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Yamuna Nagar News: हनुमान का किरदार से जीवन में आई सहजता, वाणी हुई नरम
Thu, 02 Apr 2026 02:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 02 Apr 2026 02:55 AM IST
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रामलीला मंचन के दौरान हनुमान जी का किरदार निभाते बिट्टू वर्मा। स्वयं
जगाधरी। रामलीला मंचन में हनुमान जी का किरदार निभाने के बाद जीवन की अस्थिरता समाप्त हो गई और मन चंचल से स्थिर हो गया। किरदार निभाने के बाद लोगों का नजरिया ही बदल गया है और आज लोग मिलते हैं तो जय श्रीराम बोलते हैं। ये विचार जिले की सबसे पुरानी श्रीयमुना रामलीला कमेटी के मंचन में हनुमान जी का पात्र करने वाले बिट्टू वर्मा ने वयक्त किए।
बिट्टू वर्मा ने बताया कि करीब 22 साल पहले रामलीला कमेटी से जुड़े थे। शुरुआत में सामान्य किरदार मिले। 20 साल पहले जब उन्हें हनुमान जी के पात्र के लिए चुना गया तो वह स्तब्ध रह गए। रामलीला के सबसे बड़े पात्र का अभिनय मिलने पर वह शंकाओं से घिर गए। इतना महत्वपूर्ण किरदार करने में वह स्वयं को असहज महसूस कर रहे थे। उन्होंने वीर हनुमान जी का स्मरण कर मन में अपनी शंकाओं को उजागर किया, तो उत्तर मिला की सब कुछ श्रीराम करेंगे। फिर उन्होंने हनुमान जी का किरदार किया। उनका अभिनय सभी ने सराहा। पहली बार किरदार निभाने के बाद उन्हें लगा कि केवल दस दिन ही वह भूमिका में थे, लेकिन इसके बाद जीवन पूरी तरह बदल गया। पहले जो लोग मिलकर हाथ मिलाते थे, हनुमान जी का किरदार करने के बाद वह प्रमाण करने लगे और हाय हैलो की जगह जय श्रीराम बोलने लगे। इसके बाद सब कुछ बदल गया। रामलीला मंचन से पहले वे कभी-कभी मांसाहार भी ग्रहण कर लेते थे। किरदार निभाने के बाद उन्हें इससे घृणा होने लगी। हमेशा कटु और तीखी रहने वाली वाणी मधुर और सहज हो गई। बात-बात आने वाला गुस्सा शांत हो गया। आज लोग उन्हें मिलते हैं तो चरण छूते हैं। उनके सभी काम श्रीराम और हनुमान जी की कृपा से पूर्ण होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका मॉडल टाउन में श्रीजी फूड नाम से उनका ढाबा है, यहां वैष्णो भोजन मिलता है। इससे पहले उनका कार्य सही नहीं चल रहा था। यह किरदार निभाने के बाद ही यह काम करने का मार्ग प्रशस्त हुआ और वह इसमें बेहद सुखी हैं। इस किरदार के बाद वे परिस्थिति में सहज रहते हैं और प्रभु की कृपा से समाधान हो जाता है। संवाद
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बिट्टू वर्मा ने बताया कि करीब 22 साल पहले रामलीला कमेटी से जुड़े थे। शुरुआत में सामान्य किरदार मिले। 20 साल पहले जब उन्हें हनुमान जी के पात्र के लिए चुना गया तो वह स्तब्ध रह गए। रामलीला के सबसे बड़े पात्र का अभिनय मिलने पर वह शंकाओं से घिर गए। इतना महत्वपूर्ण किरदार करने में वह स्वयं को असहज महसूस कर रहे थे। उन्होंने वीर हनुमान जी का स्मरण कर मन में अपनी शंकाओं को उजागर किया, तो उत्तर मिला की सब कुछ श्रीराम करेंगे। फिर उन्होंने हनुमान जी का किरदार किया। उनका अभिनय सभी ने सराहा। पहली बार किरदार निभाने के बाद उन्हें लगा कि केवल दस दिन ही वह भूमिका में थे, लेकिन इसके बाद जीवन पूरी तरह बदल गया। पहले जो लोग मिलकर हाथ मिलाते थे, हनुमान जी का किरदार करने के बाद वह प्रमाण करने लगे और हाय हैलो की जगह जय श्रीराम बोलने लगे। इसके बाद सब कुछ बदल गया। रामलीला मंचन से पहले वे कभी-कभी मांसाहार भी ग्रहण कर लेते थे। किरदार निभाने के बाद उन्हें इससे घृणा होने लगी। हमेशा कटु और तीखी रहने वाली वाणी मधुर और सहज हो गई। बात-बात आने वाला गुस्सा शांत हो गया। आज लोग उन्हें मिलते हैं तो चरण छूते हैं। उनके सभी काम श्रीराम और हनुमान जी की कृपा से पूर्ण होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका मॉडल टाउन में श्रीजी फूड नाम से उनका ढाबा है, यहां वैष्णो भोजन मिलता है। इससे पहले उनका कार्य सही नहीं चल रहा था। यह किरदार निभाने के बाद ही यह काम करने का मार्ग प्रशस्त हुआ और वह इसमें बेहद सुखी हैं। इस किरदार के बाद वे परिस्थिति में सहज रहते हैं और प्रभु की कृपा से समाधान हो जाता है। संवाद
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