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डैम बनाने को हिमाचल वन विभाग से मिली अनुमति, 30 करोड़ का किया भुगतान
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Permission from Himachal Forest Department to build dam, 30 crores paid
- फोटो : Yamuna Nagar
बिलासपुर। हरियाणा-हिमाचल प्रदेश की सीमा पर जल्द ही पानी रोकने के लिए डैम बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर अक्तूबर तक काम शुरू हो जाएगा। हिमाचल प्रदेश के वन विभाग की तरफ से एफआरए सर्टिफिकेट मिल गया है। जिसके बाद वन विभाग हिमाचल को 30 करोड़ की राशि का भुगतान कर दिया गया है। सीडब्ल्यूसी की जांच भी पूरी हो गई है। फाइनल नक्शा तैयार कर दिया गया है। मानसून सीजन के कारण कुछ देरी हुई है। अक्तूबर में बैराज, रिजर्व वायर व डैम का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। यह बात सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन धूमन सिंह किरमिच ने वीरवार को कस्बा के रेस्ट हाउस में अधिकारियों से बैठक के उपरांत कहीं।
उन्होंने बताया कि सरस्वती नदी के लिए 68 एकड़ भूमि किसानों से अधिग्रहण की गई है। किसानों ने विभाग के पोर्टल पर भूमि का विवरण दर्ज करवा दिया है। प्रदेश सरकार की योजना के तहत किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। कुछ किसानों ने नदी के लिए निशुल्क भूमि देने की बात कही है, लेकिन सरकार योजना के तहत सभी किसानों को मुआवजा देगी। सरस्वती नदी के लिए जमीन देने वाले किसानों को प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री सम्मानित करेंगे। सरस्वती नदी में पूरा वर्ष पानी बहे इस लक्ष्य को 2024 से पहले पूरा कर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आदिबद्री से सिरसा तक सरस्वती नदी के 200 किलोमीटर के क्षेत्र में से 180 किलोमीटर में जल का प्रवाह है। सरस्वती के साथ लगते 10 किलोमीटर क्षेत्र में किसान बहुत खुश हैं, क्योंकि इससे जलस्तर बढ़ेगा जो किसानों के लिए वरदान साबित होगा। सरस्वती नदी के साथ लगते नदियों और नालों के बारिश के पानी को सरस्वती नदी से जोड़ा जाएगा। इसके साथ लगते गांवों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे सरस्वती नदी में न जाए इसके लिए फाइव पौंड सिस्टम बनाकर पानी को साफ किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी का कायाकल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व पुरातत्व विरासत से संबंधित राष्ट्रीय गौरव का विषय है। सरस्वती नदी आदिबद्री से मैदानों में प्रवेश करती है। नदी के किनारे पर करीब 120 घाट व मंदिर स्थित हैं। सभी का विकास किया जाएगा। आदिबद्री में पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए मौजूदा समय में तेरह करोड़ 96 लाख रुपये खर्च कर विकास कार्य किए जा रहे हैं। पर्यटन की दृष्टि से कपाल मोचन, आदिबद्री, कलेसर, सरस्वती उद्गम स्थल और लौहगढ़ क्षेत्र का सरकार विकास कर रही है। मौके पर अधिवक्ता मुकेश गर्ग, तहसीलदार चेतना चौधरी, सिंचाई विभाग के जेई विनोद कुमार, अनुराग सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। संवाद
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उन्होंने बताया कि सरस्वती नदी के लिए 68 एकड़ भूमि किसानों से अधिग्रहण की गई है। किसानों ने विभाग के पोर्टल पर भूमि का विवरण दर्ज करवा दिया है। प्रदेश सरकार की योजना के तहत किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। कुछ किसानों ने नदी के लिए निशुल्क भूमि देने की बात कही है, लेकिन सरकार योजना के तहत सभी किसानों को मुआवजा देगी। सरस्वती नदी के लिए जमीन देने वाले किसानों को प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री सम्मानित करेंगे। सरस्वती नदी में पूरा वर्ष पानी बहे इस लक्ष्य को 2024 से पहले पूरा कर लिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि आदिबद्री से सिरसा तक सरस्वती नदी के 200 किलोमीटर के क्षेत्र में से 180 किलोमीटर में जल का प्रवाह है। सरस्वती के साथ लगते 10 किलोमीटर क्षेत्र में किसान बहुत खुश हैं, क्योंकि इससे जलस्तर बढ़ेगा जो किसानों के लिए वरदान साबित होगा। सरस्वती नदी के साथ लगते नदियों और नालों के बारिश के पानी को सरस्वती नदी से जोड़ा जाएगा। इसके साथ लगते गांवों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे सरस्वती नदी में न जाए इसके लिए फाइव पौंड सिस्टम बनाकर पानी को साफ किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी का कायाकल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व पुरातत्व विरासत से संबंधित राष्ट्रीय गौरव का विषय है। सरस्वती नदी आदिबद्री से मैदानों में प्रवेश करती है। नदी के किनारे पर करीब 120 घाट व मंदिर स्थित हैं। सभी का विकास किया जाएगा। आदिबद्री में पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए मौजूदा समय में तेरह करोड़ 96 लाख रुपये खर्च कर विकास कार्य किए जा रहे हैं। पर्यटन की दृष्टि से कपाल मोचन, आदिबद्री, कलेसर, सरस्वती उद्गम स्थल और लौहगढ़ क्षेत्र का सरकार विकास कर रही है। मौके पर अधिवक्ता मुकेश गर्ग, तहसीलदार चेतना चौधरी, सिंचाई विभाग के जेई विनोद कुमार, अनुराग सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। संवाद