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झाड़ियों में मिला नवजात का आधा शव, नोच रहे थे कुत्ते
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नवजात का शव बरामद होने के बाद पास की कॉलोनी में पूछताछ करते पुलिसकर्मी। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। लोकलाज का भय कहें या फिर कुछ और, लेकिन जिले में मां की ममता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। कैंप इलाके की जम्मू कॉलोनी में सोमवार की सुबह किसी ने नवजात को झाड़ियों में फेंक दिया। कुछ ही देर में नवजात को कुत्तों ने नोच डाला। आसपास के लोगों ने जब गली के कुत्तों के मुंह पर खून लगा देखा तो दहशत फैल गई। इसके बाद पीछा करते हुए कुछ लोग झाड़ियों में पहुंचे, जहां नवजात का आधा शव पड़ा था, जबकि आधे शव को कुत्ते खा गए थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को समेटकर सिविल अस्पताल भिजवाया, जहां से पोस्टमार्टम के लिए उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया।
पुलिस को दी शिकायत में जम्मू कॉलोनी निवासी आशा वर्कर रेखा रानी ने बताया कि गढ़वाली धर्मशाला और माता मंदिर के पीछे खाली प्लाट में एक नवजात के शव को कुत्ते नोच रहे थे। उसके अनुसार देखने से नवजात चंद घंटे पहले का ही मालूम पड़ता है। आशंका जताई कि लोकलाज के भय से किसी महिला ने इसे फेंक दिया है, जिसके बाद कुत्तों ने इसे क्षत-विक्षत कर दिया।
उसने बताया कि शव क्षत-विक्षत होने के कारण यह भी मालूम नहीं हो सका कि यह लड़के का था या फिर लड़की का। दूसरी ओर मौके पर पहुंची एक बुजुर्ग महिला की मानें तो शव बच्ची का प्रतीत हो रहा है। इस संबंध में एसपी कमलदीप गोयल ने बताया कि नवजात के आधे हिस्से को कुत्ते द्वारा नोचने की जानकारी मिली है। मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज जांच की जा रही है। आसपास के अस्पतालों में भी पड़ताल की जा रही है। जल्द ही नवजात की मां का पता लगाया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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छह महीने में नवजात को फेंकने की पांचवीं घटना
माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। शहर में नवजात को फेंकने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जम्मू कॉलोनी में लोगों को एक कुत्ते के मुहं पर खून लगा दिखाई दिया। जिस पर कुछ लोगों ने उसका पीछा किया तो वह झाड़ियों की तरफ गया। वहां कई अन्य कुत्ते भी नवजात को नोंच कर खा रहे थे। शव के कई अंग कुत्तों ने नोंच खाया था। ये मंजर देखकर लोगों के होश उड़ गए और उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पिछले छह महीने के दौरान पांचवां नवजात फेंका गया है।
आशा वर्कर रेखा ने पुलिस को बताया कि जम्मू कॉलोनी में अज्ञात महिला ने अपने नवजात बच्चे को धर्मशाला और मंदिर के पीछे सुनसान जगह पर झाड़ियों में फेंक दिया। जिसे कुत्ते नोंच रहे थे। पुलिस ने अब केस दर्ज कर उसके परिजनों की तलाश शुरू कर दी है।
इसी तरह 27 जुलाई को एक बिन ब्याही मां ने बच्चे को जन्म देका उसे शौचालय की छत पर फेंक दिया। लोकलाज के भय से जगाधरी के मुखर्जी पार्क में नौ माह की गर्भवती कुंवारी युवती ने क्वार्टर में बने शौचालय में खुद ही अपनी डिलीवरी कराई। इसके बाद नवजात बेटे को शौचालय की छत पर रख दिया। डिलीवरी के बाद युवती बेहोश हो गई। उसकी नानी सुबह उसे सिविल अस्पताल में लेकर गई। जहां डाक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उसकी डिलीवरी हुई है।
अन्य मामले में 22 जून को तीन दिन की नवजात को उसकी दादी और पिता जगाधरी अस्पताल में फेंक कर चले गए थे। अस्पताल स्टाफ को पार्क में बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी तो उसे उठाकर नर्सरी में भर्ती करवाया। हालांकि पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम ने परिजनों को पता कर लिया था।
इसी तरह मई में जिंदल पार्क के पास एक बिन ब्याही मां अपने नवजात को फेंक कर चली गई। बच्चा जिस कपड़े में लिपटा हुआ था, उससे परिजनों तक पुलिस पहुंच गई। हालांकि वह अपने दूर के रिश्तेदार से संबंध बनाने पर गर्भवती हुई थी। वहीं छह महीने पहले भी एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। जिसे पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम ने अस्पताल में भर्ती करवाया था। हालांकि अब तक इस बच्ची के परिजनों का पता नहीं चल सका है। माना जा रहा है कि यह बच्ची भी अवैध रिश्तों से पैदा हुई होगी, जिसे प्रसव के बाद मरने के लिए फेंक दिया गया।
किसी जानकार के पास लड़कियों को अकेला न छोड़ें : डॉ. अंजू
चाइल्ड लाइन की निदेशिका डॉ. अंजू बाजपेयी का कहना है कि जिले में नवजात मिलने के मामले बढ़ गए हैं। अधिकतर मामलों में किशोरी की डिलीवरी होना सामने आया है, जिनमें उनके अपनों का ही वे शिकार बनती है। मां-बाप अपनी किशोर लड़कियों को अकेला किसी जानकार के पास छोड़ने से बचें। ऐसे केस में ही नवजात को फेंका जाता है।
