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Yamuna Nagar News: जिला अस्पताल में पहुंची दवाइयां, मरीज की दिक्कत होगी दूर
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यमुनानगर। मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल में आने वाले मरीजों को अब बाहर से दवाइयां नहीं खरीदनी पड़ेंगी। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल को दवाइयां उपलब्ध करवा दी हैं। कई दिनों से लोग अस्पताल में दवाइयां न मिलने से परेशान थे। उपचार के लिए आए लोग बाजार में मेडिकल स्टोर से महंगे रेट पर दवाइयां खरीदने को मजबूर थे। वीरवार को दवाइयों से भरी गाड़ी अस्पताल में पहुंची तो मरीजों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने भी राहत की सांस ली। क्योंकि अस्पताल में खांसी की दवाई के साथ-साथ जलन दूर करने के लिए टेबलेट तक खत्म हो गई थी। ज्ञात हो कि जब से 200 बेड का नया अस्पताल बना है तब से इसमें रोजाना 2000 से अधिक ओपीडी होती है।
काफी समय से जिला अस्पताल में दवाइयों की बहुत कमी थी। उपचार के बाद लोग दवाई के लिए घंटों लंबी लाइन में लगते थे, इसके बावजूद उन्हें काउंटर से सारी दवाइयां नहीं मिलती थी। यदि डॉक्टर के पर्ची में पांच दवाइयां लिखी तो उसमें से केवल दो से तीन दवाई ही मरीज को अस्पताल से उपलब्ध हो पाती थी। बाकी की दवाई उन्हें बाजार से खरीदनी पड़ती थी। ऐसे में मरीज व उनके तीमारदार डॉक्टरों को कोसते हुए चले जाते थे। लोग एक ही बात कहते हैं कि अस्पताल में आते तो मुफ्त उपचार के लिए हैं, लेकिन बाहर से दवाई खरीदने के कारण यह बहुत महंगा पड़ रहा है।
एनएसी भेजने में चार बार हुई गलती:
वेयरहाउस से दवाई लेने के लिए जिला अस्पताल की तरफ से एनएसी भेजी जाती है। इसमें दवाइयों से संबंधित जानकारी देनी होती है। परंतु अस्पताल के स्टाफ की तरफ से एक के बाद एक चार बार एनएसी में गलती की गई। जिस कारण अस्पताल को दवाइयां उपलब्ध नहीं हो रही थी। यह गलती भी तब ठीक हुई जब अस्पताल की पीएमओ डॉ. दिव्या मंगला ने अपने स्तर पर पता किया कि दूसरे अस्पतालों को दवाइयां उपलब्ध हो रही हैं, लेकिन उन्हें नहीं। पीएमओ ने गलती को ठीक कराया तो तीन दिन बाद ही अस्पताल में दवाइयों की खेप पहुंच गई।
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अमर उजाला ने उठाया था मामला:
जिला अस्पताल में दवाइयों की कमी का मामला अमर उजाला कई बार प्रकाशित कर चुका है। दवाइयां न मिलने का असर कहीं न कहीं अब अस्पताल की ओपीडी पर भी पड़ने लगा था। लोगों को अस्पताल से सभी दवाइयां न मिलने और बाजार से महंगे रेट पर खरीदने का मामला अमर उजाला ने उठाया था।
दवाइयां आ गई हैं: दिव्या मंगला
जिला अस्पताल की पीएमओ डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि तकनीकी खामी को दूर कर दिया गया है। अब अस्पताल में ज्यादातर दवाइयां आ गई हैं। कुछ दवाइयां रह गई हैं वह भी जल्द ही अस्पताल में आ जाएंगी। प्रयास यही है कि अस्पताल में मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न आए।
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काफी समय से जिला अस्पताल में दवाइयों की बहुत कमी थी। उपचार के बाद लोग दवाई के लिए घंटों लंबी लाइन में लगते थे, इसके बावजूद उन्हें काउंटर से सारी दवाइयां नहीं मिलती थी। यदि डॉक्टर के पर्ची में पांच दवाइयां लिखी तो उसमें से केवल दो से तीन दवाई ही मरीज को अस्पताल से उपलब्ध हो पाती थी। बाकी की दवाई उन्हें बाजार से खरीदनी पड़ती थी। ऐसे में मरीज व उनके तीमारदार डॉक्टरों को कोसते हुए चले जाते थे। लोग एक ही बात कहते हैं कि अस्पताल में आते तो मुफ्त उपचार के लिए हैं, लेकिन बाहर से दवाई खरीदने के कारण यह बहुत महंगा पड़ रहा है।
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एनएसी भेजने में चार बार हुई गलती:
वेयरहाउस से दवाई लेने के लिए जिला अस्पताल की तरफ से एनएसी भेजी जाती है। इसमें दवाइयों से संबंधित जानकारी देनी होती है। परंतु अस्पताल के स्टाफ की तरफ से एक के बाद एक चार बार एनएसी में गलती की गई। जिस कारण अस्पताल को दवाइयां उपलब्ध नहीं हो रही थी। यह गलती भी तब ठीक हुई जब अस्पताल की पीएमओ डॉ. दिव्या मंगला ने अपने स्तर पर पता किया कि दूसरे अस्पतालों को दवाइयां उपलब्ध हो रही हैं, लेकिन उन्हें नहीं। पीएमओ ने गलती को ठीक कराया तो तीन दिन बाद ही अस्पताल में दवाइयों की खेप पहुंच गई।
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अमर उजाला ने उठाया था मामला:
जिला अस्पताल में दवाइयों की कमी का मामला अमर उजाला कई बार प्रकाशित कर चुका है। दवाइयां न मिलने का असर कहीं न कहीं अब अस्पताल की ओपीडी पर भी पड़ने लगा था। लोगों को अस्पताल से सभी दवाइयां न मिलने और बाजार से महंगे रेट पर खरीदने का मामला अमर उजाला ने उठाया था।
दवाइयां आ गई हैं: दिव्या मंगला
जिला अस्पताल की पीएमओ डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि तकनीकी खामी को दूर कर दिया गया है। अब अस्पताल में ज्यादातर दवाइयां आ गई हैं। कुछ दवाइयां रह गई हैं वह भी जल्द ही अस्पताल में आ जाएंगी। प्रयास यही है कि अस्पताल में मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न आए।