैं। पेपर मिल के चलने से लक्कड़ मंडियों में लकड़ी की आवक भी दोगुणा होने का अनुमान है। क्योंकि एक वक्त था जब जिले में रोजाना लकड़ी की औसतन 1000 ट्रालियां आती थी। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार लकड़ी अब आवक लगभग आधी रह गई है। ऐसे में पेपर मिल के चलने से लकड़ी की आवक जोर पकड़ेगी।
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200 मीट्रिक टन कागज का रोजाना उत्पादन
पेपर मिल चलाने का ट्रायल सितंबर में होगा। अक्तूबर से मिल में रोजाना 200 मीट्रिक टन कागज का उत्पादन होगा। कागज बनाने के लिए मिल को पोपलर, बांस व प्लाईवुड वेस्ट चाहिए। घाटे के चलते पेपर मिल कई साल पहले बंद कर दिया गया था। पहले पेपर मिल का मालिक थापर ग्रुप था। अब बिल्ट को थापर ग्रुप से मुंबई की फिनक्वेस्ट कंपनी ने करीब 700 करोड़ रुपये में खरीदा है। बिल्ट की स्थापना वर्ष 1940 में हुई थी। पेपर मिल में कागज बनाने वाली मशीनरी कई दशक पुरानी है। इसलिए मशीनरी को करीब 200 करोड़ रुपये से अपग्रेड किया जा रहा है। पेपर मिल यमुनानगर शहर के बीचोबीच करीब 170 एकड़ में फैली हुई है। इसमें से 120 एकड़ में कागज बनाने का प्लांट लगा है।
किसानों को काफी फायदा होगा : प्रकाश मिश्रा
बिल्ट के व्यवसाय प्रमुख प्रकाश मिश्रा ने बताया पेपर मिल की क्षमता रोजाना 200 मीट्रिक टन कागज बनाने की है। इसके लिए हर रोज 225 एमटी लकड़ी चाहिए होगी। इससे जहां हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा वहीं किसानों को भी फायदा होगा। किसान खेत में फसल के अलावा पेड़ भी लगाएंगे।
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जिले में मानकपुर और मानकपुर में दो लक्कड़ मंडियां हैं। जिनमें रोजाना पोपलर व सफेदा लकड़ी की खरीद होती है। इन मंडियों में जिले के अलावा पंजाब व उत्तर प्रदेश से भी करीब 400 ट्रालियों व ट्रकों में रोजाना लकड़ी आती है। फिलहाल इस सारी लकड़ी की खपत केवल प्लाईवुड फैक्ट्रियों व सॉ मिलों में है। इसी का फायदा प्लाईवुड फैक्टरी संचालक उठाते हैं। आपस में मोनोपली करके वह खुद ही लकड़ी का रेट घटा देते हैं तो खुद ही बढ़ा देते हैं। इसका सीधा नुकसान किसानों को होता है, क्योंकि उन्हें लकड़ी का वाजिब रेट नहीं मिल पाता। परंतु पेपर मिल के चलने के बाद ऐसा नहीं होगा।
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मिल के चलने से लकड़ी की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी। मंडियों में लकड़ी खरीदने वाले आढ़तियों के पास अब पेपर मिल में लकड़ी बेचने का विकल्प होगा, क्योंकि फिलहाल आढ़ती प्लाईवुड फैक्टरियों पर ही निर्भर हैं। पेपर मिल के चलने से लक्कड़ मंडियों में लकड़ी की आवक भी दोगुणा होने का अनुमान है। क्योंकि एक वक्त था जब जिले में रोजाना लकड़ी की औसतन 1000 ट्रालियां आती थी। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार लकड़ी अब आवक लगभग आधी रह गई है। ऐसे में पेपर मिल के चलने से लकड़ी की आवक जोर पकड़ेगी।
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200 मीट्रिक टन कागज का रोजाना उत्पादन
पेपर मिल चलाने का ट्रायल सितंबर में होगा। अक्तूबर से मिल में रोजाना 200 मीट्रिक टन कागज का उत्पादन होगा। कागज बनाने के लिए मिल को पोपलर, बांस व प्लाईवुड वेस्ट चाहिए। घाटे के चलते पेपर मिल कई साल पहले बंद कर दिया गया था। पहले पेपर मिल का मालिक थापर ग्रुप था। अब बिल्ट को थापर ग्रुप से मुंबई की फिनक्वेस्ट कंपनी ने करीब 700 करोड़ रुपये में खरीदा है। बिल्ट की स्थापना वर्ष 1940 में हुई थी। पेपर मिल में कागज बनाने वाली मशीनरी कई दशक पुरानी है। इसलिए मशीनरी को करीब 200 करोड़ रुपये से अपग्रेड किया जा रहा है। पेपर मिल यमुनानगर शहर के बीचोबीच करीब 170 एकड़ में फैली हुई है। इसमें से 120 एकड़ में कागज बनाने का प्लांट लगा है।
किसानों को काफी फायदा होगा : प्रकाश मिश्रा
बिल्ट के व्यवसाय प्रमुख प्रकाश मिश्रा ने बताया पेपर मिल की क्षमता रोजाना 200 मीट्रिक टन कागज बनाने की है। इसके लिए हर रोज 225 एमटी लकड़ी चाहिए होगी। इससे जहां हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा वहीं किसानों को भी फायदा होगा। किसान खेत में फसल के अलावा पेड़ भी लगाएंगे।