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Yamuna Nagar News: ग्रामीणों से अधिक शहरी बनते हैं साइबर ठगों के शिकार
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यमुनानगर। आए दिन अलग-अलग तरीके से साइबर ठग लोगों को अपने झांसे में लेकर उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं। अब तक की पड़ताल में ये सामने आया है कि गांव के लोगों से अधिक शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं।
यमुनानगर जिले में पिछले एक साल में साइबर ठगी के मामलों में तेजी आई है। जनवरी 2024 से अब तक जिले में 117 एफआईआर साइबर थाने में दर्ज की जा चुकी हैं। जिनमें करीब 6.78 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है। ज्यादातर मामलों में लोगों को घर बैठे पैसा कमाने का लालच देकर ठगी करने के मामले सबसे अधिक हैं। खास बात यह है कि ठगी के मामले सबसे अधिक शहरी क्षेत्रों से ही हैं। जो एफआईआर दर्ज हुई हैं। उनमें 70 फीसदी पीड़ित शहरी क्षेत्रों के ही रहने वाले हैं। साइबर क्राइम थाना पुलिस का कहना है कि शहरों में लोग सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय रहते हैं। जिस कारण ठगी का शिकार भी यही लोग अधिक होते हैं।
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यह प्रमुख तरीके हैं साइबर ठगी के
डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग स्मैक, जॉब स्कैम, गलती से पैसे भेजने का स्कैम, इमोशनल मैनिपुलेशन स्कैम, लकी ड्रॉ स्कैम, कैश ऑन डिलिवरी, कंपनी में निवेश करने के नाम पर ठगी, ट्रेडिंग का झांसा देकर, लोन दिलाने का सांसा देकर, केवाईसी के नाम पर ठगी करना, अश्लील वीडियो वायरल करने का झांसा देकर ठगी।
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जागरूकता ही बचाव : एसपी
एसपी यमुनानगर राजीव देसवाल ने कहा कि साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूकता की सबसे बड़ा हथियार है। लोगों को लालच में न पड़कर अपने विवेक से काम करना चाहिए। अनजान लिंक पर क्लिक न करें। जिससे साइबर ठगी से बचा जा सकता है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने के लिए समय समय पर अभियान चलाया जा रहा है।
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यमुनानगर जिले में पिछले एक साल में साइबर ठगी के मामलों में तेजी आई है। जनवरी 2024 से अब तक जिले में 117 एफआईआर साइबर थाने में दर्ज की जा चुकी हैं। जिनमें करीब 6.78 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है। ज्यादातर मामलों में लोगों को घर बैठे पैसा कमाने का लालच देकर ठगी करने के मामले सबसे अधिक हैं। खास बात यह है कि ठगी के मामले सबसे अधिक शहरी क्षेत्रों से ही हैं। जो एफआईआर दर्ज हुई हैं। उनमें 70 फीसदी पीड़ित शहरी क्षेत्रों के ही रहने वाले हैं। साइबर क्राइम थाना पुलिस का कहना है कि शहरों में लोग सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय रहते हैं। जिस कारण ठगी का शिकार भी यही लोग अधिक होते हैं।
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यह प्रमुख तरीके हैं साइबर ठगी के
डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग स्मैक, जॉब स्कैम, गलती से पैसे भेजने का स्कैम, इमोशनल मैनिपुलेशन स्कैम, लकी ड्रॉ स्कैम, कैश ऑन डिलिवरी, कंपनी में निवेश करने के नाम पर ठगी, ट्रेडिंग का झांसा देकर, लोन दिलाने का सांसा देकर, केवाईसी के नाम पर ठगी करना, अश्लील वीडियो वायरल करने का झांसा देकर ठगी।
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जागरूकता ही बचाव : एसपी
एसपी यमुनानगर राजीव देसवाल ने कहा कि साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूकता की सबसे बड़ा हथियार है। लोगों को लालच में न पड़कर अपने विवेक से काम करना चाहिए। अनजान लिंक पर क्लिक न करें। जिससे साइबर ठगी से बचा जा सकता है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने के लिए समय समय पर अभियान चलाया जा रहा है।