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मानसिक तनाव व अकेलेपन में मौत को गले लगा रहे लोग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Sep 2022 02:12 AM IST
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People embracing death due to mental stress and loneliness
यमुनानगर। भागमभाग भरी जिंदगी में मानसिक तनाव, अकेलापन, घरेलू विवाद, आर्थिक तंगी और अन्य परेशानियां इंसान के जीवन पर भारी पड़ रही हैं। यही कारण है कि कई लोग आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। कुछ अकेलेपन के चलते तो कई व्यवसाय में घाटा, पारिवारिक समस्या, प्रेम संबंध में असफल होने के चलते मौत को गले लगा ले रहे हैं। मनोचिकित्सक के अनुसार मोबाइल बढ़ते एकाकी पन का अहम कारण है, जिसके कारण भरा पूरा परिवार रहते हुए भी लोग अकेलेपन के शिकार हो रहे हैं।
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जिले में मानसिक तनाव, अकेलापन, आर्थिक तंगी, घरेलू विवाद और अन्य कई कारणों से पिछले डेढ़ साल में 83 लोगों ने आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाए। इस दौरान 43 लोगों ने दूसरों से परेशान होकर जीवन लीला समाप्त की है। ये केस पुलिस थानों में दर्ज हैं। इनके अलावा मानसिक परेशानी व अन्य कारणों से मौत को गले लगाने वालों की संख्या 40 से अधिक है, जिनका कोई रिकार्ड नहीं है। घरेलू विवाद के चलते आत्महत्या करने में शहर की बड़ी हस्तियां भी शामिल हैं।
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जिले में सबसे अधिक आत्महत्या की घटनाएं नहर में कूदने, फंदा लगाने, ट्रेन के आगे आकर जान देने व जहरीला पदार्थ निकलने से होती है। पुलिस से मिले आंकड़ों के अनुसार साल 2021 में 21 और साल 2022 में अब तक 22 केस आत्महत्या के लिए उकसाने के केस दर्ज किए गए हैं। इनमें अधिकतर दहेज उत्पीड़न, रुपयों के लेनदेन, मारपीट से आहत, फाइनेंसर से परेशान होने के मामले हैं। इस दौरान प्रेम प्रसंग के चलते भी कई युवाओं ने जान दी, लेकिन परिजनों ने इन्हें मानसिक परेशानी बताया। मनोचिकित्सक भी आत्महत्या करने के कारण मानसिक तनाव, अकेलापन, आर्थिक तंगी और घरेलू विवाद बता रहे हैं। उन्होंने इन मामलों के लिए सबसे अहम मोबाइल बताया है, जिसने सभी रिश्तों के होते हुए भी परिवार से अलग कर दिया और लोग अकेलेपन का शिकार हो खुदकुशी करने को मजबूर हो रहे हैं।
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तनाव होने पर नन्हें बच्चों के साथ बिताएं समय
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. विक्रम भारती का कहना है कि ज्यादा तनाव होना आत्महत्या का कारण बन सकता है। ऐसे समय में व्यक्ति को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। उसका ध्यान रखना चाहिए। उसका तनाव से ध्यान बदलने के लिए परिवार के सदस्यों को उसके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहिए। तनावग्रस्त व्यक्ति को अपने नन्हें बच्चों के साथ अधिक समय बिताना चाहिए। इसके अलावा यदि अगर कोई आर्थिक तंगी में है तो उससे विचार-विमर्श करें। बच्चों पर पढ़ाई को लेकर दबाव न बनाएं व सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों पर नजर रखें।
हाल में हुई आत्महत्या किए जाने की कुछ घटनाएं
- 16 अप्रैल को एक व्यक्ति ने अपने घर में ही फंदा लगाकर जान दे दी थी। मृतक के पास से मिले सूसाइड नोट में उसने बंटवारे में प्रॉपर्टी से कम हिस्सा मिलने की बात लिखी है। आत्महत्या करने के समय वे घर पर अकेले थे। उसका परिवार बाहर गया हुआ था। - बीती
- 25 जून को 12वीं कक्षा की छात्रा ने जहरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या कर ली थी। परिजनों ने बताया था कि उसकी 12वीं कक्षा में कंपार्टमेंट आ गई थी। जिससे वह तनाव में थी। इसी परेशानी में उसने आत्महत्या की।
- बीती 21 जून को पांसरा फाटक के पास आईटीआई के छात्र ने ट्रेन के आगे आकर आत्महत्या कर ली। परिजनों के अनुसार वह आईटीआई में अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। वह कभी-कभी नशा भी करता था। रविवार शाम को मां ने इसी बात को लेकर उसे डांट दिया था। जिसके बाद वह बिना बताए घर से निकल गया। उन्हें सूचना मिली थी कि उसने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली।

- 30 अगस्त को विश्वकर्मा चौक के पास बुजुर्ग की नाले में गिरने से मौत हो गई थी। लोगों का कहना था कि बुजुर्ग ने बीमारी से परेशान होकर नाले में कूद कर आत्महत्या की थी।
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