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यमुनानगर। लोकलाज का भय कहें या फिर कुछ और, लेकिन जिले में मां की ममता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। कैंप इलाके की जम्मू कॉलोनी में सोमवार की सुबह किसी ने नवजात को झाड़ियों में फेंक दिया। कुछ ही देर में नवजात को कुत्तों ने नोच डाला। आसपास के लोगों ने जब गली के कुत्तों के मुंह पर खून लगा देखा तो दहशत फैल गई। इसके बाद पीछा करते हुए कुछ लोग झाड़ियों में पहुंचे, जहां नवजात का आधा शव पड़ा था, जबकि आधे शव को कुत्ते खा गए थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को समेटकर सिविल अस्पताल भिजवाया, जहां से पोस्टमार्टम के लिए उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया।
पुलिस को दी शिकायत में जम्मू कॉलोनी निवासी आशा वर्कर रेखा रानी ने बताया कि गढ़वाली धर्मशाला और माता मंदिर के पीछे खाली प्लाट में एक नवजात के शव को कुत्ते नोच रहे थे। उसके अनुसार देखने से नवजात चंद घंटे पहले का ही मालूम पड़ता है। आशंका जताई कि लोकलाज के भय से किसी महिला ने इसे फेंक दिया है, जिसके बाद कुत्तों ने इसे क्षत-विक्षत कर दिया।
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उसने बताया कि शव क्षत-विक्षत होने के कारण यह भी मालूम नहीं हो सका कि यह लड़के का था या फिर लड़की का। दूसरी ओर मौके पर पहुंची एक बुजुर्ग महिला की मानें तो शव बच्ची का प्रतीत हो रहा है। इस संबंध में एसपी कमलदीप गोयल ने बताया कि नवजात के आधे हिस्से को कुत्ते द्वारा नोचने की जानकारी मिली है। मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज जांच की जा रही है। आसपास के अस्पतालों में भी पड़ताल की जा रही है। जल्द ही नवजात की मां का पता लगाया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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छह महीने में नवजात को फेंकने की पांचवीं घटना
माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। शहर में नवजात को फेंकने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जम्मू कॉलोनी में लोगों को एक कुत्ते के मुहं पर खून लगा दिखाई दिया। जिस पर कुछ लोगों ने उसका पीछा किया तो वह झाड़ियों की तरफ गया। वहां कई अन्य कुत्ते भी नवजात को नोंच कर खा रहे थे। शव के कई अंग कुत्तों ने नोंच खाया था। ये मंजर देखकर लोगों के होश उड़ गए और उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पिछले छह महीने के दौरान पांचवां नवजात फेंका गया है।
आशा वर्कर रेखा ने पुलिस को बताया कि जम्मू कॉलोनी में अज्ञात महिला ने अपने नवजात बच्चे को धर्मशाला और मंदिर के पीछे सुनसान जगह पर झाड़ियों में फेंक दिया। जिसे कुत्ते नोंच रहे थे। पुलिस ने अब केस दर्ज कर उसके परिजनों की तलाश शुरू कर दी है।
इसी तरह 27 जुलाई को एक बिन ब्याही मां ने बच्चे को जन्म देका उसे शौचालय की छत पर फेंक दिया। लोकलाज के भय से जगाधरी के मुखर्जी पार्क में नौ माह की गर्भवती कुंवारी युवती ने क्वार्टर में बने शौचालय में खुद ही अपनी डिलीवरी कराई। इसके बाद नवजात बेटे को शौचालय की छत पर रख दिया। डिलीवरी के बाद युवती बेहोश हो गई। उसकी नानी सुबह उसे सिविल अस्पताल में लेकर गई। जहां डाक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उसकी डिलीवरी हुई है।
अन्य मामले में 22 जून को तीन दिन की नवजात को उसकी दादी और पिता जगाधरी अस्पताल में फेंक कर चले गए थे। अस्पताल स्टाफ को पार्क में बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी तो उसे उठाकर नर्सरी में भर्ती करवाया। हालांकि पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम ने परिजनों को पता कर लिया था।
इसी तरह मई में जिंदल पार्क के पास एक बिन ब्याही मां अपने नवजात को फेंक कर चली गई। बच्चा जिस कपड़े में लिपटा हुआ था, उससे परिजनों तक पुलिस पहुंच गई। हालांकि वह अपने दूर के रिश्तेदार से संबंध बनाने पर गर्भवती हुई थी। वहीं छह महीने पहले भी एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। जिसे पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम ने अस्पताल में भर्ती करवाया था। हालांकि अब तक इस बच्ची के परिजनों का पता नहीं चल सका है। माना जा रहा है कि यह बच्ची भी अवैध रिश्तों से पैदा हुई होगी, जिसे प्रसव के बाद मरने के लिए फेंक दिया गया।
किसी जानकार के पास लड़कियों को अकेला न छोड़ें : डॉ. अंजू
चाइल्ड लाइन की निदेशिका डॉ. अंजू बाजपेयी का कहना है कि जिले में नवजात मिलने के मामले बढ़ गए हैं। अधिकतर मामलों में किशोरी की डिलीवरी होना सामने आया है, जिनमें उनके अपनों का ही वे शिकार बनती है। मां-बाप अपनी किशोर लड़कियों को अकेला किसी जानकार के पास छोड़ने से बचें। ऐसे केस में ही नवजात को फेंका जाता है।

झाड़ियों में नवजात का शव मिलने के बाद आपस में चर्चा करती कॉलोनी की महिलाएं। संवाद- फोटो : Yamuna Nagar